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ललितपुर जिले में मिले 13
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:12 AM IST
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ललितपुर जिले में मिले 138 खसरा के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी खसरा रोग अपनी जड़े जमाए हुए है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग शहरी क्षेत्र में इस बीमारी को नियंत्रित करने में सफल हुआ है। इसकी पुष्टि एचएमआईएस (हेल्थ मैनेजमेंट इनफोरमेशन सिस्टम) के आंकड़ों से पुष्टि हुई है। जहां ग्रामीण इलाकों में इसके कुल 138 मरीज पाए गए हैं। वहीं, शहरी क्षेत्र में इसका एक भी मरीज नहीं मिला है।
खसरा एक संक्रामक बीमारी है। इससे ग्रसित रोगी का शुरू में गला खराब होता है, फिर उसे बुखार आता है। यह बीमारी खासतौर 9 माह से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्वाधिक होती है। खसरे में पहले चार दिन तक काफी तेज बुखार आता है। इसका तापमान 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। रोगी की आंखों में लालपन, सूजन और खुजली होती है। रोगी के गले में दर्द, खांसी, जुकाम, नाक से पानी बहता है और तेज बुखार आता है साथ ही शरीर में थकान होने लगती है। पूरे शरीर पर दाने निकल आते हैं। दाने नुकीले होते हैं और उनका आकार फोड़े जैसा होता है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार खसरे से बचने के लिए दो टीके लगाए जाते हैं। पहली खुराक 9 से 12 महीने की उम्र के बीच दी जाती है। उसके बाद 16.24 महीने की उम्र के बीच दूसरी खुराक डीपीटी यानी डिप्थेरियाए पर्टूसिंस और टेटनस बूस्टर की खुराक के साथ दी जाती है। जिले में अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 तक 28 हजार से अधिक बच्चों का खसरा का प्रथम टीकाकरण और 27 हजार से ज्यादा बच्चों का दूसरा टीकाकरण किया जा चुका है। उधर, एसीएमओ डॉ. जेएस बक्शी का कहना है कि खसरा रोग में शुरुआती लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है। दो टीकों के विकल्प में खसरे का नया टीका यानी खसरा और रूबेला वैक्सीन आता है। इसका ठीक तरह से इलाज नहीं होने पर बच्चों में कई प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं जैसे कि निमोनिया, दिमागी बुखार, डायरिया और कान का बहना शामिल है।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी खसरा रोग अपनी जड़े जमाए हुए है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग शहरी क्षेत्र में इस बीमारी को नियंत्रित करने में सफल हुआ है। इसकी पुष्टि एचएमआईएस (हेल्थ मैनेजमेंट इनफोरमेशन सिस्टम) के आंकड़ों से पुष्टि हुई है। जहां ग्रामीण इलाकों में इसके कुल 138 मरीज पाए गए हैं। वहीं, शहरी क्षेत्र में इसका एक भी मरीज नहीं मिला है।
खसरा एक संक्रामक बीमारी है। इससे ग्रसित रोगी का शुरू में गला खराब होता है, फिर उसे बुखार आता है। यह बीमारी खासतौर 9 माह से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्वाधिक होती है। खसरे में पहले चार दिन तक काफी तेज बुखार आता है। इसका तापमान 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। रोगी की आंखों में लालपन, सूजन और खुजली होती है। रोगी के गले में दर्द, खांसी, जुकाम, नाक से पानी बहता है और तेज बुखार आता है साथ ही शरीर में थकान होने लगती है। पूरे शरीर पर दाने निकल आते हैं। दाने नुकीले होते हैं और उनका आकार फोड़े जैसा होता है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार खसरे से बचने के लिए दो टीके लगाए जाते हैं। पहली खुराक 9 से 12 महीने की उम्र के बीच दी जाती है। उसके बाद 16.24 महीने की उम्र के बीच दूसरी खुराक डीपीटी यानी डिप्थेरियाए पर्टूसिंस और टेटनस बूस्टर की खुराक के साथ दी जाती है। जिले में अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 तक 28 हजार से अधिक बच्चों का खसरा का प्रथम टीकाकरण और 27 हजार से ज्यादा बच्चों का दूसरा टीकाकरण किया जा चुका है। उधर, एसीएमओ डॉ. जेएस बक्शी का कहना है कि खसरा रोग में शुरुआती लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है। दो टीकों के विकल्प में खसरे का नया टीका यानी खसरा और रूबेला वैक्सीन आता है। इसका ठीक तरह से इलाज नहीं होने पर बच्चों में कई प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं जैसे कि निमोनिया, दिमागी बुखार, डायरिया और कान का बहना शामिल है।
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