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क्या डिप्टी सीएम की सभा लगा पाएगी चुनाव की नैया पार?
Updated Wed, 22 Nov 2017 03:14 AM IST
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नीलम सिंह वर्मा के बाद भाजपा नहीं बना पाई दूसरा अध्यक्ष
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी के लिए निकाय चुनाव काफी अहम हो गए हैं। एक तो चुनाव प्रदेश में सत्तारूढ़ रहते हुए हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पालिका की कुर्सी पर पार्टी अभी तक एक ही बार अपना अध्यक्ष बैठा सकी है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करना इस बात को पुख्ता कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी की पकड़ भले ही बुद्घिजीवी वर्ग के मतदाताओं में मानी जाती है। लेकिन, इस मामले में ललितपुर की अलग ही कहानी है। नगर पालिका परिषद में पार्टी ने पहली बार वर्ष 1995 में जीत दर्ज की थी। उस समय के चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा ने बागी उम्मीदवार कैलाश नारायण ड्योडिया को हराया था।
इस चुनाव में पार्टी के तत्कालीन नेता सांसद राजेंद्र अग्निहोत्री व उस समय के मंत्री डा. अरविंद जैन को काफी मेहनत करनी पड़ी थी। भाजपा उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा को 11 हजार 800 मत प्राप्त हुए थे तो निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश ड्योडिया को करीब 07 हजार वोट हासिल कर पाए थे। वर्ष 2000 के चुनाव में पालिकाध्यक्ष नीलम सिंह वर्मा पार्टी की जगह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उस दौरान भाजपा ने प्रदीप चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डा. सतीश सुड़ेले ने करीब 12 हजार 24 मत प्राप्त हुए थे तो भाजपा के उम्मीदवार प्रदीप चौबे 8666 मत हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा जीवनधर लाल जैन को 6797 मत, निर्दलीय उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा को 3951 मत, बसपा उम्मीदवार अनिल अंचल को 3123 मत, अशोक पटैरिया को 2076 मत मिले थे। वर्ष 2006 में भाजपा ने प्रदीप चौबे पर दोबारा दांव खेलते हुए उन्हें टिकट दिया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रमेश खटीक ने 12 हजार 886 मत पाकर बाजी मार ली थी। इसमें भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौबे को 10 हजार 97 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, सपा के गुलाम मुहम्मद गामा ने 7,512 मत, कांग्रेस के दिनेश किलेदार ने 7,348 मत, बसपा के रमेश कुशवाहा ने 9 हजार 84 मत हासिल किए थे। इस चुनाव में दो ब्राह्मण उम्मीदवार होने से वोटों का बंटवारा हो गया था। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा ने घनश्याम साहू, सपा ने राजेश यादव, कांग्रेस ने दुर्गा प्रसाद कुशवाहा, बसपा ने अतीक अहमद को उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष जायसवाल के सिर पर जीत का सेहरा बंधा था। अच्छी छवि की बदौलत उन्हें 24 हजार 840 वोट मिले थे तो दूसरे नंबर पर भाजपा के घनश्याम साहू को करीब नौ हजार मत ही प्राप्त पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस चुनाव में भाजपा ने पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे घनश्याम साहू की पत्नि रजनी साहू को उतारा है। वहीं, कांग्रेस से यशोधरा राजे, बसपा से आशा जड़िया, सपा से संध्या सुड़ेलेे मैदान में हैं। भाजपा के दो बागी जिसमें पूर्व विधायक की पत्नि कमला देवी व नरेंद्र कड़की की पत्नि वंदना जैन ने चुनाव मैदान में उतरकर अधिकृत उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्तमान में मतदाता जातियों में बंटता दिख रहा है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार को ऐडीचोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। अब सबकी नजरें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की बुधवार को होनी वाली जन सभा पर है। हालांकि, कार्यक्रम लगने से भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम पार्टी उम्मीदवार के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। लेकिन, इसकी हकीकत मतगणना के बाद ही सामने आ सकेगी।
.....
यह भी संयोग
जिस समय भाजपा की ओर से नीलम सिंह वर्मा अध्यक्ष चुने गए थे, उस समय डा. अरविंद जैन उत्तर प्रदेश शासन में मंत्री थे। वर्तमान में महरौनी विधायक मनोहर लाल पंथ उत्तर प्रदेश शासन में मंत्री हैं।
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी के लिए निकाय चुनाव काफी अहम हो गए हैं। एक तो चुनाव प्रदेश में सत्तारूढ़ रहते हुए हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पालिका की कुर्सी पर पार्टी अभी तक एक ही बार अपना अध्यक्ष बैठा सकी है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करना इस बात को पुख्ता कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी की पकड़ भले ही बुद्घिजीवी वर्ग के मतदाताओं में मानी जाती है। लेकिन, इस मामले में ललितपुर की अलग ही कहानी है। नगर पालिका परिषद में पार्टी ने पहली बार वर्ष 1995 में जीत दर्ज की थी। उस समय के चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा ने बागी उम्मीदवार कैलाश नारायण ड्योडिया को हराया था।
इस चुनाव में पार्टी के तत्कालीन नेता सांसद राजेंद्र अग्निहोत्री व उस समय के मंत्री डा. अरविंद जैन को काफी मेहनत करनी पड़ी थी। भाजपा उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा को 11 हजार 800 मत प्राप्त हुए थे तो निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश ड्योडिया को करीब 07 हजार वोट हासिल कर पाए थे। वर्ष 2000 के चुनाव में पालिकाध्यक्ष नीलम सिंह वर्मा पार्टी की जगह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उस दौरान भाजपा ने प्रदीप चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डा. सतीश सुड़ेले ने करीब 12 हजार 24 मत प्राप्त हुए थे तो भाजपा के उम्मीदवार प्रदीप चौबे 8666 मत हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा जीवनधर लाल जैन को 6797 मत, निर्दलीय उम्मीदवार नीलम सिंह वर्मा को 3951 मत, बसपा उम्मीदवार अनिल अंचल को 3123 मत, अशोक पटैरिया को 2076 मत मिले थे। वर्ष 2006 में भाजपा ने प्रदीप चौबे पर दोबारा दांव खेलते हुए उन्हें टिकट दिया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रमेश खटीक ने 12 हजार 886 मत पाकर बाजी मार ली थी। इसमें भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौबे को 10 हजार 97 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, सपा के गुलाम मुहम्मद गामा ने 7,512 मत, कांग्रेस के दिनेश किलेदार ने 7,348 मत, बसपा के रमेश कुशवाहा ने 9 हजार 84 मत हासिल किए थे। इस चुनाव में दो ब्राह्मण उम्मीदवार होने से वोटों का बंटवारा हो गया था। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा ने घनश्याम साहू, सपा ने राजेश यादव, कांग्रेस ने दुर्गा प्रसाद कुशवाहा, बसपा ने अतीक अहमद को उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष जायसवाल के सिर पर जीत का सेहरा बंधा था। अच्छी छवि की बदौलत उन्हें 24 हजार 840 वोट मिले थे तो दूसरे नंबर पर भाजपा के घनश्याम साहू को करीब नौ हजार मत ही प्राप्त पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस चुनाव में भाजपा ने पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे घनश्याम साहू की पत्नि रजनी साहू को उतारा है। वहीं, कांग्रेस से यशोधरा राजे, बसपा से आशा जड़िया, सपा से संध्या सुड़ेलेे मैदान में हैं। भाजपा के दो बागी जिसमें पूर्व विधायक की पत्नि कमला देवी व नरेंद्र कड़की की पत्नि वंदना जैन ने चुनाव मैदान में उतरकर अधिकृत उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्तमान में मतदाता जातियों में बंटता दिख रहा है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार को ऐडीचोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। अब सबकी नजरें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा की बुधवार को होनी वाली जन सभा पर है। हालांकि, कार्यक्रम लगने से भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। राजनैतिक पंडितों का मानना है कि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम पार्टी उम्मीदवार के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। लेकिन, इसकी हकीकत मतगणना के बाद ही सामने आ सकेगी।
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यह भी संयोग
जिस समय भाजपा की ओर से नीलम सिंह वर्मा अध्यक्ष चुने गए थे, उस समय डा. अरविंद जैन उत्तर प्रदेश शासन में मंत्री थे। वर्तमान में महरौनी विधायक मनोहर लाल पंथ उत्तर प्रदेश शासन में मंत्री हैं।
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