फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   ीसरे दिन भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, नलों से आ रहा मटमैला पानी

ीसरे दिन भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, नलों से आ रहा मटमैला पानी

Tue, 09 Oct 2018 01:57 AM IST
Updated Tue, 09 Oct 2018 01:57 AM IST
विज्ञापन
ीसरे दिन भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान, नलों से आ रहा मटमैला पानी
तीसरे दिन भी अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान
विज्ञापन

नलों से आ रहा मटमैला पानी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जल संस्थान द्वारा शहरवासियों को तीसरे दिन भी दूषित पानी पिलाया गया है। पाइप लाइनों से की जा रही आपूर्ति से नलों से पीला और मटमैला पानी निकल रहा है। वर्तमान में संक्रामक बीमारियों का दौर चल रहा है। लोगों का मानना है कि पाइप लाइनों के लीकेज होने से दूषित पानी आ रहा है। इसके बाद भी अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। इससे लोगों में रोष है।
जल संस्थान द्वारा शहर में जलापूर्ति की जा रही है। इसके लिए गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लिया जाता है। जिसे डोडाघाट के वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित किया जाता है। इसके बाद पानी की आपूर्ति टंकियों के माध्यम से शहर में की जाती है। लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट में पानी शोधित होने के बाद भी पीला मटमैला सप्लाई किया जा रहा है। लगातार तीन दिन से नलों में दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। जिस पर लोगों का मानना है कि शहर में तमाम स्थानों पर पाइप लाइन से पानी लीक रहा है। इससे पानी दूषित पानी आ रहा है। शहर के ललितेश्वरी देवी मंदिर व पटेल नगर में पाइप लाइन लीकेज हैं, जिससे पाइपों से आ रहा पानी गलियों व नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। इसके साथ ही पानी भी दूषित हो रहा है। वहीं, वॉटर फिल्टर ट्रीटमेंट प्लांट परिसर के आवासों के पाइप लाइन पानी लीकेज हो रहा है। वहीं, लोअर जोन में पेयजल की आपूर्ति के लिए बनी टंकी के पाइपों से भी पानी लीकेज हो रहा है। इन पाइपों से भी अधिक पानी बर्बाद हो रहा है। जिस ओर विभागीय अधिकारी नजरअंदाज किए हुए है। तीन दिन बीतने के बाद भी अधिकारी व कर्मचारियों ने सुध नही ली है। जिससे विभागीय कार्यों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन


बीते तीन दिन से लगातार नलों से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। जिसका उपयोग करने में संक्रामक बीमारियों के होने का भय सता रहा है। पानी को उबाल कर उपयोग में ला रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शोभित कुमार, नई बस्ती

नलों से मटमेला पानी आ रहा है। जिसे शुरुवात में पानी का उपयोग नहीं किया जा पार है। पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। तीन दिन बीतने के बाद भी पानी की सप्लाई में सुधार नहीं हो पाया है।
राजा उपाध्याय, चांदमारी

दिए गए ब्लीचिंग पाउडर कम कराने के निर्देश
संक्रामक बीमारियों के मद्देनजर जल शोधन में ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा बढ़ा दी गई थी। जिससे पीला पानी होने की संभावना थी। जिसको लेकर ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा कम कराने के निर्देश दिए गए है।

सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

यदि पानी में ब्लीचिंग की मात्रा पयाप्त है, तो ऐसी स्थिति में रंग से फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन पानी का रंग गंदा होने का कारण कम ब्लीचिंग डालना या बिल्कुल भी इस्तेमाल न करना हो सकता है। इस तरह के पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड और पीलिया की बीमारियां होने की संभावना होती है। साथ ही गंदे पानी से नहाने से चर्म रोग की भी समस्या हो सकती है।
डा. अमित चतुर्वेदी, फिजीशियन, जिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed