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अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार नहीं होते अफसर
Thu, 28 Feb 2019 01:30 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Thu, 28 Feb 2019 01:30 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। आखिरकार क्यों, जिम्मेदार अफसर शहर में पसरे अतिक्रमण को हटाने के लिए तैयार नहीं होते हैं। हर बार किसी न किसी बहाने से अतिक्रमण हटाओ अभियान फिस्स हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। अब पुलिस बल की कमी बताकर अतिक्रमण हटाओ अभियान स्थगित किया गया है। यह हम नहीं बल्कि शहर के बुद्धिजीवियों का कहना है। इस तरह की लचर व्यवस्था से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
नगर पालिका परिषद शहर के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी शहर किसी कस्बे के माफिक नजर आता है। घंटाघर प्रांगण के आसपास संकरे रास्ते इस बात की गवाही देते हैं। प्रधान डाकघर के मुख्य गेट से सटकर फास्ट फूड के ठेले खड़े हो जाते हैं, यह पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर है। इतना ही नहीं, नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने फल व नाश्ते के ठेले रोजाना सजे रहते हैं। पुराना सदर कांटा के आसपास भी अतिक्रमण देखते ही बनता है। कमोवेश यही स्थिति स्टेशन रोड, सावरकरचौक, महावीर प्याऊ, कैलगुवां तिगड्डा आदि की है। बीते दिनों विभिन्न शिकायतों के आधार पर नगर पालिका परिषद ने अतिक्रमण हटाओ अभियान का रोस्टर जारी किया। इसमें 23 फरवरी को घंटाघर से तुवन चौराहा तक अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की गई। इस दौरान पालिका कर्मियों को कार्यालय के सामने का अतिक्रमण नजर नहीं आया। इस दौरान ही पालिका के अफसरों पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई के लिए आरोप लोगों ने लगा दिए थे। नगर पालिका परिषद द्वारा जारी किए रोस्टर के मुताबिक 28 फरवरी को तुवन चौराहे से गिरजाघर होकर बस स्टैंड तक अतिक्रमण हटाया जाना है, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस बल की कमी के चलते अभियान को आगे जारी रखना संभव नहीं है। इस स्थिति से अतिक्रमणकारियों की बांछें खिल गई हैं। वहीं, लंबे समय से अतिक्रमण हटाने के इंतजार में बैठे बुद्धिजीवी वर्ग को इस कदम से मायूसी हाथ लगी है। शहर में जहां देखों वहां अतिक्रमण सजा नजर आ रहा है। पूर्व सभासद बाबूलाल तिवारी का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते अफसर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। लोकसभा चुनाव निकट हैं, ऐसे में शहर का अतिक्रमण हटाना अफसरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जिस तरह से कार्यक्रम स्थगित हुआ है, उससे स्पष्ट है कि इस बार भी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव काम कर गया है।
सीओ ने हटवाए ठेले
क्षेत्राधिकारी सदर राजा सिंह ने घंटाघर प्रांगण व प्रधान डाकघर के आसपास लगे ठेले हटवाए। उन्होंने ठेला दुकानदारों से कहा कि अब वह यहां अपने ठेले नहीं लगाए। इस दौरान कुछ ठेला दुकानदारों का कहना है कि कई ठेला विभिन्न मार्गों पर सजे हैं और उन्हें ही हटाया जा रहा है। यह तो उनके साथ नाइंसाफी है। यदि हटाना है तो सभी को हटाया जाए।
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अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में बृहस्पतिवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाना संभव नहीं है।
मधुसूदन जायसवाल, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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नगर पालिका परिषद शहर के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी शहर किसी कस्बे के माफिक नजर आता है। घंटाघर प्रांगण के आसपास संकरे रास्ते इस बात की गवाही देते हैं। प्रधान डाकघर के मुख्य गेट से सटकर फास्ट फूड के ठेले खड़े हो जाते हैं, यह पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर है। इतना ही नहीं, नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने फल व नाश्ते के ठेले रोजाना सजे रहते हैं। पुराना सदर कांटा के आसपास भी अतिक्रमण देखते ही बनता है। कमोवेश यही स्थिति स्टेशन रोड, सावरकरचौक, महावीर प्याऊ, कैलगुवां तिगड्डा आदि की है। बीते दिनों विभिन्न शिकायतों के आधार पर नगर पालिका परिषद ने अतिक्रमण हटाओ अभियान का रोस्टर जारी किया। इसमें 23 फरवरी को घंटाघर से तुवन चौराहा तक अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की गई। इस दौरान पालिका कर्मियों को कार्यालय के सामने का अतिक्रमण नजर नहीं आया। इस दौरान ही पालिका के अफसरों पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई के लिए आरोप लोगों ने लगा दिए थे। नगर पालिका परिषद द्वारा जारी किए रोस्टर के मुताबिक 28 फरवरी को तुवन चौराहे से गिरजाघर होकर बस स्टैंड तक अतिक्रमण हटाया जाना है, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस बल की कमी के चलते अभियान को आगे जारी रखना संभव नहीं है। इस स्थिति से अतिक्रमणकारियों की बांछें खिल गई हैं। वहीं, लंबे समय से अतिक्रमण हटाने के इंतजार में बैठे बुद्धिजीवी वर्ग को इस कदम से मायूसी हाथ लगी है। शहर में जहां देखों वहां अतिक्रमण सजा नजर आ रहा है। पूर्व सभासद बाबूलाल तिवारी का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते अफसर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। लोकसभा चुनाव निकट हैं, ऐसे में शहर का अतिक्रमण हटाना अफसरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जिस तरह से कार्यक्रम स्थगित हुआ है, उससे स्पष्ट है कि इस बार भी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव काम कर गया है।
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सीओ ने हटवाए ठेले
क्षेत्राधिकारी सदर राजा सिंह ने घंटाघर प्रांगण व प्रधान डाकघर के आसपास लगे ठेले हटवाए। उन्होंने ठेला दुकानदारों से कहा कि अब वह यहां अपने ठेले नहीं लगाए। इस दौरान कुछ ठेला दुकानदारों का कहना है कि कई ठेला विभिन्न मार्गों पर सजे हैं और उन्हें ही हटाया जा रहा है। यह तो उनके साथ नाइंसाफी है। यदि हटाना है तो सभी को हटाया जाए।
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अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में बृहस्पतिवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाना संभव नहीं है।
मधुसूदन जायसवाल, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद