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मकान को लेकर तनाव में थे अधिवक्ता

Tue, 12 Jan 2021 01:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 01:42 AM IST
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Advocate dpression for house
ललितपुर। कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नदीपुरा निवासी पेशे से वकील रामशरण श्रीवास्तव ने खुद तो मौत चुन ली पर ऐसा करते वक्त भी उनमें परोपकार का भाव था। उन्होंने सुसाइड नोट में अपने शरीर के अच्छे अंगों को दान में देने की बात लिखी है। वे अपने ही मकान के विवाद में इस प्रकार उलझे कि तनाव से उबर नहीं पाए। उन्होंने जहर खाकर जान दे दी।
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मृतक अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव तीन भाई थे। मंझले भाई प्रकाश नारायण श्रीवास्तव की मौत करीब ग्यारह वर्ष पहले हो गई थी, जिनकी दो पुत्रियां व एक पुत्र है। बड़े भाई प्रभुदयाल श्रीवास्तव पेशे से वकील हैं। उक्त तीनों भाई व उनके परिवार एक ही मकान में रहते हैं। मृतक की कोई संतान नहीं है। परिवार के कुछ सदस्यों से मकान को लेकर विवाद की बात सुसाइड नोट में बताई है। जबकि, उनकी भतीजी मेघा व अन्य रिश्तेदारों ने मकान के विवाद और मुकदमा को लेकर अधिवक्ता के टेंशन में होने की बात कही है।
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सोमवार की सुबह अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव करीब दस बजे घर से कचहरी जाने की बात कहकर निकले थे। कचहरी में पहुंचने पर उन्होंने कुछ अपने साथी अधिवक्ताओं से मुकदमा के संबंध में चर्चा की। वह परेशान दिखाई दे रहे थे। कई बार तो अधिवक्ताओं ने टोका, लेकिन वह कुछ नहीं बोले। वह कभी कोर्ट तो कभी बार भवन में आते- जाते रहे। दोपहर करीब डेढ़ बजे तबीयत खराब होने पर वह बार भवन में जाकर स्टील की लंबी कुर्सी पर लेट गए। वह करीब तीन से चार घंटे तक वहीं रहे। किसी ने ज्यादा टोका नहीं। इसी दौरान उन्हें उल्टियां हुईं और अचानक बेसुध हो गए। यह देख करीब साढ़े चार बजे कुछ अधिवक्ताओं ने उनकी मदद के लिए एंबुलेंस बुलाई, लेकिन एंबुलेंस में देरी होते देख अधिवक्ता निजी वाहन से ही उन्हें बेसुध अवस्था में जिला अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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एक मुकदमे के संबंध में अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव कचहरी में आए थे। दोपहर में उनकी तबीयत खराब होने पर वह बार भवन में कुर्सी पर लेट गए थे, लेकिन बाद में उनकी अचानक हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाया गया और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
- पवन तिवारी, अधिवक्ता।
अधिवक्ता रामशरण जिला बार भवन में बेेहोश पड़े थे, यह देख कुछ अधिवक्ताओं ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां उनकी मौत हो गई।
- ओमप्रकाश घोष, अध्यक्ष, जिला बार संघ।
इस कदर आजिज आ चुके थे कि आत्महत्या को ‘मर्डर’ करार दिया
ललितपुर। मकान के विवाद ने अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव को तोड़ कर रख दिया था। वे पल-पल इस मुद्दे पर होने वाले विवाद और तनाव से आजिज आ चुके थे। अपनों की ही बेरुखी और अप्रत्याशित व्यवहार के आगे वे हार गए। जिंदगी भर पारिवारिक संपत्ति के ऐसे तमाम मुकदमे लड़ने के बावजूद वे खुद को संभाल नहीं सके। खुद के मकान के मुद्दे ने मौत तक पहुंचा दिया। उनकी परेशानी का आकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि सुसाइड नोट में अपनों पर ही आरोपों की झड़ी लगाते हुए खुद की आत्महत्या को मर्डर तक करार दिया।
खबर सुनते ही दौड़ पड़े अधिवक्ता
ललितपुर। अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव को उल्टियां होने और बेसुध हो जाने की खबर जैसे ही अधिवक्ताओं को मिली, सभी अपना कामकाज छोड़कर खबर जानने के लिए दौड़ पड़े। अधिवक्ता काफी मिलनसार थे। इस कारण उनके सभी से अच्छे संबंध थे। कचहरी में शाम के वक्त फरियादी कम हो गए थे। अधिवक्ता भी घर जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन जैसे ही खबर मिली कि अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव बेसुध हो गए हैं और उन्हें उल्टियां हो रहीं हैं, तो आनन- फानन में एंबुलेंस बुलाई गई। लेकिन, एंबुलेंस आने पर देरी होती देख साथी अधिवक्ता स्वयं ही अपनी गाड़ी से उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। पीछे से अन्य अधिवक्ता भी जिला अस्पताल पहुंच गए। लेकिन, चिकित्सकों ने अधिवक्ता को मृत घोषित कर दिया।

दो बहनें एक ही घर में
ललितपुर। अधिवक्ता रामशरण श्रीवास्तव और उनके भाई प्रकाश नारायण श्रीवास्तव की पत्नी आपस में बहने हैं। भाई प्रकाश नारायण की मौत करीब ग्यारह वर्ष पहले हो गई थी। रामशरण श्रीवास्तव के कोई संतान नहीं है। अधिवक्ता समेत तीन भाइयों के परिजन एक ही घर में रहते हैं। अब अधिवक्ता की मौत के बाद बड़े भाई प्रभुदयाल श्रीवास्तव अकेले रह गए हैं।
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