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मड़ावरा
Updated Sat, 17 Jun 2017 06:55 PM IST
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जीवनदायी रहे कुओं के बहुरेंगे दिन
अमर उजाला ब्यूरा
मड़ावरा (ललितपुर)। कस्बावासियों के लिए कभी जीवनदायी रहे कुएं और बावड़ियां आज अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। लोगों के कब्जा कर लेने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, पेयजल आपूर्ति के लिए जल संस्थान की पाइप लाइन के कारण इनमें लोग कचरा डाल रहे हैं। कस्बावासियों ने ब्लॉक प्रशासन से इन कुओं और बावड़ियों को दुरुस्त कराने की मांग की है।
एक जमाने में लोगों के लिए पेयजलापूर्ति का साधन सिर्फ कुएं, बावड़ी, पोखर और नदियां ही होते थे। लोग प्राकृतिक जलस्रोतों से ही खुद पानी पीते थे और जानवरों को भी पिलाते थे। ग्राम पंचायत साढ़ूमल में सौ से अधिक कुएं लोगों को पेयजलापूर्ति का प्रमुख साधन रहे। लेकिन भूगर्भ जलस्तर गिरने से यह लगातार सूखते गए। फलस्वरूप लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। कुछ में तो कचरा फेंका जा रहा है। वहीं, जिनमें पानी आ रहा है तो उनकी मरम्मत नहीं की गई है, इससे इनका पानी पीने योग्य नहीं है।
वहीं, कस्बा मड़ावरा में भी कुएं और हैंडपंप से जलापूर्ति होती है। यहां जलसंस्थान की पाइपलाइन से जलापूर्ति की जाती है।, लेकिन ऊंचा-नीचा क्षेत्र होने के कारण यह हर जगह सफल नहीं है। नतीजतन बड़ी आबादी को हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं, जलस्तर नीचे होने के कारण हैंडपंपों से पानी नहीं आता है। यहां कुएं भी सूखे हैं, ज्यादातर में कचरा फेंका जा रहा है। जैन धर्मबलंबियों के अनुसार जैन धर्म के मंदिरों में तीर्थंकर भगवान के अभिषेक के लिए प्रतिदिन कुएं का जल ही प्रयोग में लाया जाता है। ऐसे में लोगों ने इन कुओं को दुरुस्त करवाने की मांग उठाई है। कस्बे के विनोद कुमार, अरविंद कुमार, जगदीश सिंह, जाहर सिंह, लखन लाल ने खंड विकास अधिकारी कस्बे के कुओं की सफाई एवं जीर्णोद्धार की मांग उठाई है।
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मनरेगा से कुओं को गहरा किया जाएगा
मनरेगा के तहत कुओं को गहरा करने की योजना है, जो भी लाभार्थी इनको गहरा चाहते हैं, वह ग्राम प्रधान एवं पचायत सचिव के माध्यम से प्रस्ताव पास कराकर भेजे। कुआं को गहरा करने और मरम्मत करने के लिए आवश्यकता अनुसार धनराशी स्वीकृत की जाती है।
- आरके त्रिपाठी, खण्ड विकास अधिकारी
- बेहतर पेयजल आपूर्ति के लिए ब्लॉक प्रशासन प्रमुख कुओं को गहरा कराएगा
- ऐसा होने से दूर हो जाएगी ग्रामीण इलाकों की समस्या, प्रशासन ने तैयारियों कीं
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अमर उजाला ब्यूरा
मड़ावरा (ललितपुर)। कस्बावासियों के लिए कभी जीवनदायी रहे कुएं और बावड़ियां आज अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। लोगों के कब्जा कर लेने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, पेयजल आपूर्ति के लिए जल संस्थान की पाइप लाइन के कारण इनमें लोग कचरा डाल रहे हैं। कस्बावासियों ने ब्लॉक प्रशासन से इन कुओं और बावड़ियों को दुरुस्त कराने की मांग की है।
एक जमाने में लोगों के लिए पेयजलापूर्ति का साधन सिर्फ कुएं, बावड़ी, पोखर और नदियां ही होते थे। लोग प्राकृतिक जलस्रोतों से ही खुद पानी पीते थे और जानवरों को भी पिलाते थे। ग्राम पंचायत साढ़ूमल में सौ से अधिक कुएं लोगों को पेयजलापूर्ति का प्रमुख साधन रहे। लेकिन भूगर्भ जलस्तर गिरने से यह लगातार सूखते गए। फलस्वरूप लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। कुछ में तो कचरा फेंका जा रहा है। वहीं, जिनमें पानी आ रहा है तो उनकी मरम्मत नहीं की गई है, इससे इनका पानी पीने योग्य नहीं है।
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वहीं, कस्बा मड़ावरा में भी कुएं और हैंडपंप से जलापूर्ति होती है। यहां जलसंस्थान की पाइपलाइन से जलापूर्ति की जाती है।, लेकिन ऊंचा-नीचा क्षेत्र होने के कारण यह हर जगह सफल नहीं है। नतीजतन बड़ी आबादी को हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं, जलस्तर नीचे होने के कारण हैंडपंपों से पानी नहीं आता है। यहां कुएं भी सूखे हैं, ज्यादातर में कचरा फेंका जा रहा है। जैन धर्मबलंबियों के अनुसार जैन धर्म के मंदिरों में तीर्थंकर भगवान के अभिषेक के लिए प्रतिदिन कुएं का जल ही प्रयोग में लाया जाता है। ऐसे में लोगों ने इन कुओं को दुरुस्त करवाने की मांग उठाई है। कस्बे के विनोद कुमार, अरविंद कुमार, जगदीश सिंह, जाहर सिंह, लखन लाल ने खंड विकास अधिकारी कस्बे के कुओं की सफाई एवं जीर्णोद्धार की मांग उठाई है।
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मनरेगा से कुओं को गहरा किया जाएगा
मनरेगा के तहत कुओं को गहरा करने की योजना है, जो भी लाभार्थी इनको गहरा चाहते हैं, वह ग्राम प्रधान एवं पचायत सचिव के माध्यम से प्रस्ताव पास कराकर भेजे। कुआं को गहरा करने और मरम्मत करने के लिए आवश्यकता अनुसार धनराशी स्वीकृत की जाती है।
- आरके त्रिपाठी, खण्ड विकास अधिकारी
- बेहतर पेयजल आपूर्ति के लिए ब्लॉक प्रशासन प्रमुख कुओं को गहरा कराएगा
- ऐसा होने से दूर हो जाएगी ग्रामीण इलाकों की समस्या, प्रशासन ने तैयारियों कीं