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ॉलीथिन के तंबू में नेहरुनगर की पुलिस चौकी
Updated Tue, 18 Jul 2017 01:31 AM IST
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पुलिस के सिर पर छत नहीं, कौन सुने फरियाद
ललितपुर। नगर में स्थित पुलिस चौकियां या तो किराए के भवनों में चल रही हैं या फिर पालीथिन का तंबू तानकर चलाईं जा रही हैं। जनपद में करीब एक दर्जन भवन विहीन चौकियों में से पुलिस विभाग द्वारा मात्र चार चौकियों के स्थायी निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन बाकी चौकियां अपने पुराने हाल पर ही रहेंगी। चौकियों में पुलिस कर्मचारियों के ही बैठने को जगह उपलब्ध नहीं है तो आम लोगों की समस्याएं कई बार बाहर बैठकर सुनना पड़ती हैं। जब पुलिस के सिर छत नहीं है तो वे आम आदमी की फरियाद कैसे सुन पाएंगे।
जनपद में करीब एक दर्जन अस्थायी पुलिस चौकियां या तो किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं या फिर कहीं भी तंबू गाड़कर अस्थायी रुप से पुलिस चौकी चलाई जा रही हैं। इनमें नेहरुनगर, नईबस्ती, गल्ला मंडी, धौर्रा, दैलवारा, खितवांस, कुम्हैड़ी, पारौन, तालबेहट, तेरई फाटक शामिल हैं। इन अस्थायी पुलिस चौकियों में खुद पुलिस कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है। शहर में नेहरु नगर पुलिस चौकी का हाल सबसे खराब है, जहां पुलिस कर्मचारियों ने एक पॉलीथिन के तंबू को पुलिस चौकी बना लिया है। इसी तंबू में उस चौकी का पूरा पुलिस रिकॉर्ड रहता है। इस तंबू नुमा चौकी में मुश्किल से दो पुलिस कर्मचारी फाइवर की कुर्सियां डालकर बैठे रहते हैं। यदि इस दौरान कोई बड़ा अधिकारी भी निरीक्षण को आ जाए, तो उसे भी बैठने को जगह नहीं मिलेगी। कई बार तो इस पॉलीथिन की पुलिस चौकी में क्षेत्र के लोगों का कोई मामला पुलिस के पास पहुंच जाता है तो पुलिस कर्मचारियों द्वारा चौकी के बाहर सड़क पर ही निस्तारण करना होता है। बारिश और तेज हवा के दौरान यह पॉलीथिन की पुलिस चौकी ही अस्त-व्यस्त हो जाती है। इस पर पुलिस कर्मचारियों को ही काफी परेशानी होती है। ऐसा ही हाल अन्य पुलिस चौकियों का भी है। हालांकि, जनपद में बांसी, बिरधा, राजघाट में तो स्थायी भवनों में पुलिस चौकियां संचालित हो रही हैं, जबकि नेहरु नगर, नईबस्ती, धौर्रा और दैलवारा में चार पुलिस चौकियों के स्थायी निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। ऐसे में वर्तमान में एक दर्जन पुलिस चौकियां भगवान भरोसे ही संचालित हो रहीं हैं। असुविधाओं के अभाव में जब पुलिस तंत्र ही पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम लोगों की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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ललितपुर। नगर में स्थित पुलिस चौकियां या तो किराए के भवनों में चल रही हैं या फिर पालीथिन का तंबू तानकर चलाईं जा रही हैं। जनपद में करीब एक दर्जन भवन विहीन चौकियों में से पुलिस विभाग द्वारा मात्र चार चौकियों के स्थायी निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन बाकी चौकियां अपने पुराने हाल पर ही रहेंगी। चौकियों में पुलिस कर्मचारियों के ही बैठने को जगह उपलब्ध नहीं है तो आम लोगों की समस्याएं कई बार बाहर बैठकर सुनना पड़ती हैं। जब पुलिस के सिर छत नहीं है तो वे आम आदमी की फरियाद कैसे सुन पाएंगे।
जनपद में करीब एक दर्जन अस्थायी पुलिस चौकियां या तो किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं या फिर कहीं भी तंबू गाड़कर अस्थायी रुप से पुलिस चौकी चलाई जा रही हैं। इनमें नेहरुनगर, नईबस्ती, गल्ला मंडी, धौर्रा, दैलवारा, खितवांस, कुम्हैड़ी, पारौन, तालबेहट, तेरई फाटक शामिल हैं। इन अस्थायी पुलिस चौकियों में खुद पुलिस कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं है। शहर में नेहरु नगर पुलिस चौकी का हाल सबसे खराब है, जहां पुलिस कर्मचारियों ने एक पॉलीथिन के तंबू को पुलिस चौकी बना लिया है। इसी तंबू में उस चौकी का पूरा पुलिस रिकॉर्ड रहता है। इस तंबू नुमा चौकी में मुश्किल से दो पुलिस कर्मचारी फाइवर की कुर्सियां डालकर बैठे रहते हैं। यदि इस दौरान कोई बड़ा अधिकारी भी निरीक्षण को आ जाए, तो उसे भी बैठने को जगह नहीं मिलेगी। कई बार तो इस पॉलीथिन की पुलिस चौकी में क्षेत्र के लोगों का कोई मामला पुलिस के पास पहुंच जाता है तो पुलिस कर्मचारियों द्वारा चौकी के बाहर सड़क पर ही निस्तारण करना होता है। बारिश और तेज हवा के दौरान यह पॉलीथिन की पुलिस चौकी ही अस्त-व्यस्त हो जाती है। इस पर पुलिस कर्मचारियों को ही काफी परेशानी होती है। ऐसा ही हाल अन्य पुलिस चौकियों का भी है। हालांकि, जनपद में बांसी, बिरधा, राजघाट में तो स्थायी भवनों में पुलिस चौकियां संचालित हो रही हैं, जबकि नेहरु नगर, नईबस्ती, धौर्रा और दैलवारा में चार पुलिस चौकियों के स्थायी निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। ऐसे में वर्तमान में एक दर्जन पुलिस चौकियां भगवान भरोसे ही संचालित हो रहीं हैं। असुविधाओं के अभाव में जब पुलिस तंत्र ही पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम लोगों की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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