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एमडीएम व आंगनबाड़ी में भोजन की गुणवता पर टॉस्क फोर्स रखेगी नजर
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:26 AM IST
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मिड डे मील की गुणवत्ता पर टास्क फोर्स की नजर
ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए संचालित मिड डे मील योजना और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 03 से 06 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए संचालित हॉट कुक्ड योजना में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए पूर्व में शासन द्वारा टास्क फोर्स गठित की गई है। लेकिन, टास्क फोर्स के द्वारा नियमित रुप से निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। निष्क्रिय हो चुकी इस टास्क फोर्स को सक्रिय बनाने के लिए शासन ने जिलाधिकारी को आदेश जारी किए हैं।
जनपद में कुल 1,561 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर के समय भोजन उपलब्ध कराने के लिए मिड-डे-मील योजना संचालित की जा रही है। मिड-डे-मील में बनने वाले भोजन में पौष्टिकता बनी रहे, इसके लिए शासन स्तर से ही मानक व हर रोज भोजन बनने का मेन्यू निर्धारित किया गया है। इसी तरह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी 03 वर्ष से 06 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए हॉट कुक्ड योजना संचालित की जा रही है। जनपद में नगर क्षेत्र व समस्त विकाखंड स्तरों पर 1,124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रही है। मिड-डे-मील व आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होने वाला यह भोजन मानकों के अनुसार पकाया जा रहा है कि नहीं इसी निगरानी करने और भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए शासन स्तर से जनपदीय अधिकारियों की टास्ट फोर्स का गठन किया गया था। यह टास्ट फोर्स जिलाधिकारी के नेतृत्व में काम करती है और वह स्वयं ही इसके अध्यक्ष होते हैं। शासन द्वारा नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुआत में हर वर्ष जिलाधिकारियों को आदेश जारी करके इस टीम को सक्रिय कराने के निर्देश देते हैं। शासन के निर्देशन पर यह टीम सक्रिय तो हो जाती है, लेकिन यह सक्रियता केवल एक-दो माह के लिए ही होती है। हाल ही में प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने आदेश जारी करके समस्त जिलाधिकारियों को टास्क फोर्स गठित करने और नियमित सक्रिय बनाए रखने के लिए निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा की प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद अधिकारियों के कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन आता है कि पूर्व की ही भांति निष्क्रिय कार्यप्रणाली बनी रहेगी।
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यह हैं फोर्स के सदस्य
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनाई गई इस टॉस्क फोर्स में सदस्य के रुप में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, समस्त उप मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस फोर्स के सदस्य होने के साथ-साथ सचिव भी रहते हैं। इन समस्त सदस्यों को शासन से प्रत्येक माह पांच-पांच केंद्रों का निरीक्षण करने के आदेश हैं। इसमें से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने विद्यालयों के मिड-डे-मील व जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन अन्य अधिकारी शासन के निर्देशों का अनुपालन नहीं करते हैं।
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मां समिति का नहीं हो सका गठन
मिड-डे-मील में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए इस वर्ष से समस्त परिषदीय विद्यालयों में मां समिति का गठन किया जाना था। इस समिति में उन छह महिलाओं को शामिल करना था, जिनके बच्चे भी संबंधित विद्यालय में पढ़ते हो। इस छह सदस्यीय मां समिति का काम था कि हर रोज एक मां बच्चों के खाने के लिए पके भोजन को खाकर उसकी गुणवत्ता को जांचे और उसके बाद यदि वह संतुष्ट होती है तो फिर वह भोजन सभी बच्चों को वितरित किया जाए। वहीं, इस समिति को आंगनबाड़ियों पर भी अपनी भागीदारी निभाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस शासनादेश को जारी हुए लगभग तीन माह बीतने वाले हैं, लेकिन अभी तक जनपद के समस्त परिषदीय विद्यालयों में मां समिति का गठन नहीं हो सका है।
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इनका कहना है
शासन द्वारा हाल ही में शासनादेश जारी किए गए है, लेकिन जनपद में पहले से ही टॉस्क फोर्स गठित है। हमारे द्वारा नियमित रुप से निरीक्षण भी किए जा रहे हैं। वहीं, प्रत्येक विद्यालय में मां समितियों का गठन भी किया जा रहा है, जो काफी हद तक पूर्ण हो चुका है।
अंबरीष कुमार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए संचालित मिड डे मील योजना और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 03 से 06 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए संचालित हॉट कुक्ड योजना में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए पूर्व में शासन द्वारा टास्क फोर्स गठित की गई है। लेकिन, टास्क फोर्स के द्वारा नियमित रुप से निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। निष्क्रिय हो चुकी इस टास्क फोर्स को सक्रिय बनाने के लिए शासन ने जिलाधिकारी को आदेश जारी किए हैं।
जनपद में कुल 1,561 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर के समय भोजन उपलब्ध कराने के लिए मिड-डे-मील योजना संचालित की जा रही है। मिड-डे-मील में बनने वाले भोजन में पौष्टिकता बनी रहे, इसके लिए शासन स्तर से ही मानक व हर रोज भोजन बनने का मेन्यू निर्धारित किया गया है। इसी तरह से आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी 03 वर्ष से 06 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए हॉट कुक्ड योजना संचालित की जा रही है। जनपद में नगर क्षेत्र व समस्त विकाखंड स्तरों पर 1,124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रही है। मिड-डे-मील व आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होने वाला यह भोजन मानकों के अनुसार पकाया जा रहा है कि नहीं इसी निगरानी करने और भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए शासन स्तर से जनपदीय अधिकारियों की टास्ट फोर्स का गठन किया गया था। यह टास्ट फोर्स जिलाधिकारी के नेतृत्व में काम करती है और वह स्वयं ही इसके अध्यक्ष होते हैं। शासन द्वारा नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुआत में हर वर्ष जिलाधिकारियों को आदेश जारी करके इस टीम को सक्रिय कराने के निर्देश देते हैं। शासन के निर्देशन पर यह टीम सक्रिय तो हो जाती है, लेकिन यह सक्रियता केवल एक-दो माह के लिए ही होती है। हाल ही में प्रदेश के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने आदेश जारी करके समस्त जिलाधिकारियों को टास्क फोर्स गठित करने और नियमित सक्रिय बनाए रखने के लिए निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा की प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद अधिकारियों के कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन आता है कि पूर्व की ही भांति निष्क्रिय कार्यप्रणाली बनी रहेगी।
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यह हैं फोर्स के सदस्य
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनाई गई इस टॉस्क फोर्स में सदस्य के रुप में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, समस्त उप मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस फोर्स के सदस्य होने के साथ-साथ सचिव भी रहते हैं। इन समस्त सदस्यों को शासन से प्रत्येक माह पांच-पांच केंद्रों का निरीक्षण करने के आदेश हैं। इसमें से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने विद्यालयों के मिड-डे-मील व जिला कार्यक्रम अधिकारी अपने आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन अन्य अधिकारी शासन के निर्देशों का अनुपालन नहीं करते हैं।
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मां समिति का नहीं हो सका गठन
मिड-डे-मील में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता को जांचने के लिए इस वर्ष से समस्त परिषदीय विद्यालयों में मां समिति का गठन किया जाना था। इस समिति में उन छह महिलाओं को शामिल करना था, जिनके बच्चे भी संबंधित विद्यालय में पढ़ते हो। इस छह सदस्यीय मां समिति का काम था कि हर रोज एक मां बच्चों के खाने के लिए पके भोजन को खाकर उसकी गुणवत्ता को जांचे और उसके बाद यदि वह संतुष्ट होती है तो फिर वह भोजन सभी बच्चों को वितरित किया जाए। वहीं, इस समिति को आंगनबाड़ियों पर भी अपनी भागीदारी निभाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस शासनादेश को जारी हुए लगभग तीन माह बीतने वाले हैं, लेकिन अभी तक जनपद के समस्त परिषदीय विद्यालयों में मां समिति का गठन नहीं हो सका है।
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इनका कहना है
शासन द्वारा हाल ही में शासनादेश जारी किए गए है, लेकिन जनपद में पहले से ही टॉस्क फोर्स गठित है। हमारे द्वारा नियमित रुप से निरीक्षण भी किए जा रहे हैं। वहीं, प्रत्येक विद्यालय में मां समितियों का गठन भी किया जा रहा है, जो काफी हद तक पूर्ण हो चुका है।
अंबरीष कुमार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।