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आठ हजार के पार हुई अमझरा गोशाला में प्रवासी मजदूरों की संख्या

Tue, 19 May 2020 11:21 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 11:21 PM IST
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8 thousand workers gathered at amjhara border
अमझरा बॉर्डर पर पेड़ की छांव में बैठे मजदूर - फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द। जिले के अमझरा घाटी बार्डर पर प्रतिदिन प्रवासी मजदूरों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। मंगलवार को भी सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर पहुंचे और देखते ही देखते गोशाला भर गई। अमझरा गोशाला में आठ हजार से अधिक मजदूर हैं। इनके लिए 18 बसों का इंतजाम किया गया है, इनसे मजदूरों को उनके गांव भेजा जाएगा।
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गोशाला में जहां नजर दौड़ाओ उसी तरफ लोगों की भीड़ है, जिनको छाया मिल गई तो ठीक, अन्यथा सड़क के नीचे झाड़ियों में बैठ गए। अपने घर को लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने बताया कि रास्ते में पैदल आते समय कई जगह बारिश से भीगे तो कभी भूखे रहे तो कभी प्यास से व्याकुल रहे। आंधी और बादलों की तेज गर्जना का सामना भी करना पड़ा। ऐसा कभी सोचा भी नहीं था कि जिंदगी में ऐसी मुश्किलें आएंगी। जहां पर सालों से काम कर रहे थे, उन्हीं लोगों ने महामारी में बिल्कुल भी साथ नहीं दिया। ठेकेदारों ने आधा-अधूरा पैसा देकर भगा दिया। गांव पर मिट्टी डालकर भाजी-रोटी खाकर पेट भर लेंगे, लेकिन बाहर मजदूरी को नहीं जाएंगे। सड़क नापते-नापते चप्पलें घिस गईं हैं।
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गर्भवती को भी पैदल चलना पड़ा
ममता राजभर ने बताया कि मुंबई में पति के साथ रहती थी, लेकिन जब काम बंद हो गया तो घर जाने के लिए रास्ते में बस में बहुत भीड़ थी। एक सीट पर चार लोग बैठा दिए गए। छोटे से बच्चे को गोद में लिए थे। पेट में गर्भ है और नौंवा महीना चल रहा है। आराम की जरूरत थी, फिर भी पांच किलोमीटर बच्चे को गोद में लेकर पैदल चलना पड़ा। इन्हें सिद्धार्थनगर जाना है।
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गोशाला में मिल रहा हजारों मजदूरों को सहारा
अमझरा घाटी बार्डर पर बनी गोशाला में हजारों की संख्या में लोग विश्राम कर रहे हैं। गायों के बीच में बैठकर वह अपनी थकान मिटा रहे हैं। बार्डर पर और कोई जगह नहीं है, जहां धूप से बचा जा सके। ऐसे में गोशाला हजारों मजदूरों का सहारा बन रही है।
गोशाला में इतनी भीड़ थी कि जब लोगों को जगह नहीं मिली तो बसों के नीचे लेट गए। कुछ लोगों ने चादरों से छाया बनाई और उसी के नीचे बैठ गए। समय बिताना उनकी मजबूरी थी।
ट्रक वाले ने पैसा लेकर बाडर्र पर छोड़ा
चेन्नई से पचास लोग़ ट्रक किराए से लेकर गोरखपुर जा रहे थे। एक हजार रुपया प्रति सवारी तय होने के बाद ट्रक चला और मप्र बार्डर पर छोड़कर भाग गया। उसने पैसा भी नहीं लौटाए। अब इन लोगों को गोरखपुर जाना है। नागपुर से बीस लोग पैदल चलकर आ रहे हैं। इनके पास पैसे भी नहीं बचे। पैदल चलते- चलते लोगों की हालत खराब हो गई है।
चलो कुछ मस्ती हो जाए
पैदल चलकर आए गोरखपुर के एक परिवार का बच्चा पेड़ की छांव देखकर झूलने के लिए मां से जिद करने लगा तो उसके पिता ने उसके लिए झूला तैयार किया। झूले पर झूलने के बाद बच्चे को ऐसा लग रहा था मानो उसे अपना घर मिल गया हो। उसके चेहरे पर किसी तरह की थकान के भाव नहीं थे।
बिहार और झारखंड के एक हजार मजदूर
आठ प्रांतों से आ रहे हजारों मजदूरों में उत्तर प्रदेश के करीब 70 जिलों के निवासी हैं और लगभग सात हजार लोग होंगे। बिहार और झारखंड के लगभग एक हजार मजदूर हैं।
कठिनाई से भरा है सफर
अपने गांव से रोजी-रोटी के लिए शहरों में ढेर सारे अरमानों को लेकर पहुंचे मजदूरों के लिए अब अपने घर पहुंचना टेढ़ी खीर हो गया है। शहरों से गांव को वापस पैदल चलने वाले श्रमिकों के पैरों में छाले पड़ गए। भूखें, प्यासे बच्चों व महिलाओं के साथ पैदल चल रहे श्रमिकों के बदतर हालात हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश की सीमा पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पहुंच रहे मजदूरों के लिए अपने घर पहुंचना बेहद कठिनाइयों भरा है।
शासन के निर्देश पर मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास जारी हैं। 18 बसें बिहार और झारखंड के लोगों के लिए भेजी जा रहीं हैं।
- फूल सिंह, क्षेत्राधिकारी पाली
चेन्नई से 50 लोगों ने ट्रक में बैठकर एक हजार रुपया प्रति सवारी के हिसाब से झांसी तक का दिया था, लेकिन ट्रक ने मालथौन टोल प्लाजा पर छोड़ दिया और पैसा भी वापस नही लौटाए।
- अमित कुमार, गोरखपुर
नागपुर से पैदल चल रहे हैं, उन्नाव जाना है। आइसक्रीम का काम करते थे। चार साल से रह रहे हैं, लेकिन इस साल धंधा शुरू ही नहीं कर पाए थे। पैसा था नहीं तो चार लोग पैदल चलकर जा रहे हैं, रास्ते में जो कुछ मिला तो वही खाकर चलते जा रहे।

- रामदास, उन्नाव
महाराष्ट्र में एक ब्रेड के प्लांट में दस लोग काम करते थे। चार महीने पहले गए थे। ठेकेदार ने मजदूरी का आधा पैसा देकर भगा दिया। रास्ते में करीब तीस किलोमीटर पैदल चले, जो पैसा था, वह सब खर्च हो गया है। अब गांव में ही काम करेंगे बाहर कभी नहीं जाएंगे।
-अमरेश, सोनभद्र
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अमझरा गौशाला में लगी बाहर से मजदूरों की भीड़

अमझरा गौशाला में लगी बाहर से मजदूरों की भीड़- फोटो : LALITPUR

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