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बरसात में टापू बन जाएंगे कई मुहल्ले
Lalitpur
Updated Sat, 21 Jun 2014 05:36 AM IST
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ललितपुर। गांधी नगर, लैड़ियापुरा व नई बस्ती स्थित विभिन्न गलियों में रहने वाले सैकड़ों लोगों के लिए बारिश का मौसम आफत बन गया है। नालियों से ऊपरी सतह पर नाला होने के कारण बारिश इन मोहल्लों की दर्जनों गलियों को लबालब कर देती है। मानसून के दस्तक देते ही संभावित जलभराव को लेकर यहां रहने वाले लोगों के चेहरों पर चिंता की लकीरें देखीं जा सकती हैं।
किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए बिजली, पानी, मार्ग प्रकाश, सड़क व जल निकासी जैसे मुद्दे प्रमुख होते हैं। इनमें से एक की भी कमी होने पर विकास अपूर्ण माना जाता है। नगर सीमा में विकसित दिखाई देने वाले तमाम मुहल्ले सही मायने में जल निकासी की समस्या से ग्रसित हैं। गांधी नगर, नईबस्ती, लैड़ियापुरा मुहल्लों में अनियोजित तरीके से धड़ाधड़ मकान बना लिए गए। निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने वाले भवन स्वामियों ने विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण से न तो नक्शा पास कराया और न ही जल निकासी के पुख्ता इंतजाम किए। फलस्वरूप तमाम गलियों की नालियां बड़े नालों से नीची हो गईं और जल निकासी प्रभावित हो गईं। गर्मी व सर्दियों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के माध्यम से जैसे तैसे नाले में पहुंच जाता है पर बारिश के मौसम में उफान मारकर बहते नाले का पानी नालियों से वापस मुहल्लों की गलियों की गलियों में घुटनों तक भरने लगता है। मानसून की पहली व दूसरी बारिश के दौरान उक्त मुहल्लों में जलभराव हो गया, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ना लाजमी है। सरस्वती शिशु मंदिर के पास एक गली में रहने वाले पंडित राकेश मिश्र व सुनील कुमार इस समस्या से ग्रसित हैं। उनका मानना है कि जल निकासी का इंतजाम किया जाना बेहद आवश्यक है।
नाले पर हो रहा निर्माण
ललितपुर। सरस्वती शिशु मंदिर के आसपास रहने वाले लोग इस बार जलभराव को लेकर और भी चिंतित हैं। इस स्कूल के पीछे से निकले नाले के पास कुछ लोग अवैध निर्माण करने में जुटे हुए हैं। मुहल्लेवासियों का कहना है कि नजूल की जमीन पर अवैध निर्माण से जल निकासी प्रभावित होगी, जिससे दर्जनों गलियों में पानी भरना तय है। शिकायत के बाद भी विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिसको लेकर मुहल्लेवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
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किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए बिजली, पानी, मार्ग प्रकाश, सड़क व जल निकासी जैसे मुद्दे प्रमुख होते हैं। इनमें से एक की भी कमी होने पर विकास अपूर्ण माना जाता है। नगर सीमा में विकसित दिखाई देने वाले तमाम मुहल्ले सही मायने में जल निकासी की समस्या से ग्रसित हैं। गांधी नगर, नईबस्ती, लैड़ियापुरा मुहल्लों में अनियोजित तरीके से धड़ाधड़ मकान बना लिए गए। निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने वाले भवन स्वामियों ने विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण से न तो नक्शा पास कराया और न ही जल निकासी के पुख्ता इंतजाम किए। फलस्वरूप तमाम गलियों की नालियां बड़े नालों से नीची हो गईं और जल निकासी प्रभावित हो गईं। गर्मी व सर्दियों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी नालियों के माध्यम से जैसे तैसे नाले में पहुंच जाता है पर बारिश के मौसम में उफान मारकर बहते नाले का पानी नालियों से वापस मुहल्लों की गलियों की गलियों में घुटनों तक भरने लगता है। मानसून की पहली व दूसरी बारिश के दौरान उक्त मुहल्लों में जलभराव हो गया, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ना लाजमी है। सरस्वती शिशु मंदिर के पास एक गली में रहने वाले पंडित राकेश मिश्र व सुनील कुमार इस समस्या से ग्रसित हैं। उनका मानना है कि जल निकासी का इंतजाम किया जाना बेहद आवश्यक है।
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नाले पर हो रहा निर्माण
ललितपुर। सरस्वती शिशु मंदिर के आसपास रहने वाले लोग इस बार जलभराव को लेकर और भी चिंतित हैं। इस स्कूल के पीछे से निकले नाले के पास कुछ लोग अवैध निर्माण करने में जुटे हुए हैं। मुहल्लेवासियों का कहना है कि नजूल की जमीन पर अवैध निर्माण से जल निकासी प्रभावित होगी, जिससे दर्जनों गलियों में पानी भरना तय है। शिकायत के बाद भी विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिसको लेकर मुहल्लेवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
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