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उन्नाव घोटाले के बाद प्रशासन सजग, मांगा ब्योरा
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ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग उन्नाव में हुए कंपोजिट ग्रांट घोटाले में जिलाधिकारी के निलंबन के बाद से स्थानीय जिला प्रशासन सजग हो गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से पिछले साल की कंपोजिट ग्रांट का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है, जिससे सच्चाई का पता लगाया जा सके।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत, स्वच्छता, स्टेशनरी, बिजली उपकरण, खेल के उपकरण, टाट पट्टी खरीदना, डस्टर खरीदना, वार्षिकोत्सव कराना समेत अन्य गतिविधियों के लिए अलग से विद्यालयों को कंपोजिट ग्रांट मुहैया कराई जाती है। इस पैसे का उपयोग विद्यालय अपने हिसाब से करते हैं। ग्रांट का दुरुपयोग न हो, इसके लिए शासन समय- समय पर जांच कराता है। जिले को शासन से पांच करोड़ 98 लाख रुपये कंपोजिट ग्रांट के रूप में 2018-19 में मिले थे। यह पैसा खर्च भी हो गया, लेकिन अब तक प्रशासन को इसके खर्च का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिला है।
उन्नाव घोटाले के बाद प्रशासन कंपोजिट ग्रांट को लेकर गंभीर है। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से कंपोजिट ग्रांट किस विद्यालय में किस मद में खर्च हुई है, इसका पूरा ब्योरा उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है। उपभोग प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही तय हो सकेगा कि आगे क्या कार्रवाई की जाए।
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अभी तक कंपोजिट ग्रांट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इसीलिए बीएसए रामप्रवेश से पिछले साल का कंपोजिट ग्रांट का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है।
- अनिल कुमार पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी
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बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत, स्वच्छता, स्टेशनरी, बिजली उपकरण, खेल के उपकरण, टाट पट्टी खरीदना, डस्टर खरीदना, वार्षिकोत्सव कराना समेत अन्य गतिविधियों के लिए अलग से विद्यालयों को कंपोजिट ग्रांट मुहैया कराई जाती है। इस पैसे का उपयोग विद्यालय अपने हिसाब से करते हैं। ग्रांट का दुरुपयोग न हो, इसके लिए शासन समय- समय पर जांच कराता है। जिले को शासन से पांच करोड़ 98 लाख रुपये कंपोजिट ग्रांट के रूप में 2018-19 में मिले थे। यह पैसा खर्च भी हो गया, लेकिन अब तक प्रशासन को इसके खर्च का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिला है।
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उन्नाव घोटाले के बाद प्रशासन कंपोजिट ग्रांट को लेकर गंभीर है। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से कंपोजिट ग्रांट किस विद्यालय में किस मद में खर्च हुई है, इसका पूरा ब्योरा उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है। उपभोग प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही तय हो सकेगा कि आगे क्या कार्रवाई की जाए।
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अभी तक कंपोजिट ग्रांट का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इसीलिए बीएसए रामप्रवेश से पिछले साल का कंपोजिट ग्रांट का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है।
- अनिल कुमार पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी