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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

Mon, 20 Nov 2017 01:06 AM IST
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:06 AM IST
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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
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ललितपुर। भारत की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्मोत्सव सामाजिक संस्थानों, विभिन्न संगठनों व शैक्षिक संस्थानों में मनाया गया। इस दौरान रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और बलिदान को याद किया गया।
बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के तत्वाधान में महारानी लक्ष्मीबाई जयंती पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ मोर्चा के जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी व समस्त पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। जिलाध्यक्ष ने अपने संबोधन में रानी की वीर गाथाओं के बारे में बताया और उन्होंने अंग्रेजी के सामने घुटने नहीं टेकते हुए अपने बच्चे को कमर पर बांधकर युद्ध लड़ा इसके साथ ही अंत पर लड़ते हुए ही वीर गति को प्राप्त हुईं। इसके अलावा मोर्चा ने शहर में वीरांगना लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग उठाई है, ताकि शौर्य-साहस व पराक्रम को हमेशा याद रखा जा सके। इस दौरान मुख्य रूप से नवनीत किलेदार, दिनेश गोस्वामी, सरमन कौशिक, देशप्रेम शंकर गुप्ता, रघुवीर नगायच, केपी कंचन, मनोहर ताम्रकार, सुजीत, विशाल रजक आदि उपस्थित रहे।
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पतंजलि योग समिति, पतंजलि महिला योग समिति, भारत स्वाभिमान, युवा भारत, भारत किसान समिति ने सामूहिक रूप से कंपनी बाग में रानी लक्ष्मीबाई का जन्म दिवस मनाया। इस दौरान आयोजित गोष्ठी में जिला महिला संयोजक प्रीति जैन, पतंजलि स्वाभिमान जिला संयोजक अरविंद जैन, अनुराग चतुर्वेदी, बालकृष्ण नामदेव, प्रीति शुक्ला, मुकेश साहू ने रानी की जीवनी व वीर गाथाओं पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही रिचा पुरोहित ने तलवारबाजी का प्रदर्शन किया और महिलाओं को रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से प्रेरणा लेने की बात कही। कार्यक्रम में राखी रत्नाकर, चेतन गुप्ता, स्नेहा सोनी, कल्पना, किरण, अवधेश साहू, फूलचंद्र, अशोक, रमाकांत, बालकृष्ण, परशुराम साहू आदि उपस्थित रहे।
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वहीं बुंदेलखंड विकास सेना द्वारा आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ सेना प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इस दौरान उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से केवल बुंदेलखंड ही नहीं बल्मी देश की समस्त महिलाओं को सीख लेनी चाहिए और अपनी अंदर की रानी लक्ष्मीबाई को जगाना चाहिए। वहीं उन्होंने मांग की है कि इस दिन को शौर्य दिवस के रुप में मनाना जाना चाहिए। इस दौरान राजमल जैन वरया, अमर सिंह बुंदेला, पुष्पेंद्र सिंह, मनोज सैनी, अमित जैन, खुशाल वरार, मथुरा प्रसाद, सतनाम सिंह, मनोहर, मुकेश आदि उपस्थित रहे।
इस मौके पर राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ के तत्वाधान में संगोष्ठी आयोजित की गई, इसमें रानी के शौर्य, साहस, बलिदान को याद किया गया। वहीं वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखंड के लिए उनके बलिदान को सदैव याद किया जाएगा। इस मौके पर श्यामाकांत चौबे, जीएस तिवारी, देवी पराशर, नीरज मालवीय, विनोद मिश्रा, नीरज कौंते, सुशील मालवीय, आलोक, देवेंद्र पाठक, मुनीश आदि उपस्थित रहे।
वहीं श्रीदीपचंद्र महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थापक कमलेश चौधरी ने लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रानी लक्ष्मीबाई और जनपद का पुराना नाता है। जनपद के बानपुर नरेश मर्दन सिंह को लक्ष्मीबाई अपना भाई मानती थीं और मर्दन सिंह ने अंग्रेजों के साथ हुए युद्ध में भी सहयोग किया। इसी क्रम में प्रो.भगवत नारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के तत्वाधान में भी व्यापारियों ने भी रानी लक्ष्मीबाई की जयंती बनाई और गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में अजय जैन साइकिल ने वीरांगना के जीवन पर प्रकाश डाला। इसके अलावा 108 दीपक जलाकर उनको याद किया। इस दौरान मुख्य रूप से पीयूष सिंघई, संजीव, सक्षम अग्रवाल, वैभव जैन, राहुल मोदी, स्वपनिल जैन उपस्थित रहे।

वहीं स्थानीय रानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में भी वीरांगना लक्ष्मीबाई की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ प्रबंधक राजेश यादव ने किया। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि किस तरह महारानी ने 1857 के महासमर जब पूरे उत्तर भारत में बहादुरशाह, तात्या टोपे, में बुंदेली धरा का नेतृत्व किया और क्रूर ब्रिटिश आक्रांताओ के खिलाफ नेतृत्व एवं कठिन जीवन मरण के प्रश्नों के बावजूद अपनी मातृभूमि के लिए प्राणोत्सर्ग करके हमें आत्म गौरव और स्वतंत्रता का भाव दे गई। इस दौरान अवधेश रावत, प्रभारी प्राचार्य आशीष जाटवए, नरेंद्र रावत, सोना दीक्षित, भावना सेन, प्रियंका राजपूत, सीता शुक्ला, कपिल, विवेक एवं समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता सीमा राजपूत जी ने किया ।
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