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महरौनी पेज कुम्हैड़ी
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:06 AM IST
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अन्ना पशुओं से मुक्ति पाने ग्रामीणों ने चलाई मुहिम
कुम्हेडी (ललितपुर) आवारा पशु किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। किसानों को रात भर जागकर अपनी फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। जगह जगह सैकड़ों की संख्या में आवारा पशु फसलों को चौपट कर रहे हैं। परेशान ग्रामीणों ने गांव में एक मुहिम चलाई है, जिसमें किसान चंदा जोड़कर आवारा पशुओं के लिए चारा भूसा की व्यवस्था कर रहे हैं। कई दिनों से व्यवस्था करने के बाद अब पैसे की कमी होने के कारण पर्याप्त मात्रा में पशुओं को चारा भूसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। किसानों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर प्रशासन से सहायता मांगी है।
सैकड़ों पशुओं के साथ रहने से फैलती है बीमारी
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा समस्या पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका से है। सैकड़ों पशु एक साथ रहते हैं तो यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों को जानवरों के लिए चारा भूसा की व्यवस्था करने में कठिनाई हो रही है ऐसे में बीमार व घायल जानवरों के इलाज के लिए पैसे कहां से प्राप्त हों। ग्रामीणों ने एक प्रार्थना पत्र देकर शासन से मदद मांगी है। प्रार्थना पत्र पर श्रीराम मगरा, सुखलाल, धनीराम, कांशीराम राममिलन, बल्लू गुर्जर, जयराम, पुष्पेंद्र परिहार, हरपाल, राघवेंद्र आदि के हस्ताक्षर थे।
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कुम्हेडी (ललितपुर) आवारा पशु किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। किसानों को रात भर जागकर अपनी फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। जगह जगह सैकड़ों की संख्या में आवारा पशु फसलों को चौपट कर रहे हैं। परेशान ग्रामीणों ने गांव में एक मुहिम चलाई है, जिसमें किसान चंदा जोड़कर आवारा पशुओं के लिए चारा भूसा की व्यवस्था कर रहे हैं। कई दिनों से व्यवस्था करने के बाद अब पैसे की कमी होने के कारण पर्याप्त मात्रा में पशुओं को चारा भूसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। किसानों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर प्रशासन से सहायता मांगी है।
सैकड़ों पशुओं के साथ रहने से फैलती है बीमारी
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा समस्या पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका से है। सैकड़ों पशु एक साथ रहते हैं तो यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों को जानवरों के लिए चारा भूसा की व्यवस्था करने में कठिनाई हो रही है ऐसे में बीमार व घायल जानवरों के इलाज के लिए पैसे कहां से प्राप्त हों। ग्रामीणों ने एक प्रार्थना पत्र देकर शासन से मदद मांगी है। प्रार्थना पत्र पर श्रीराम मगरा, सुखलाल, धनीराम, कांशीराम राममिलन, बल्लू गुर्जर, जयराम, पुष्पेंद्र परिहार, हरपाल, राघवेंद्र आदि के हस्ताक्षर थे।
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