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आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए सार्थक साबित होगीएक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:27 AM IST
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नए सत्र में शुरू हो सकती एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना
आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए सार्थक साबित होगी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नवीन सत्र से राज्य सरकार एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना की शुरुआत कर सकती है। यदि ऐसा होता है आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाकर छह से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने में सार्थक साबित होगी।
दो अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों का नवीन शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है और इसके साथ ही आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने के लिए स्कूल चलो अभियान की भी शुरुआत होगी। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना की शुरुआत की जा रही है। इस संबंध में स्थानीय जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. जेपी राजपूत ने बताया कि इस योजना को गत वर्ष लखनऊ के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान में लागू किया था, इसका नतीजा यह हुआ था कि गत वर्ष 2,262 आउट ऑफ स्कूल बच्चों को प्रवेश दिलाए गए थे, जो विगत वर्षों से काफी ज्यादा था। इस योजना के अच्छे नतीजे आने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने इसे प्रदेश भर के सभी डायटों और निजी डीएलएड कॉलेजों से प्रशिक्षण लेने वाले प्रत्येक प्रशिक्षुओं को हर साल एक-एक आउट ऑफ स्कूल बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाने की बात कही है। वहीं, उन्होंने बताया कि अभी इस संबंध में कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रदेश मुख्यालय पर चल रही चर्चाओं व बेसिक शिक्षामंत्री की घोषणा से ऐसा लग रहा है कि स्कूल चलों अभियान के साथ इस नवीन सत्र से इस योजना को लागू किया जा सकता है।
मिलेगी मदद
यदि इस एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना को लागू किया जाता है तो इससे शासन की मंशा के अनुरूप छह से 14 वर्ष की आयु तक के सभी आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने में काफी सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही प्रशिक्षुओं को अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों व ग्रामीण इलाकों का माहौल देखने का मौका भी मिलेगा, जो शिक्षक बनने पर उसके काम आएगा।
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- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए सार्थक साबित होगी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नवीन सत्र से राज्य सरकार एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना की शुरुआत कर सकती है। यदि ऐसा होता है आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाकर छह से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने में सार्थक साबित होगी।
दो अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों का नवीन शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है और इसके साथ ही आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने के लिए स्कूल चलो अभियान की भी शुरुआत होगी। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना की शुरुआत की जा रही है। इस संबंध में स्थानीय जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. जेपी राजपूत ने बताया कि इस योजना को गत वर्ष लखनऊ के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान में लागू किया था, इसका नतीजा यह हुआ था कि गत वर्ष 2,262 आउट ऑफ स्कूल बच्चों को प्रवेश दिलाए गए थे, जो विगत वर्षों से काफी ज्यादा था। इस योजना के अच्छे नतीजे आने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने इसे प्रदेश भर के सभी डायटों और निजी डीएलएड कॉलेजों से प्रशिक्षण लेने वाले प्रत्येक प्रशिक्षुओं को हर साल एक-एक आउट ऑफ स्कूल बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाने की बात कही है। वहीं, उन्होंने बताया कि अभी इस संबंध में कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रदेश मुख्यालय पर चल रही चर्चाओं व बेसिक शिक्षामंत्री की घोषणा से ऐसा लग रहा है कि स्कूल चलों अभियान के साथ इस नवीन सत्र से इस योजना को लागू किया जा सकता है।
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मिलेगी मदद
यदि इस एक प्रशिक्षु एक प्रवेश योजना को लागू किया जाता है तो इससे शासन की मंशा के अनुरूप छह से 14 वर्ष की आयु तक के सभी आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मूलधारा से जोड़ने में काफी सहयोग मिलेगा। इसके साथ ही प्रशिक्षुओं को अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों व ग्रामीण इलाकों का माहौल देखने का मौका भी मिलेगा, जो शिक्षक बनने पर उसके काम आएगा।
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- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।