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ऋण मोचन योजना में लाभान्वित होंगे छह हजार कृषक
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:00 AM IST
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पहले चरण में होगा छह हजार किसानों का कर्ज माफ
ललितपुर। फसल ऋण मोचन योजना में जिले के कृषकों की संख्या 91 हजार 904 है। बैंक खातों में आधार कार्ड लिंक होने के साथ ही जिनके भू-अभिलेख पूरी तरह से दुरुस्त पाए गए हैं, ऐसे छह हजार किसानों को प्रथम चरण में इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। बारह अगस्त को इसकी वास्तविक तस्वीर साफ हो जाएगी। अन्य कृषकों को भू-अभिलेख एवं आधार कार्डों के सत्यापन के उपरांत लाभ दिया जाएगा।
योगी सरकार ने चुनावी वायदा पूरा करने के लिए फसल ऋण मोचन योजना चला रखी है। इसमें लघु, सीमांत कृषकों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ किया जाना है। इस योजना के दायरे में जिले के 91 हजार 904 कृषक आ रहे हैं। बैंकों द्वारा यह डाटा उपलब्ध कराया गया है। इससे पहले 90 हजार 80 कृषकों का डाटा निकलकर आया था। अब जिला प्रशासन ने 91 हजार 904 कृषकों के डाटा पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। इन कृषकों के आधार कार्ड फीड नहीं हैं, उनके आधार लिंक किए जा रहे हैं। वहीं, बैंक अपने स्तर से कृषकों के ऋण डाटा का सत्यापन कर रही है तो राजस्व कर्मियों को भूलेख सत्यापन की जिम्मेदारी मिली हुई है। इसके लिए राजस्व कर्मियों को चेक लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। लेकिन, इसमें कुछ राजस्व कर्मियों की लापरवाही उजागर हो रही है। कई राजस्व कर्मचारी अपनी पड़ताल का दायरा भू-अभिलेख तक सीमित रखे हुए हैं। आधार कार्ड सही है या नहीं, कृषक की मौत तो नहीं हो गई इस तरह के बिंदुओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। वर्तमान में छह हजार तीन सौ तेरह कृषकों का ब्योरा फीड कर लिया गया है। इसमें मृतक एवं अपात्रों की खोजबीन की जा रही है। शासन से बारह अगस्त तक फाइनल सूची तैयार करने के निर्देश हैं। लेकिन, अभी तक प्रथम चरण के लिए अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई है। हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए जिलाधिकारी मानवेंद्र, सीडीओ प्रवीण कुमार लक्षकार आगे आए हैं। उन्होंने फिल्टर के कार्य को अपनी निगरानी में कराना शुरू कर दिया है। इससे समय से काम पूरा होने की उम्मीद बंध गई है।
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ऐसे लगाया जा रहा फिल्टर
कोई लाभ नहीं मिलेगा यदि राजस्व विभाग एवं ब्रांच इन रिकार्डो को सत्यापित करती है, इसमें किसान लघु एवं सीमांत नहीं है या कृषि ऋण नहीं दिया गया है या खतौनी या पट्टे के आधार पर नहीं है। यदि किसी बैंक द्वारा संयुक्त खातों को तोड़कर अलग-अलग खाते बनाकर दिए तो केवल एक को ही लाभ मिलेगा, साथ ही पालिसी की अन्य शर्तें भी पूरी होती हों। राजस्व विभाग के सत्यापन के पश्चात डीएलसी द्वारा तय किया जाएगा। अगले चरण में भूलेख मेपिंग करानी होगी। ब्रांच द्वारा नाम फीड करने की अनुमति डीएलसी से लेनी होगी। सभी फिल्टरों के पश्चात सही आधार नंबर फीड होने का वेरीफिकेशन किया जाएगा। इसके उपरांत डीएलसी द्वारा पोर्टल पर सूची से किसानों की मार्किंग की जाएगी।
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ये हैं चेक बिंदु
गाटा नंबर, गांव का नाम, कृषक का नाम, बैंक का नाम, आधार नंबर, आउटस्टेंडिंग लोन, डुप्लीकेट आधार कार्ड नंबर, बैंक का डुप्लीकेट रिकार्ड, एनपीए, केसीसी नंबर, कृषक का नाम व भूलेख डाटा, कृषक की जमीन का जनपद, चकबंदी भूमि, नोन भूलेख मेप्ड रिकार्ड, खतौनी व पट्टा पर लोन लिया या नहीं।
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छह हजार कृषकों का डाटा फीड
छह हजार कृषकों का डाटा फीड कराया जा चुका है। इसमें भी मृतक एवं अपात्र कृषकों का चिह्नींकरण किया जा रहा है। यदि मृतक व अपात्र कृषक निकलकर आते हैं तो उन्हें सूची से पृथक कर दिया जाएगा। ऐसे में बारह अगस्त को ही अंतिम सूची फाइनल होने की संभावना है।
बृजेश कुमार
जिला कृषि अधिकारी ललितपुर।
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ललितपुर। फसल ऋण मोचन योजना में जिले के कृषकों की संख्या 91 हजार 904 है। बैंक खातों में आधार कार्ड लिंक होने के साथ ही जिनके भू-अभिलेख पूरी तरह से दुरुस्त पाए गए हैं, ऐसे छह हजार किसानों को प्रथम चरण में इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। बारह अगस्त को इसकी वास्तविक तस्वीर साफ हो जाएगी। अन्य कृषकों को भू-अभिलेख एवं आधार कार्डों के सत्यापन के उपरांत लाभ दिया जाएगा।
योगी सरकार ने चुनावी वायदा पूरा करने के लिए फसल ऋण मोचन योजना चला रखी है। इसमें लघु, सीमांत कृषकों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ किया जाना है। इस योजना के दायरे में जिले के 91 हजार 904 कृषक आ रहे हैं। बैंकों द्वारा यह डाटा उपलब्ध कराया गया है। इससे पहले 90 हजार 80 कृषकों का डाटा निकलकर आया था। अब जिला प्रशासन ने 91 हजार 904 कृषकों के डाटा पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। इन कृषकों के आधार कार्ड फीड नहीं हैं, उनके आधार लिंक किए जा रहे हैं। वहीं, बैंक अपने स्तर से कृषकों के ऋण डाटा का सत्यापन कर रही है तो राजस्व कर्मियों को भूलेख सत्यापन की जिम्मेदारी मिली हुई है। इसके लिए राजस्व कर्मियों को चेक लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। लेकिन, इसमें कुछ राजस्व कर्मियों की लापरवाही उजागर हो रही है। कई राजस्व कर्मचारी अपनी पड़ताल का दायरा भू-अभिलेख तक सीमित रखे हुए हैं। आधार कार्ड सही है या नहीं, कृषक की मौत तो नहीं हो गई इस तरह के बिंदुओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है। वर्तमान में छह हजार तीन सौ तेरह कृषकों का ब्योरा फीड कर लिया गया है। इसमें मृतक एवं अपात्रों की खोजबीन की जा रही है। शासन से बारह अगस्त तक फाइनल सूची तैयार करने के निर्देश हैं। लेकिन, अभी तक प्रथम चरण के लिए अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई है। हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए जिलाधिकारी मानवेंद्र, सीडीओ प्रवीण कुमार लक्षकार आगे आए हैं। उन्होंने फिल्टर के कार्य को अपनी निगरानी में कराना शुरू कर दिया है। इससे समय से काम पूरा होने की उम्मीद बंध गई है।
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ऐसे लगाया जा रहा फिल्टर
कोई लाभ नहीं मिलेगा यदि राजस्व विभाग एवं ब्रांच इन रिकार्डो को सत्यापित करती है, इसमें किसान लघु एवं सीमांत नहीं है या कृषि ऋण नहीं दिया गया है या खतौनी या पट्टे के आधार पर नहीं है। यदि किसी बैंक द्वारा संयुक्त खातों को तोड़कर अलग-अलग खाते बनाकर दिए तो केवल एक को ही लाभ मिलेगा, साथ ही पालिसी की अन्य शर्तें भी पूरी होती हों। राजस्व विभाग के सत्यापन के पश्चात डीएलसी द्वारा तय किया जाएगा। अगले चरण में भूलेख मेपिंग करानी होगी। ब्रांच द्वारा नाम फीड करने की अनुमति डीएलसी से लेनी होगी। सभी फिल्टरों के पश्चात सही आधार नंबर फीड होने का वेरीफिकेशन किया जाएगा। इसके उपरांत डीएलसी द्वारा पोर्टल पर सूची से किसानों की मार्किंग की जाएगी।
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ये हैं चेक बिंदु
गाटा नंबर, गांव का नाम, कृषक का नाम, बैंक का नाम, आधार नंबर, आउटस्टेंडिंग लोन, डुप्लीकेट आधार कार्ड नंबर, बैंक का डुप्लीकेट रिकार्ड, एनपीए, केसीसी नंबर, कृषक का नाम व भूलेख डाटा, कृषक की जमीन का जनपद, चकबंदी भूमि, नोन भूलेख मेप्ड रिकार्ड, खतौनी व पट्टा पर लोन लिया या नहीं।
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छह हजार कृषकों का डाटा फीड
छह हजार कृषकों का डाटा फीड कराया जा चुका है। इसमें भी मृतक एवं अपात्र कृषकों का चिह्नींकरण किया जा रहा है। यदि मृतक व अपात्र कृषक निकलकर आते हैं तो उन्हें सूची से पृथक कर दिया जाएगा। ऐसे में बारह अगस्त को ही अंतिम सूची फाइनल होने की संभावना है।
बृजेश कुमार
जिला कृषि अधिकारी ललितपुर।