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बाइपास हाइवे पर मंडरा रहा हाइटेंशन खतरा
Updated Thu, 28 Sep 2017 01:04 AM IST
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बाइपास हाइवे पर मंडरा रहा हाइटेंशन खतरा
ललितपुर। शहर के साथ ही बाईपास स्थित हाइवे पर भी हाइटेंशन लाइन से मौत का खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा गार्डिंग के बिना ही हाइटेंशन लाइन के तारों के नीचे से रोजाना हजारों जिंदगियां गुजर रहीं हैं। लेकिन, बिजली विभाग को इसकी कोई फिक्र ही नहीं है। हर बार सिर्फ स्टीमेट बनाकर बिजली विभाग पल्ला ही झाड़ लेता है।
शहर में मुख्य सड़कों व चौराहों के किनारे से निकली इस हाइटेंशन लाइन में नीचे सुरक्षा गार्डिंग नहीं लगी है, वहीं बाईपास स्थित राजकीय महाविद्यालय के पास हाइवे सड़क की क्रॉसिंग पर और गल्ला मंडी के पीछे हाइवे पर भी हाइटेंशन तारों के नीचे सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है, जबकि हजारों वाहन रोजाना इस हाइटेंशन लाइन के खतरे के नीचे से गुजरते हैं। यदि वाहन निकलने के दौरान यह हाइटेंशन तार फाल्ट या अन्य कारणों के चलते टूट कर गिर जाएं तो गंभीर घटना घटित हो सकती है। पूर्व में कई बार यहां हाइटेंशन तार टूटकर गिर चुके हैं, जिसमें कई लोग बाल-बाल बचे हैं, जबकि शहर में मुख्य सड़कों व गलियों में तो कई बार हाइटेंशन तार जमीन पर गिरने के कारण कई मौतें भी हो चुकी हैं। तीन वर्ष पूर्व मुहल्ला आजादपुरा निवासी एक युवक की मौत हाइटेंशन तार गिरने के कारण हो गई थी। वहीं, कैलगुवां तिराहे के पास तो एक दुकान पर हाइटेंशन तार टूटकर गिरने से टायर की दुकान में भी आग लग चुकी है। तीन वर्ष पूर्व बांसी के आगे नहर किनारे एक गांव के तीन किसानों की मौत भी हाइटेंशन तार गिरने के कारण हो चुकी है। करीब एक वर्ष पूर्व ग्राम पनारी में भी एक ट्रैक्टर में हाइटेंशन तार गिरने से आग लग गई थी। आए दिन इस तरह की घटनाओं में लगातार वृद्धि होती जा रही है, लेकिन बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब भी उसी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। कई अधिकारी तो बदले ही हैं, यहां तक कि विभाग का शहर में प्रमोशन करते हुए सर्किल कार्यालय भी खोल दिया गया है, लेकिन विद्युत प्रणाली में सुधार अब भी कोसों दूर है। हालांकि, विभाग के पास एक ही जवाब है कि स्टीमेट बनाकर भेज दिया है। इस संबंध में जब बाईपास बिजलीघर के अवर अभियंता राजकुमार से बात की तो उन्होंने भी पिछले कई अधिकारियों की भांति ही वही जवाब दिया कि स्टीमेट बनाकर भेज दिया है, स्टीमेट पास होने पर ही गार्डिंग लगाने का कार्य किया जाएगा, लेकिन वास्तव में बिजली विभाग को इसकी कोई फिक्र नहीं है। एक अधिकारी स्टीमेट बनाकर भेज देता है, लेकिन जब अगला अफसर आता है, तब वह भी उसी प्रक्रिया को मात्र फिर से शुरु कर देता है।
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ललितपुर। शहर के साथ ही बाईपास स्थित हाइवे पर भी हाइटेंशन लाइन से मौत का खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा गार्डिंग के बिना ही हाइटेंशन लाइन के तारों के नीचे से रोजाना हजारों जिंदगियां गुजर रहीं हैं। लेकिन, बिजली विभाग को इसकी कोई फिक्र ही नहीं है। हर बार सिर्फ स्टीमेट बनाकर बिजली विभाग पल्ला ही झाड़ लेता है।
शहर में मुख्य सड़कों व चौराहों के किनारे से निकली इस हाइटेंशन लाइन में नीचे सुरक्षा गार्डिंग नहीं लगी है, वहीं बाईपास स्थित राजकीय महाविद्यालय के पास हाइवे सड़क की क्रॉसिंग पर और गल्ला मंडी के पीछे हाइवे पर भी हाइटेंशन तारों के नीचे सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है, जबकि हजारों वाहन रोजाना इस हाइटेंशन लाइन के खतरे के नीचे से गुजरते हैं। यदि वाहन निकलने के दौरान यह हाइटेंशन तार फाल्ट या अन्य कारणों के चलते टूट कर गिर जाएं तो गंभीर घटना घटित हो सकती है। पूर्व में कई बार यहां हाइटेंशन तार टूटकर गिर चुके हैं, जिसमें कई लोग बाल-बाल बचे हैं, जबकि शहर में मुख्य सड़कों व गलियों में तो कई बार हाइटेंशन तार जमीन पर गिरने के कारण कई मौतें भी हो चुकी हैं। तीन वर्ष पूर्व मुहल्ला आजादपुरा निवासी एक युवक की मौत हाइटेंशन तार गिरने के कारण हो गई थी। वहीं, कैलगुवां तिराहे के पास तो एक दुकान पर हाइटेंशन तार टूटकर गिरने से टायर की दुकान में भी आग लग चुकी है। तीन वर्ष पूर्व बांसी के आगे नहर किनारे एक गांव के तीन किसानों की मौत भी हाइटेंशन तार गिरने के कारण हो चुकी है। करीब एक वर्ष पूर्व ग्राम पनारी में भी एक ट्रैक्टर में हाइटेंशन तार गिरने से आग लग गई थी। आए दिन इस तरह की घटनाओं में लगातार वृद्धि होती जा रही है, लेकिन बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब भी उसी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। कई अधिकारी तो बदले ही हैं, यहां तक कि विभाग का शहर में प्रमोशन करते हुए सर्किल कार्यालय भी खोल दिया गया है, लेकिन विद्युत प्रणाली में सुधार अब भी कोसों दूर है। हालांकि, विभाग के पास एक ही जवाब है कि स्टीमेट बनाकर भेज दिया है। इस संबंध में जब बाईपास बिजलीघर के अवर अभियंता राजकुमार से बात की तो उन्होंने भी पिछले कई अधिकारियों की भांति ही वही जवाब दिया कि स्टीमेट बनाकर भेज दिया है, स्टीमेट पास होने पर ही गार्डिंग लगाने का कार्य किया जाएगा, लेकिन वास्तव में बिजली विभाग को इसकी कोई फिक्र नहीं है। एक अधिकारी स्टीमेट बनाकर भेज देता है, लेकिन जब अगला अफसर आता है, तब वह भी उसी प्रक्रिया को मात्र फिर से शुरु कर देता है।
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