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400 में से 42 व्यापारियों ने ही कराया पंजीयन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2016 12:37 AM IST
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- फोटो : demo
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ललितपुर। प्रदेश की बड़ी मंडियों में शुमार जनपद की गल्ला मंडी के व्यापारियों को ई-ऑक्शन प्रणाली नहीं भा रही है। मंडी के 400 के सापेक्ष अब तक मात्र 42 व्यापारियों ने ही ई-ऑक्शन के लिए पंजीयन कराया है। इस दौरान कुल तीन हजार क्विंटल ही गेहूं खरीद हो सकी है। जबकि, सितंबर माह में जनपद समेत प्रदेश की छह मंडियों को ई-ऑक्शन से जोड़कर पूर्ण रूप से ऑन लाइन खरीद करने की योजना है।
शासन ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के तहत पूरे देश की 21 मंडियों को ई-ऑक्शन प्रणाली से जोड़कर ऑन लाइन खरीद करने की योजना तैयार की है। इस योजना में जनपद समेत प्रदेश की छह मंडियों को शामिल किया गया है। प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की सभी छह मंडियों ललितपुर, मथुरा, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच और शाहजहांपुर में 14 अप्रैल 2016 को ई-ऑक्शन प्रणाली का शुभारंभ ट्रायल के तौर पर ़किया था। जनपद की नवीन गल्ला मंडी में करीब 400 व्यापारी गल्ला का व्यापार करते हैं।
ई-ऑक्शन प्रणाली के तहत व्यापारियों और किसानों का पंजीयन होना आवश्यक है, लेकिन 14 अप्रैल से अब तक गल्ला मंडी में व्यापार करने वाले 400 के सापेक्ष मात्र 42 व्यापारियों ने ही ई-ऑक्शन प्रणाली के लिए पंजीयन कराया है। वहीं, कुल 144 किसानों का ही पंजीकरण कराया जा सका है, जबकि ई-ऑक्शन से जुड़ने के बाद किसान गल्ला मंडी में पहुंचकर देश की किसी भी मंडी में जिंस के भाव की जानकारी कर सकता है। ई-ऑक्शन से जुड़ी मंडियों में अधिकतम भाव पर जिंस की बिक्री भी कर सकता है। व्यापारी भी दूसरी मंडियों से जुड़कर जिंस की खरीद कर सकते हैं। ट्रायल के तौर पर गल्ला मंडी के कुछ व्यापारियों ने चार महीने में कुल 3032 क्विंटल गेहूं की ही खरीद की है, जबकि गल्ला मंडी में पीक समय में हर दिन करीब 12 से 15 हजार क्विंटल जिंस की आवक होती है।
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खुले बाजार में जहां गेहूं के दाम 1450 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, वहीं ई-ऑक्शन से खरीद में अधिकतम बोली 1900 रुपये प्रति क्विंटल तक ही पहुंच सकी है। ऐसे में व्यापारी ई-ऑक्शन से जुड़ने में कतरा रहे हैं। सही जानकारी के अभाव में वह पंजीयन में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि जनपद की गल्ला मंडी ई-ऑक्शन से खरीद-बिक्री के लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है।
गल्ला व्यापारियों व किसानों में ई-ऑक्शन प्रणाली के तहत ऑनलाइन खरीद-बिक्री में फिलहाल भ्रम की स्थिति है। यह प्रणाली किसानों व व्यापारियों को लाभदायक तो है, लेकिन जब तक भ्रम की स्थिति दूर नहीं होगी, तब तक किसान व व्यापारी पंजीयन के लिए आगे आने से हिचकिचाते रहेंगे।
- अशोक अनौरा, गल्ला व्यापार मंडल अध्यक्ष।
ई-ऑक्शन प्रणाली में व्यापारियों व किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण एक दिन में आठ से दस पंजीयन ही हो पा रहे हैं। लखनऊ से स्टाफ भेजा जाएगा, उसकेे बाद ही पंजीयन की संख्या में वृद्धि हो सकेगी। प्रणाली की जटिलता भी इसकी मुख्य वजह है।
अनिल कुमार, मंडी सचिव, ललितपुर।
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शासन ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के तहत पूरे देश की 21 मंडियों को ई-ऑक्शन प्रणाली से जोड़कर ऑन लाइन खरीद करने की योजना तैयार की है। इस योजना में जनपद समेत प्रदेश की छह मंडियों को शामिल किया गया है। प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की सभी छह मंडियों ललितपुर, मथुरा, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच और शाहजहांपुर में 14 अप्रैल 2016 को ई-ऑक्शन प्रणाली का शुभारंभ ट्रायल के तौर पर ़किया था। जनपद की नवीन गल्ला मंडी में करीब 400 व्यापारी गल्ला का व्यापार करते हैं।
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ई-ऑक्शन प्रणाली के तहत व्यापारियों और किसानों का पंजीयन होना आवश्यक है, लेकिन 14 अप्रैल से अब तक गल्ला मंडी में व्यापार करने वाले 400 के सापेक्ष मात्र 42 व्यापारियों ने ही ई-ऑक्शन प्रणाली के लिए पंजीयन कराया है। वहीं, कुल 144 किसानों का ही पंजीकरण कराया जा सका है, जबकि ई-ऑक्शन से जुड़ने के बाद किसान गल्ला मंडी में पहुंचकर देश की किसी भी मंडी में जिंस के भाव की जानकारी कर सकता है। ई-ऑक्शन से जुड़ी मंडियों में अधिकतम भाव पर जिंस की बिक्री भी कर सकता है। व्यापारी भी दूसरी मंडियों से जुड़कर जिंस की खरीद कर सकते हैं। ट्रायल के तौर पर गल्ला मंडी के कुछ व्यापारियों ने चार महीने में कुल 3032 क्विंटल गेहूं की ही खरीद की है, जबकि गल्ला मंडी में पीक समय में हर दिन करीब 12 से 15 हजार क्विंटल जिंस की आवक होती है।
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खुले बाजार में जहां गेहूं के दाम 1450 से 2350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, वहीं ई-ऑक्शन से खरीद में अधिकतम बोली 1900 रुपये प्रति क्विंटल तक ही पहुंच सकी है। ऐसे में व्यापारी ई-ऑक्शन से जुड़ने में कतरा रहे हैं। सही जानकारी के अभाव में वह पंजीयन में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि जनपद की गल्ला मंडी ई-ऑक्शन से खरीद-बिक्री के लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है।
गल्ला व्यापारियों व किसानों में ई-ऑक्शन प्रणाली के तहत ऑनलाइन खरीद-बिक्री में फिलहाल भ्रम की स्थिति है। यह प्रणाली किसानों व व्यापारियों को लाभदायक तो है, लेकिन जब तक भ्रम की स्थिति दूर नहीं होगी, तब तक किसान व व्यापारी पंजीयन के लिए आगे आने से हिचकिचाते रहेंगे।
- अशोक अनौरा, गल्ला व्यापार मंडल अध्यक्ष।
ई-ऑक्शन प्रणाली में व्यापारियों व किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण एक दिन में आठ से दस पंजीयन ही हो पा रहे हैं। लखनऊ से स्टाफ भेजा जाएगा, उसकेे बाद ही पंजीयन की संख्या में वृद्धि हो सकेगी। प्रणाली की जटिलता भी इसकी मुख्य वजह है।
अनिल कुमार, मंडी सचिव, ललितपुर।