फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Attach files, tap water , dried

फाइलों में पानी देते नल सूखे

Sat, 13 Feb 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sat, 13 Feb 2016 12:30 AM IST
विज्ञापन
Attach files, tap water , dried
ललितपुर। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर यह आंकड़े झूठे हैं, यह दावा किताबी है, शायर अदम गोंडवी की सालों पहले लिखी यह पंक्ति जनपद के कई गांवों की स्थिति पर आज भी अक्षरश: लागू हो रही है।
विज्ञापन


सूखे की स्थिति से जूझ रहे बुंदेलखंड के इस प्रमुख जिले में पेयजल को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है, लेकिन जल संस्थान कागजों में गांवों में पेयजल आपूर्ति की रिपोर्ट शासन को भेज रहा है।
विज्ञापन


जल संस्थान की ओर से जनवरी माह में शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुुुताबिक ललितपुर ग्रामीण (बांसी सेक्शन) की कुल 417 किमी में से दो सौ किमी की पाइप लाइन में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस योजना के तहत कुल 48 गांव आते हैं, जिसमें से केवल दस गांवों में पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जल संस्थान द्वारा जिन 10 गांवों में पेयजल आपूर्ति के दावे किए गए हैं, उनमें से एक गांव रौंडा भी है। रौंडा गांव नगर सीमा से मात्र चार किमी की दूरी पर स्थित है। जल संस्थान की फाइलों के मुताबिक यहां पर भरपूर पानी की सप्लाई की जा रही है, लेकिन जब अमर उजाला ने गांव में पेयजल की स्थिति को जानने की कोशिश की तो सरकारी आंकड़ों के विपरीत गांव में पेयजल के लिए सुबह से जद्दोजहद शुरू हो जाती है।

हैंगर बन गए हैं नल
ग्राम रौंडा नगर सीमा से सटा है, लेकिन इसके बाद भी इस गांव के लोग पेयजल जैसी मूलभूत जरूरत को तरस रहे हैं। गांव में पेयजल की पाइप लाइन वर्ष 1971 में डाली गई थी। गांव निवासी शिक्षक हरिश्चंद्र की मानें तो पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति वर्षों पहले होती थी, तब गांव में गिने-चुने घरों में पानी आता था। वर्तमान में गांव में बनी टंकी शोपीस का काम कर रही है और नल कपड़े टांगने के लिए हैंगर का काम कर रहे हैं।

पेयजल के लिए घर की महिलाओं के साथ ही पुरुष व बच्चों को भी परेशान होना पड़ रहा है। अपनी ट्राली में रखे ड्रमों से पानी निकाल रहे जितेंद्र सिंह ने बताया कि वह अपने खेत पर बने नलकूप से पानी ट्रैक्टर-ट्राली से ढोकर लाते हैं, जिससे घर की महिलाओं व बच्चों को परेशान नहीं होना पड़े। रौंडा गांव में प्रवेश के पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे हैंडपंप से स्कूल जाने के बजाए किशोरियां घर के लिए पानी भरते हुए देखी जा सकतीं हैं।

दलित बस्ती में कुआं भरने का होता है इंतजार
रौंड़ा गांव स्थित दलित बस्ती में करीब पंद्रह सौ दलितों की आबादी एक कुएं के भरोसे है। सूखे का वर्ष होने से इस कुएं में जलस्तर खात्मे की ओर है। पानी भरने के लिए दलित महिलाएं इंतजार करती हैं और कुएं में थोड़ा पानी भरने के बाद उसे निकाल लेती हैं।

महिला लीला बताती हैं कि उनकी बस्ती में हैंडपंप नहीं है, पास की बस्ती में लगे हैंडपंप में भी जलस्तर कम है। जहां पानी के लिए लंबी लाइन लगती है। कुएं का पानी पीने से बस्ती में बच्चे बीमार हो रहे हैं, लेकिन कोई सुध लेना वाला नहीं है।

बांसी में टैंकर चल रहे
कस्बा बांसी में शहजाद नदी में बने इंटकवेल से पेयजल आपूर्ति की जाती है। नदी सूखने के कारण कस्बे में भारी पेयजल संकट हो गया। जनप्रतिनिधियों द्वारा बांसी में पेयजल संकट की स्थिति से जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार को अवगत कराया गया।


डीएम ने सबंधित अधिकारियों को दो दिन में पेयजल संकट को दूर करने और निर्माणाधीन पाइप लाइन का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। डीएम के निर्देश पर चेते जल संस्थान ने बांसी कस्बा में टैंकरों से हर घर को दो सौ लीटर पानी उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

अगर पेयजल आपूर्ति बंद है और शासन को गलत रिपोर्ट भेजी जा रही है तो यह गंभीर विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रुपेश कुमार, जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed