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पथरीली राहों से 50 हजार सैलानी कनकद्दर का जलप्रपात को देखने पहुंचे
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कनकद्दर का जलप्रपात का सुंदर नजारा
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर/ डोंगराखुर्द। सरकार पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने की बात कर रही है लेकिन इन स्थलों तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से लोगों को पहुंचने में काफी दिक्कतें होती हैं। जनपद और मध्यप्रदेश सीमा पर गौना वन क्षेत्र में विंध्याचल पर्वत की श्रृंखलाओं के मध्य स्थित कनक़द्दर के जलप्रपात लोगों को लुभा रहे हैं। इसकी झलक पाने के लिए जुलाई से लेकर सितंबर तक तीन माह में ललितपुर, टीकमगढ़, सागर, बीना, भोपाल, शहरों से पचास हजार सैलानी आए हैं। इन सैलानियों को झरने ने काफी लुभाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां तक आने के लिए करीब पांच किलोमीटर सड़क बन जाए और संसाधन मुहैया कराए जाएं तो सैलानियों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है।
जनपद के डोंगराखुर्द गांव से कनकद्दर जलप्रपात तक करीब पांच किमी का रास्ता कच्चा और ऊबड़-खाबड़ है। इसका दूसरा रास्ता मध्यप्रदेश के मालथौन से होकर आठ किलोमीटर अमारी गांव से जाता है। कनकद्दर के जलप्रपात तक पहुंचने के लिए दोनों ही रास्ते बरसात में बड़े ही दुर्गम हैं। प्रशासन इन रास्तों को बनवा दे तो लोगों को झरने तक पहुंचने में आसानी होगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक कनकद्दर अब शानदार पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। कनकद्दर जलप्रपात करीब 90 फुट चौड़ा और 70 फुट ऊंचा हैं। वहां से नीचे पानी गिरता है। इसे देखने के लिए सैलानी जंगल से होकर पैदल गुजरते हैं। पत्थरों की चट्टानों के ऊबड़खाबड़ रास्ते के कारण थकान महसूस होती है लेकिन यहां का हरा भरा जंगल प्राकृतिक सौंदर्य मनोहारी विंध्याचल पर्वतों के मनोहारी सुंदर नजारा लोगों की थकान को मिटाकर यहां के नजारों का लुत्फ उठाने की स्फूर्ति भर देता है।
पर्यटकों के ठहरने की नहीं है व्यवस्था
दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के यहां ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शाम ढलते ही पर्यटक उसी दिन लौट जाते हैं। हालांकि स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानें सजा रखी हैं जिनसे वह खाद्य सामग्री, बीड़ी, गुटखा, कोल्ड ड्रिंक आदि सामान खरीदते हैं। इससे इन लोगों को तीन माह का रोजगार मिल जाता है। यदि यहां संसाधनों की व्यवस्था हो जाए तो पर्यटक यहां रात में रुककर जलप्रपात का भरपूर आनंद ले सकते हैं।
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ङोगरा खुर्द के जंगल में स्थित इस पर्यटन स्थल पर प्राकृतिक नजारा देखने कई जिलों के पर्यटक आते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में उन्हें शाम को ही वापस लौटना पड़ता है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। राजाबाबू
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यह झरना प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य एवं मनमोहक दृश्य है जिस कारण पर्यटकों के लिए पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। यहां का नजारा देखने के लिए उतर प्रदेश मध्य प्रदेश के सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। रिंकू बिदुआ
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दोनों ही रास्ते दुर्गम हैं। कष्ट उठाने के बाद भी प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ़ उठाने के लिए इन तीन महीनों में करीब 50 हजार पर्यटक यहां आ चुके हैं। यदि सड़क व रुकने की व्यवस्था हो तो सैलानी और बढ़ेंगे। मनोज दुबे
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फुहार से शरीर को ठंडक मिलती है। रास्ते की पूरी थकान दूर हो जाती है। वहां से जाने का मन नहीं करता है। प्रशासन को रास्ता बनवाना चाहिए जिससे पर्यटकों आवागमन में सुविधा मिले। बाबूलाल कुशवाहा
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जनपद के डोंगराखुर्द गांव से कनकद्दर जलप्रपात तक करीब पांच किमी का रास्ता कच्चा और ऊबड़-खाबड़ है। इसका दूसरा रास्ता मध्यप्रदेश के मालथौन से होकर आठ किलोमीटर अमारी गांव से जाता है। कनकद्दर के जलप्रपात तक पहुंचने के लिए दोनों ही रास्ते बरसात में बड़े ही दुर्गम हैं। प्रशासन इन रास्तों को बनवा दे तो लोगों को झरने तक पहुंचने में आसानी होगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक कनकद्दर अब शानदार पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। कनकद्दर जलप्रपात करीब 90 फुट चौड़ा और 70 फुट ऊंचा हैं। वहां से नीचे पानी गिरता है। इसे देखने के लिए सैलानी जंगल से होकर पैदल गुजरते हैं। पत्थरों की चट्टानों के ऊबड़खाबड़ रास्ते के कारण थकान महसूस होती है लेकिन यहां का हरा भरा जंगल प्राकृतिक सौंदर्य मनोहारी विंध्याचल पर्वतों के मनोहारी सुंदर नजारा लोगों की थकान को मिटाकर यहां के नजारों का लुत्फ उठाने की स्फूर्ति भर देता है।
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पर्यटकों के ठहरने की नहीं है व्यवस्था
दूरदराज से आने वाले पर्यटकों के यहां ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शाम ढलते ही पर्यटक उसी दिन लौट जाते हैं। हालांकि स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानें सजा रखी हैं जिनसे वह खाद्य सामग्री, बीड़ी, गुटखा, कोल्ड ड्रिंक आदि सामान खरीदते हैं। इससे इन लोगों को तीन माह का रोजगार मिल जाता है। यदि यहां संसाधनों की व्यवस्था हो जाए तो पर्यटक यहां रात में रुककर जलप्रपात का भरपूर आनंद ले सकते हैं।
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ङोगरा खुर्द के जंगल में स्थित इस पर्यटन स्थल पर प्राकृतिक नजारा देखने कई जिलों के पर्यटक आते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में उन्हें शाम को ही वापस लौटना पड़ता है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। राजाबाबू
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यह झरना प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य एवं मनमोहक दृश्य है जिस कारण पर्यटकों के लिए पिकनिक स्पॉट बनता जा रहा है। यहां का नजारा देखने के लिए उतर प्रदेश मध्य प्रदेश के सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। रिंकू बिदुआ
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दोनों ही रास्ते दुर्गम हैं। कष्ट उठाने के बाद भी प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ़ उठाने के लिए इन तीन महीनों में करीब 50 हजार पर्यटक यहां आ चुके हैं। यदि सड़क व रुकने की व्यवस्था हो तो सैलानी और बढ़ेंगे। मनोज दुबे
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फुहार से शरीर को ठंडक मिलती है। रास्ते की पूरी थकान दूर हो जाती है। वहां से जाने का मन नहीं करता है। प्रशासन को रास्ता बनवाना चाहिए जिससे पर्यटकों आवागमन में सुविधा मिले। बाबूलाल कुशवाहा

कनकद्दर का जलप्रपात जाने वाला रास्ता- फोटो : LALITPUR

बरसात में डोंगरा खुर्द मार्ग से कनकद्दर का जलप्रपात देखने के लिए इस तरह गुजरना पड़ा- फोटो फाइल- फोटो : LALITPUR