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एबीआरसी पर आया जिम्मेदारी का पहाड़
ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:11 AM IST
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ललितपुर। ब्लाक संसाधन केंद्रों में कार्यरत सह समन्वयक (एबीआरसी) अब मुश्किल में दिखाई देने लगे हैं। इसकी वजह सह समन्वयकों को मंडलायुक्त झांसी के ड्रीम प्रोजेक्ट में हर माह 40 स्कूल और शासन के निर्देश पर हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण करने की जिम्मेदारी मिल गई है।
परिषदीय शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए नित नए प्रयोग हो रहे हैं। बीते वर्षों में ब्लाक स्तर पर अकादमिक हब बनाने की मंशा लेकर ब्लाक संसाधन केंद्र की स्थापना की गई, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी को बीआरसी व चिह्नित शिक्षकों को सह समन्वयक बनाया गया है।
इस तरह प्रत्येक ब्लाक पर एक बीआरसी व पांच विषयों के सह समन्वयक रखे गए। पहले सह समन्वयकों से विद्यालयों के अनुश्रवण और अनुसमर्थन का काम लिया जाता रहा। लेकिन, शिक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसे ध्यान में रखकर कमिश्नर के राममोहन राव ने ऐडी बेसिक झांसी की मदद से शिक्षा संबर्द्धन प्रोजेक्ट शिक्षा सबका दायित्व तैयार कराया।
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इसमें दक्षताएं तय करते हुए सह समन्वयकों को हर माह 40 विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सौपी गई। शुरुआत में सह समन्वयकों ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया। लेकिन, शैक्षिक सत्र बदलते ही इसे भूल गए और पुराने ढर्रे पर काम करना आरंभ कर दिया। समय ने एक बार फिर करवट ली तो सह समन्वयकों के कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई।
शासन ने अब हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण तय कर दिए। यही नहीं, मंडलायुक्त के राम मोहन राव ने अपने प्रोजेक्ट की समीक्षा अफसरों के साथ की तो प्रोजेक्ट पर फिर काम फिर से तेज हो गया। हालात यह हैं कि अब सह समन्वयकों को कमिश्नर के प्रोजेक्ट में 40 विद्यालय एवं शासन के निर्देश पर हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी मिल गई, जिससे सह समन्वयकों के चेहरों पर तनाव दिखाई देने लगा।
कई सह समन्वयक इसे अव्यवहारिक बता रहे हैं। कुछ सह समन्वयक स्कूलों के निरीक्षण के लिए अभी तक मन नहीं बना पाए हैं तो अधिकतर सह समन्वयकों ने स्कूलों के निरीक्षणों पर जाना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में सह समन्वयक विद्यालयों के निरीक्षणों की संख्या को लेकर अफसरों से मुलाकात कर सकते हैं।
मिड-डे मील पर भी दौड़ानी होगी नजर
सह समन्वयकों को अनुश्रवण, निरीक्षण के साथ अब मध्याह्न भोजन योजना पर भी नजर दौड़ानी होगी। इस संबंध में बीएसए एसपी यादव ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया कि प्रदेश शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में बीआरसी के सह समन्वयकों को हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण करने हैं।
निरीक्षण के दौरान शिक्षक व छात्र उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता, साफ सफाई, शौचालयों की क्रियाशीलता, यूनिफार्म वितरण और मध्याह्न भोजन का हाल जानना होगा।
डायट से नहीं हटा अटैचमेंट
एक तरफ सह समन्वयकों को विद्यालयों के निरीक्षणों का लक्ष्य बढ़ता जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ डायट के सह समन्वयक बेफिक्र नजर आ रहे हैं। कारण, डायट प्राचार्य का उन्हें प्रश्रय प्राप्त हो रहा है, जिससे वह विभागीय कार्रवाई से बचने में कामयाब हो रहे हैं।
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परिषदीय शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के लिए नित नए प्रयोग हो रहे हैं। बीते वर्षों में ब्लाक स्तर पर अकादमिक हब बनाने की मंशा लेकर ब्लाक संसाधन केंद्र की स्थापना की गई, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी को बीआरसी व चिह्नित शिक्षकों को सह समन्वयक बनाया गया है।
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इस तरह प्रत्येक ब्लाक पर एक बीआरसी व पांच विषयों के सह समन्वयक रखे गए। पहले सह समन्वयकों से विद्यालयों के अनुश्रवण और अनुसमर्थन का काम लिया जाता रहा। लेकिन, शिक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसे ध्यान में रखकर कमिश्नर के राममोहन राव ने ऐडी बेसिक झांसी की मदद से शिक्षा संबर्द्धन प्रोजेक्ट शिक्षा सबका दायित्व तैयार कराया।
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इसमें दक्षताएं तय करते हुए सह समन्वयकों को हर माह 40 विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सौपी गई। शुरुआत में सह समन्वयकों ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया। लेकिन, शैक्षिक सत्र बदलते ही इसे भूल गए और पुराने ढर्रे पर काम करना आरंभ कर दिया। समय ने एक बार फिर करवट ली तो सह समन्वयकों के कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई।
शासन ने अब हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण तय कर दिए। यही नहीं, मंडलायुक्त के राम मोहन राव ने अपने प्रोजेक्ट की समीक्षा अफसरों के साथ की तो प्रोजेक्ट पर फिर काम फिर से तेज हो गया। हालात यह हैं कि अब सह समन्वयकों को कमिश्नर के प्रोजेक्ट में 40 विद्यालय एवं शासन के निर्देश पर हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी मिल गई, जिससे सह समन्वयकों के चेहरों पर तनाव दिखाई देने लगा।
कई सह समन्वयक इसे अव्यवहारिक बता रहे हैं। कुछ सह समन्वयक स्कूलों के निरीक्षण के लिए अभी तक मन नहीं बना पाए हैं तो अधिकतर सह समन्वयकों ने स्कूलों के निरीक्षणों पर जाना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में सह समन्वयक विद्यालयों के निरीक्षणों की संख्या को लेकर अफसरों से मुलाकात कर सकते हैं।
मिड-डे मील पर भी दौड़ानी होगी नजर
सह समन्वयकों को अनुश्रवण, निरीक्षण के साथ अब मध्याह्न भोजन योजना पर भी नजर दौड़ानी होगी। इस संबंध में बीएसए एसपी यादव ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया कि प्रदेश शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में बीआरसी के सह समन्वयकों को हर माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण करने हैं।
निरीक्षण के दौरान शिक्षक व छात्र उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता, साफ सफाई, शौचालयों की क्रियाशीलता, यूनिफार्म वितरण और मध्याह्न भोजन का हाल जानना होगा।
डायट से नहीं हटा अटैचमेंट
एक तरफ सह समन्वयकों को विद्यालयों के निरीक्षणों का लक्ष्य बढ़ता जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ डायट के सह समन्वयक बेफिक्र नजर आ रहे हैं। कारण, डायट प्राचार्य का उन्हें प्रश्रय प्राप्त हो रहा है, जिससे वह विभागीय कार्रवाई से बचने में कामयाब हो रहे हैं।