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विपणन शाखा ने लक्ष्य से चार गुना खरीदा गेहूं
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wheat
- फोटो : wheat
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ललितपुर। जिले में गेहूं खरीद पर जांच शुरू होते ही कई दिलचस्प पहलु उजागर होने लगे हैं। शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य के 85.24 प्रतिशत तक पहुंचाने में तीन एजेंसियों ने अहम रोल निभाया है। जहां विपणन शाखा ने लक्ष्य से चार सौ दस गुना खरीद की है, वहीं भारतीय खाद्य निगम ने 185.08 प्रतिशत व पीसीएफ ने 99.80 प्रतिशत गेहूं खरीदा है। बाकी अन्य एजेंसी खरीद में पिछड़ गई हैं। इससे पूरी खरीद सवालों के घेरे में आ गई है।
शासन ने जिले में 92,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनपद में 128 केंद्र खोले गए। इनमें मल्टीस्टेट/एफपीओ के 32 केंद्र, पीसीएफ के अंतर्गत मल्टीस्टेट के 20 केंद्र, नैफेड के 5 केंद्र, यूपीसीयू के 8 केंद्र और एनसीसीएफ के चार केंद्र खोले गए थे, जिन्हें एक जून के आदेशानुसार बंद कर दिया गया था। लेकिन, इसके बाद भी विपणन शाखा के तीन, पीसीएफ के 55 और भारतीय खाद्य निगम का एक केंद्र संचालित होता रहा।
तीस जून तक चली गेहूं खरीद में लक्ष्य के सापेक्ष 80694.85 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। विपणन शाखा ने लक्ष्य 1500 के सापेक्ष 6155.85 मीट्रिक टन, पीसीएफ ने 60,500 के मुकाबले 60381.90 मीट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम 2000 के मुकाबले 3701.50 मीट्रिक टन खरीद की। वहीं, यूपीपीसीयू ने 67.47 प्रतिशत, एनसीसीएफ ने 10.71 प्रतिशत, नेफेड ने 45.93 प्रतिशत गेहूं खरीदा है। इससे खरीद पर सवाल उठ रहे हैं।
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मंडलायुक्त सुभाषचंद्र शर्मा ने गेहूं खरीद पर जांच बैठा दी है। उन्होंने उप निदेशक मंडी परिषद झांसी मंडल सीपी तिवारी को जांच सौपी है। इससे खरीद से जुड़े अधिकारी सर्तक हो गए हैं।
इतना नहीं हो पाया सुरक्षित भंडारण
पीसीएफ का 15662.303 मीट्रिक टन गेहूं का सुरक्षित भंडारण होना अवशेष है। स्थान के अभाव में इसके भंडारण में देरी हो रही है। विभागीय अफसरों को अब रेलवे की रैक लगने का इंतजार है।
एफपीओ की खरीद पर संदेह
एफपीओ एजेंसियों की खरीद पर संदेह जताया जा रहा है। इन्होंने किसानों का भुगतान करने में भी लेटलतीफी बरती है। जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मल्टीस्टेट/एफपीओ के 32 केंद्र, पीसीएफ के अंतर्गत मल्टीस्टेट के 20 केंद्र, नैफेड के 5 केंद्र, यूपीसीयू के 8 केंद्र, एनसीसीएफ के 4 केंद्र खोले गए थे, जिन्हें जिलाघिकारी के एक जून के आदेशानुसार बंद कर दिया गया। इस दौरान क्या गड़बड़ी उजागर हुई थी, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। यह भी एक कारण हो सकता है कि पर्दे के पीछे खरीद में शामिल रहे लोग कार्रवाई से बचने में कामयाब रहे।
2131.211 लाख रुपये का बकाया
तीस जून को खरीद समाप्त होने के बाद भी किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो सका है। वर्तमान में 2131.211 लाख रुपये का भुगतान अभी भी लंबित है। इसमें पीसीएफ का 1982.571 लाख रुपये का बकाया बना हुआ है। सहायक निबंधक रमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मां वैष्णो एग्रो मल्टीस्टेट का एक करोड़ सत्ताइस लाख रुपये एवं शिप्रा फार्मर कंपनी का बत्तीस लाख चौहत्तर हजार रुपये का भुगतान लंबित है। एफसीआई से पीसीएफ को 2117.55 लाख रुपये का भुगतान चाहिए है। यदि यह भुगतान हो जाता है तो किसानों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।
गेहूं खरीद के संबंध में रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। यदि जांच अधिकारी अन्य कोई जानकारी मांगेंगे तो उन्हें मुहैया कराई जाएगी।
- राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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शासन ने जिले में 92,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनपद में 128 केंद्र खोले गए। इनमें मल्टीस्टेट/एफपीओ के 32 केंद्र, पीसीएफ के अंतर्गत मल्टीस्टेट के 20 केंद्र, नैफेड के 5 केंद्र, यूपीसीयू के 8 केंद्र और एनसीसीएफ के चार केंद्र खोले गए थे, जिन्हें एक जून के आदेशानुसार बंद कर दिया गया था। लेकिन, इसके बाद भी विपणन शाखा के तीन, पीसीएफ के 55 और भारतीय खाद्य निगम का एक केंद्र संचालित होता रहा।
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तीस जून तक चली गेहूं खरीद में लक्ष्य के सापेक्ष 80694.85 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। विपणन शाखा ने लक्ष्य 1500 के सापेक्ष 6155.85 मीट्रिक टन, पीसीएफ ने 60,500 के मुकाबले 60381.90 मीट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम 2000 के मुकाबले 3701.50 मीट्रिक टन खरीद की। वहीं, यूपीपीसीयू ने 67.47 प्रतिशत, एनसीसीएफ ने 10.71 प्रतिशत, नेफेड ने 45.93 प्रतिशत गेहूं खरीदा है। इससे खरीद पर सवाल उठ रहे हैं।
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मंडलायुक्त सुभाषचंद्र शर्मा ने गेहूं खरीद पर जांच बैठा दी है। उन्होंने उप निदेशक मंडी परिषद झांसी मंडल सीपी तिवारी को जांच सौपी है। इससे खरीद से जुड़े अधिकारी सर्तक हो गए हैं।
इतना नहीं हो पाया सुरक्षित भंडारण
पीसीएफ का 15662.303 मीट्रिक टन गेहूं का सुरक्षित भंडारण होना अवशेष है। स्थान के अभाव में इसके भंडारण में देरी हो रही है। विभागीय अफसरों को अब रेलवे की रैक लगने का इंतजार है।
एफपीओ की खरीद पर संदेह
एफपीओ एजेंसियों की खरीद पर संदेह जताया जा रहा है। इन्होंने किसानों का भुगतान करने में भी लेटलतीफी बरती है। जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मल्टीस्टेट/एफपीओ के 32 केंद्र, पीसीएफ के अंतर्गत मल्टीस्टेट के 20 केंद्र, नैफेड के 5 केंद्र, यूपीसीयू के 8 केंद्र, एनसीसीएफ के 4 केंद्र खोले गए थे, जिन्हें जिलाघिकारी के एक जून के आदेशानुसार बंद कर दिया गया। इस दौरान क्या गड़बड़ी उजागर हुई थी, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। यह भी एक कारण हो सकता है कि पर्दे के पीछे खरीद में शामिल रहे लोग कार्रवाई से बचने में कामयाब रहे।
2131.211 लाख रुपये का बकाया
तीस जून को खरीद समाप्त होने के बाद भी किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो सका है। वर्तमान में 2131.211 लाख रुपये का भुगतान अभी भी लंबित है। इसमें पीसीएफ का 1982.571 लाख रुपये का बकाया बना हुआ है। सहायक निबंधक रमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मां वैष्णो एग्रो मल्टीस्टेट का एक करोड़ सत्ताइस लाख रुपये एवं शिप्रा फार्मर कंपनी का बत्तीस लाख चौहत्तर हजार रुपये का भुगतान लंबित है। एफसीआई से पीसीएफ को 2117.55 लाख रुपये का भुगतान चाहिए है। यदि यह भुगतान हो जाता है तो किसानों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।
गेहूं खरीद के संबंध में रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। यदि जांच अधिकारी अन्य कोई जानकारी मांगेंगे तो उन्हें मुहैया कराई जाएगी।
- राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी