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सवा साल में मिले डायरिया के 27 हजार मरीज..
Updated Fri, 17 Aug 2018 04:56 AM IST
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सवा साल में मिले डायरिया के 27 हजार मरीज
ललितपुर। जनपद में जनवरी 2017 से मई 2018 तक सवा वर्ष में 27 हजार 326 लोग डायरिया से ग्रसित रहे हैं। बारिश के मौसम में इस बीमारी के बढ़ने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए साफ-सफाई के साथ रहने और खाने पीने की सलाह दी है। बारिश के मौसम में गर्मी और उमस की वजह से डायरिया और हैजा बीमारियां फैलने की ज्यादा संभावना रहती हैं, क्योंकि इस मौसम में मक्खियां, मच्छर और काकरोंचों की संख्या बढ़ जाती है, जो खाद्य पदार्थों और जल को दूषित कर देते हैं। यही खाद्य पदार्थ और जल शरीर के अंदर पहुँच कर डायरिया और हैजा के लक्षण पैदा कर देते है।
डायरिया एक ऐसी ही पेट की बीमारी है जो गर्मियों और बरसात मौसम में विकराल रूप ले लेती है, इस मौसम में तापमान के लगातार घटने बढ़ने की वजह से वायरल डायरिया बढ़ने की ज्यादा संभावना हो जाती हैं। इस मौसम में मक्खियां और मच्छर अधिकता में बढ़ जाते है, और इन्हीं से पैदा होने वाले बेक्ट्रेरिया मनुष्यों के शरीर में पहुंच कर उल्टी और दस्त जैसे बीमारियों को जन्म देते हैं। वहीं, जनपद में स्वास्थ्य केंद्रों में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार बारिश मौसम में दूषित खाना तथा दूषित पानी का इस्तेमाल करने से वायरल संक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे डायरिया होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में इस मौसम में डायरिया व हैजा से बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे साथ ही खाने-पीने वाली वस्तुओं को हमेशा ढक कर रखें। खाने-पीने की चीजों पर मक्खियां बैठ जाती हैं और हम लोग वही भोजन ग्रहण करते है जिससे डायरिया जैसी बीमारियां होने की प्रबल संभावना रहती है। जिला अस्पताल में इस मौसम में डायरिया के लगभग 3-4 मरीज रोज आ रहे हैं। हैजा रोग विब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु से फैलता हैं। यह जीवाणु संक्रमित व्यक्ति के मलमूत्र एवं (उल्टी) में विद्यमान रहता हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में जनवरी 2017 से मई 2018 तक कुल 27 हजार 326 लोग डायरिया की चपेट में रहे हैं।
यह हैं डायरिया के लक्षण
दिन भर में 4-5 बार पतले दस्त आना, दस्त के साथ खून आना, पेट मरोड़ना, उल्टी आना, बुखार होना, सिरदर्द , कमजोरी होना, बच्चों को दस्त होने पर वह दूध पीना बंद कर देते है, बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है और वह सुस्त हो जाते है।
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डायरिया व हैजा से बचाव
दूषित भोजन एवं दूषित पानी का सेवन करने से बचे, ओआरएस का इस्तेमाल करे , बासी चीजे , बाहर का खाना न खाये, घर की ही बना ताजा खाना खाए, खाने से पहले हाथों को साबुन से अवश्य साफ करें। खाने को घर पर भी ढककर रखें, क्योंकि मक्खियां मनुष्य के मल पर बैठ कर यह जीवाणु अपने साथ ले आती हैं और इन्हें खाने पर छोड़ देती है, जिससे हैजा के होने की संभावना अधिक हो जाती है।
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ललितपुर। जनपद में जनवरी 2017 से मई 2018 तक सवा वर्ष में 27 हजार 326 लोग डायरिया से ग्रसित रहे हैं। बारिश के मौसम में इस बीमारी के बढ़ने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए साफ-सफाई के साथ रहने और खाने पीने की सलाह दी है। बारिश के मौसम में गर्मी और उमस की वजह से डायरिया और हैजा बीमारियां फैलने की ज्यादा संभावना रहती हैं, क्योंकि इस मौसम में मक्खियां, मच्छर और काकरोंचों की संख्या बढ़ जाती है, जो खाद्य पदार्थों और जल को दूषित कर देते हैं। यही खाद्य पदार्थ और जल शरीर के अंदर पहुँच कर डायरिया और हैजा के लक्षण पैदा कर देते है।
डायरिया एक ऐसी ही पेट की बीमारी है जो गर्मियों और बरसात मौसम में विकराल रूप ले लेती है, इस मौसम में तापमान के लगातार घटने बढ़ने की वजह से वायरल डायरिया बढ़ने की ज्यादा संभावना हो जाती हैं। इस मौसम में मक्खियां और मच्छर अधिकता में बढ़ जाते है, और इन्हीं से पैदा होने वाले बेक्ट्रेरिया मनुष्यों के शरीर में पहुंच कर उल्टी और दस्त जैसे बीमारियों को जन्म देते हैं। वहीं, जनपद में स्वास्थ्य केंद्रों में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार बारिश मौसम में दूषित खाना तथा दूषित पानी का इस्तेमाल करने से वायरल संक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे डायरिया होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में इस मौसम में डायरिया व हैजा से बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे साथ ही खाने-पीने वाली वस्तुओं को हमेशा ढक कर रखें। खाने-पीने की चीजों पर मक्खियां बैठ जाती हैं और हम लोग वही भोजन ग्रहण करते है जिससे डायरिया जैसी बीमारियां होने की प्रबल संभावना रहती है। जिला अस्पताल में इस मौसम में डायरिया के लगभग 3-4 मरीज रोज आ रहे हैं। हैजा रोग विब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु से फैलता हैं। यह जीवाणु संक्रमित व्यक्ति के मलमूत्र एवं (उल्टी) में विद्यमान रहता हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में जनवरी 2017 से मई 2018 तक कुल 27 हजार 326 लोग डायरिया की चपेट में रहे हैं।
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यह हैं डायरिया के लक्षण
दिन भर में 4-5 बार पतले दस्त आना, दस्त के साथ खून आना, पेट मरोड़ना, उल्टी आना, बुखार होना, सिरदर्द , कमजोरी होना, बच्चों को दस्त होने पर वह दूध पीना बंद कर देते है, बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है और वह सुस्त हो जाते है।
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डायरिया व हैजा से बचाव
दूषित भोजन एवं दूषित पानी का सेवन करने से बचे, ओआरएस का इस्तेमाल करे , बासी चीजे , बाहर का खाना न खाये, घर की ही बना ताजा खाना खाए, खाने से पहले हाथों को साबुन से अवश्य साफ करें। खाने को घर पर भी ढककर रखें, क्योंकि मक्खियां मनुष्य के मल पर बैठ कर यह जीवाणु अपने साथ ले आती हैं और इन्हें खाने पर छोड़ देती है, जिससे हैजा के होने की संभावना अधिक हो जाती है।