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देव उठनी से जागेंगे देव, लेकिन शहनाईयां गूजेंगी 1

Sun, 01 Oct 2017 02:39 AM IST
Updated Sun, 01 Oct 2017 02:39 AM IST
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देव उठनी से जागेंगे देव, लेकिन शहनाईयां गूजेंगी 1
देव उठनी एकादशी के बाद गूंजेंगी शहनाइयां
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ललितपुर। हिंदू मान्यता व ग्रह नक्षत्रों की गणना के अनुसार शादी विवाह के मुहूर्त देवउठनी एकादशी के दिन से शुरू होते हैं। भगवान विष्णु के निद्रा से जागने के दिन से तुलसी सालिगराम विवाह से मंगल बंधन शुरू होते हैं। इस बार ऐसा नहीं होगा। दीपावली से 11वें दिन देवउठनी एकादशी 31 अक्तूबर को होगी, लेकिन इस दिन से विवाह मुहूर्त नहीं, बल्कि इस दिन से 19 वें दिन से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे, जो दिसंबर के मध्य तक रहेंगे।
वैदिक शास्त्रियों के अनुसार हर देवउठनी एकादशी को देव जागने के दिन ही तुलसी सालिगराम विवाह से मंगल बंधन की शुरुआत होती है, साथ ही सालिग्राम तुलसी विवाह के दिन मुहूर्त निकलवाने की भी आवश्यकता नहीं होती है और इस दिन से विवाह मुहूर्त शुरू होते हैं। लेकिन, इस बार ग्रह नक्षत्रों की गणना में देवउठनी एकादशी के उन्नीसवें दिन विवाह मुहूर्त की शुरुआत हो रही है। पं. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि वृश्चिक राशि में सूर्य का प्रवेश हर बार देवउठनी एकादशी को होता था और इसी दिन से विवाह की शुरुआत होना माना जाता है। लेकिन, इस बार दीपावली से ग्यारहवें दिन 31 अक्तूबर को देवउठनी एकादशी होगी। लेकिन, वृश्चिक राशि में सूर्य का प्रवेश 17 नवंबर को होगा और इसके दो दिन बाद 19 नवंबर से विवाह मुहूर्त शुरु होंगे। वैसे इस वर्ष नवंबर व दिसंबर में कुल 14 विवाह मुहूर्त होंगे, जो 19 दिसंबर से 16 दिसंबर तक रहेंगे। शास्त्री जी बताते हैं कि शादियों में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। विवाह यदि शुभ योग में हो तो उसके परिणाम भी बेहतर और समृद्धि कारक होते हैं। इस बार 22, 23, 29 और 30 नवंबर को विशेष शुभ मुहूर्त योग है और शहर में इन मुहूर्त में सबसे अधिक शादियां होंगी। हालांकि, अगले वर्ष 2018 में फरवरी माह से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।
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यह है अबूझ मुहूर्त
सनातन धर्म में विवाह के दो मुहूर्त ऐसे बताए गए हैं, जिनमें विवाह करने के लिए किसी पंडित से पूछने की जरूरत नहीं होती है। ग्रीष्मकाल में अक्षय तृृतीया और शीत ऋतु के प्रारंभ होने पर देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी सालिग्राम विवाह के साथ शादियां की जाएं तो इसके लिए मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं होती है। इस साल भी ऐसे अनेक परिवार हैं जो आगे ज्यादा मुहूर्त नहीं होने पर खास तौर पर एकादशी के दिन शादियां करेंगे। सूर्य गणना से अलग ये विवाह मुहूर्त माने जाते हैं।
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इन दिनों में होंगी अधिक शादियां
22 नवंबर को विनायक चौथ व्रत है। 23 नवंबर को श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव विवाह पंचमी है। इस विशेष मुहूर्त में अनेक शादियां हैं। 29 नवंबर को मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती को अधिक शादियां होंगी। वैसे नवंबर में विवाह के आठ और दिसंबर में कुल छह मुहूर्त ही हैं। इस प्रकार नवंबर और दिसंबर में कुल दो सप्ताह यानि 14 दिन ही विवाह मुहूर्त होंगे।
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