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छात्र-छात्राओं द्वारा लगाई प्रदर्शनी बनी स्वर्ण जयंती समारोह का केंद्र
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:51 AM IST
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आकर्षण का केंद्र बनी छात्रों की प्रदर्शनी
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में सांस्कृतिक व बुंदेली कार्यक्रमों समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर महाविद्यालय में संचालित समस्त संकायों के छात्र छात्राओं ने अपने विभागाध्यक्षों के सानिध्य में अपने अपने विषय से संबंधित शोध व मॉडल के स्टाल लगाए हैं, जो समारोह में आकर्षण का केंद्र बने हैं।
नेहरू महाविद्यालय परिसर में संचालित संकायों में संस्कृत विभाग, इतिहास, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग, पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग, उद्यान विभाग, कृषि अभियंत्रिकी विभाग, अंग्रेजी विभाग, गृहविज्ञान विभाग, शस्य विज्ञान विभाग, कीट विज्ञान विभाग, मनोविज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान विभाग, भौतिकी विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान विभागों के छात्र-छात्राओं द्वारा अपने अपने विषय व पाठ्यक्रम से संबंधित मॉडलों की बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति की गई है। इसके साथ ही बच्चों ने अपने शिक्षकों के सानिध्य में कुछ मॉडलों का सजीव रूप देने का भी काम किया है। इसके साथ ही संबंधित विषय पर महाविद्यालय द्वारा किए गए शोधों को भी मॉडलों के माध्यम से समारोह में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रदर्शनी के द्वारा छात्र-छात्राओं ने अपनी योग्यता के साथ साथ महाविद्यालय के शैक्षिक गुणवत्ता व परिवेश का भी मॉडल प्रस्तुुत किया है, जिसकी सभी के द्वारा सराहना की जा रही है। इससे बच्चों की मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है। वैसे तो प्रदर्शनी में प्रस्तुत किए गए सभी मॉडल एक से बढ़कर एक हैं, लेकिन इनमें से भी कुछ मॉडल व स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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भारत की पहली तोप का एक्टिव मॉडल बनाया
इतिहास विभाग के अध्यक्ष पंकज शर्मा के संरक्षण में छात्र छात्राओं ने जनपद के साथ साथ बुंदेलखंड क्षेत्र के लगभग समस्त एतिहासिक धरोहर का स्वरूप मॉडल बनाकर प्रस्तुत किया है। इसमें छात्र राहुल साहू ने वर्ष 1526 में भारत में पहली बार उपयोग होने वाली तोप का एक्टिव मॉडल बनाया। भारती की पहली तोप का उपयोग बाबर द्वारा पानीपत के युद्ध में किया गया था। यह तोप कांसे की बनी होती थी। यह जानकारी देते हुए छात्र राहुल ने बताया कि उसने इस तोप को लकड़ी, सीमेंट व लोहे की सहायता से बनाया है। इसके अलावा इस तोप का परीक्षण भी किया गया है, यह तोप 50 से 70 फिट दूरी तक मार करती है।
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मिट्टी बताती है अपनी उर्वरक क्षमता
मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन एमएससी वर्ग विभाग के अध्यक्ष डा. हरीशचंद्र दीक्षित के संरक्षण में छात्र-छात्राओं द्वारा मृदा और खेती से संबंधित एक से बढ़कर एक मॉडल तैयार किए गये हैं। एमएससी के छात्र मोहसिन पठान ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि रसायन के द्वारा मृदा यानी खेतों की मिट्टी से यह पता लगाया जा सकता है कि उक्त मिट्टी की उर्वरक क्षमता या उपजाऊ क्षमता कितनी है। उर्वरक क्षमता पता होने से इसी क्षमता के अनुसार यदि खेती की जाए तो फसल की पैदावार काफी हद तक ठीक रहेगी।
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मुर्गी पालन से दो-दो लाभ
पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग के बच्चों द्वारा माडल प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें विभागाध्यक्ष डा. बलराम द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान मेें खेतों में कीटों को मारने के लिए रसायनिक कीट नाशक दवाओं का उपयोग किया जाता है, इससे कहीं न कहीं हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। कीट मारने के लिए कीटनाशक दवाओं के बदले मुर्गियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक एकड़ खेत के लिए 5-6 मुर्गी पर्याप्त होती हैं, इससे खेतों से कीटों का सफाया होगा और मुर्गी पालन से होने वाले आर्थिक फायदे भी होंगे। वहीं कीट विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने कीटनाशक दावाओं के उपयोग को लेकर एक शार्ट मूवी बनाई है। जिसको प्रोजेक्टर के माध्यम से स्टाफ पर दिखाया जा रहा है। इसको बनाने में अर्पित द्विवेदी, आकांक्षा, भूमिका आदि छात्र-छात्राओं का सहयोग रहा।
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एन-07 किस्म के आंवला में तीन गुना पैदावार
महाविद्यालय में संचालित उद्यान विभाग के छात्र-छात्राओं ने उद्यान से होने वाले उद्योगों के बारे में मॉडल प्रस्तुत किए हैं। इसमें सबसे अधिक आकर्षण के केंद्र आंवले के पेड़ का एक तना रहा। इस तने पर अंगूर के गुच्छे की तरह आंवले लगे हुए थे। इसके बारे में जानकारी देने पर विभागाध्यक्ष लक्ष्मीकांत मिश्रा ने बताया कि इस आवले की किस्म का नाम नरेंद्र-07 (एन-07) है। यह किस्म जनपद के क्षेत्रीय वातावरण के अनुसार काफी अनुकूल है, इसमें अन्य किस्म से तीन गुना अधिक उत्पादन होता है। इसका मतलब इसकी खेती करने से मान्य से तीन गुना अधिक मुनाफा हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि उनके द्वारा स्वयं किए गए शोधों पर उन्होंने कई किताबें भी लिखीं हैं।
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मुंबई में सम्मान व कलकत्ता के म्यूजियम में मिला स्थान
शस्य विज्ञान विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल में रखा देशी हल के आकार का बना बुंदेली पोरा नामक यंत्र आकर्षण का केंद्र रहा। यह यंत्र विभागाध्यक्ष डा. अवनीश त्रिपाठी द्वारा बनाया गया है। यह जानकारी देते हुए छात्र मो. आकिल ने बताया कि यह यंत्र देशी हल की तरह है, लेकिन इसमें दो अलग-अलग कीपों व नली को ऐस तरीके से लगाया गया है, जिससे हल से खेत जोतते समय ही खाद और बीच को भी डाला जा सकता है। इससे किसान को कम मेहनत करनी पड़ेगी और यह सफल भी है। इस यंत्र को मुंबई में आयोजित प्रदर्शनी में चुना गया था और इसे बनाने वाले डा. अवनीश त्रिपाठी को सम्मानित भी किया गया था। वर्तमान में उनका मॉडल कोलकत्ता स्थित नेशनल ऑफ साइंस म्यजियम में रखा हुआ है। स्टाफ में रखा यह मॉडल उसी आधार पर बच्चों के द्वारा तैयार किया गया है।
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महिलाओं को भाया गृह विज्ञान का स्टाल
महाविद्यालय परिसर में लगा गृह विज्ञान विभाग का स्टाल समारोह में आने वाली महिलाओं व युवतियों के मन को काफी भा रहा है। यहां पर विभागाध्यक्ष ऋचा सक्सेना व कविता सिंह के संरक्षण में छात्राओं ने बहुत ही आकर्षित मॉडल प्रस्तुत किए हैं। यहां पर मॉडल के रूप में रखे घरेलू साज सज्जा व दैनिक उपयोगी सामनों को अखबार, नैपकिन पेपर, टीशू पेपर, पुरानी चूड़ियों, पुराने कपड़े आदि फालतू पड़े समान के माध्यम से बनाया गया है। घर में रखे समान को किस तरह से उपयोग में लाया जा सकता है और उसको आकर्षित बनाया जा सकता है, यह भली भांति दर्शाया गया है। इसमें भारती रैकवार, कामनी सिंह, श्रद्घा, राधिका रावत, राखी वर्मा आदि छात्राओं को सहयोग रहा।
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ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में सांस्कृतिक व बुंदेली कार्यक्रमों समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर महाविद्यालय में संचालित समस्त संकायों के छात्र छात्राओं ने अपने विभागाध्यक्षों के सानिध्य में अपने अपने विषय से संबंधित शोध व मॉडल के स्टाल लगाए हैं, जो समारोह में आकर्षण का केंद्र बने हैं।
नेहरू महाविद्यालय परिसर में संचालित संकायों में संस्कृत विभाग, इतिहास, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग, पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग, उद्यान विभाग, कृषि अभियंत्रिकी विभाग, अंग्रेजी विभाग, गृहविज्ञान विभाग, शस्य विज्ञान विभाग, कीट विज्ञान विभाग, मनोविज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग, रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान विभाग, भौतिकी विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान विभागों के छात्र-छात्राओं द्वारा अपने अपने विषय व पाठ्यक्रम से संबंधित मॉडलों की बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति की गई है। इसके साथ ही बच्चों ने अपने शिक्षकों के सानिध्य में कुछ मॉडलों का सजीव रूप देने का भी काम किया है। इसके साथ ही संबंधित विषय पर महाविद्यालय द्वारा किए गए शोधों को भी मॉडलों के माध्यम से समारोह में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रदर्शनी के द्वारा छात्र-छात्राओं ने अपनी योग्यता के साथ साथ महाविद्यालय के शैक्षिक गुणवत्ता व परिवेश का भी मॉडल प्रस्तुुत किया है, जिसकी सभी के द्वारा सराहना की जा रही है। इससे बच्चों की मेहनत सफल होती दिखाई दे रही है। वैसे तो प्रदर्शनी में प्रस्तुत किए गए सभी मॉडल एक से बढ़कर एक हैं, लेकिन इनमें से भी कुछ मॉडल व स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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भारत की पहली तोप का एक्टिव मॉडल बनाया
इतिहास विभाग के अध्यक्ष पंकज शर्मा के संरक्षण में छात्र छात्राओं ने जनपद के साथ साथ बुंदेलखंड क्षेत्र के लगभग समस्त एतिहासिक धरोहर का स्वरूप मॉडल बनाकर प्रस्तुत किया है। इसमें छात्र राहुल साहू ने वर्ष 1526 में भारत में पहली बार उपयोग होने वाली तोप का एक्टिव मॉडल बनाया। भारती की पहली तोप का उपयोग बाबर द्वारा पानीपत के युद्ध में किया गया था। यह तोप कांसे की बनी होती थी। यह जानकारी देते हुए छात्र राहुल ने बताया कि उसने इस तोप को लकड़ी, सीमेंट व लोहे की सहायता से बनाया है। इसके अलावा इस तोप का परीक्षण भी किया गया है, यह तोप 50 से 70 फिट दूरी तक मार करती है।
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मिट्टी बताती है अपनी उर्वरक क्षमता
मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन एमएससी वर्ग विभाग के अध्यक्ष डा. हरीशचंद्र दीक्षित के संरक्षण में छात्र-छात्राओं द्वारा मृदा और खेती से संबंधित एक से बढ़कर एक मॉडल तैयार किए गये हैं। एमएससी के छात्र मोहसिन पठान ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि रसायन के द्वारा मृदा यानी खेतों की मिट्टी से यह पता लगाया जा सकता है कि उक्त मिट्टी की उर्वरक क्षमता या उपजाऊ क्षमता कितनी है। उर्वरक क्षमता पता होने से इसी क्षमता के अनुसार यदि खेती की जाए तो फसल की पैदावार काफी हद तक ठीक रहेगी।
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मुर्गी पालन से दो-दो लाभ
पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग के बच्चों द्वारा माडल प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें विभागाध्यक्ष डा. बलराम द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान मेें खेतों में कीटों को मारने के लिए रसायनिक कीट नाशक दवाओं का उपयोग किया जाता है, इससे कहीं न कहीं हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। कीट मारने के लिए कीटनाशक दवाओं के बदले मुर्गियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक एकड़ खेत के लिए 5-6 मुर्गी पर्याप्त होती हैं, इससे खेतों से कीटों का सफाया होगा और मुर्गी पालन से होने वाले आर्थिक फायदे भी होंगे। वहीं कीट विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने कीटनाशक दावाओं के उपयोग को लेकर एक शार्ट मूवी बनाई है। जिसको प्रोजेक्टर के माध्यम से स्टाफ पर दिखाया जा रहा है। इसको बनाने में अर्पित द्विवेदी, आकांक्षा, भूमिका आदि छात्र-छात्राओं का सहयोग रहा।
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एन-07 किस्म के आंवला में तीन गुना पैदावार
महाविद्यालय में संचालित उद्यान विभाग के छात्र-छात्राओं ने उद्यान से होने वाले उद्योगों के बारे में मॉडल प्रस्तुत किए हैं। इसमें सबसे अधिक आकर्षण के केंद्र आंवले के पेड़ का एक तना रहा। इस तने पर अंगूर के गुच्छे की तरह आंवले लगे हुए थे। इसके बारे में जानकारी देने पर विभागाध्यक्ष लक्ष्मीकांत मिश्रा ने बताया कि इस आवले की किस्म का नाम नरेंद्र-07 (एन-07) है। यह किस्म जनपद के क्षेत्रीय वातावरण के अनुसार काफी अनुकूल है, इसमें अन्य किस्म से तीन गुना अधिक उत्पादन होता है। इसका मतलब इसकी खेती करने से मान्य से तीन गुना अधिक मुनाफा हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि उनके द्वारा स्वयं किए गए शोधों पर उन्होंने कई किताबें भी लिखीं हैं।
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मुंबई में सम्मान व कलकत्ता के म्यूजियम में मिला स्थान
शस्य विज्ञान विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल में रखा देशी हल के आकार का बना बुंदेली पोरा नामक यंत्र आकर्षण का केंद्र रहा। यह यंत्र विभागाध्यक्ष डा. अवनीश त्रिपाठी द्वारा बनाया गया है। यह जानकारी देते हुए छात्र मो. आकिल ने बताया कि यह यंत्र देशी हल की तरह है, लेकिन इसमें दो अलग-अलग कीपों व नली को ऐस तरीके से लगाया गया है, जिससे हल से खेत जोतते समय ही खाद और बीच को भी डाला जा सकता है। इससे किसान को कम मेहनत करनी पड़ेगी और यह सफल भी है। इस यंत्र को मुंबई में आयोजित प्रदर्शनी में चुना गया था और इसे बनाने वाले डा. अवनीश त्रिपाठी को सम्मानित भी किया गया था। वर्तमान में उनका मॉडल कोलकत्ता स्थित नेशनल ऑफ साइंस म्यजियम में रखा हुआ है। स्टाफ में रखा यह मॉडल उसी आधार पर बच्चों के द्वारा तैयार किया गया है।
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महिलाओं को भाया गृह विज्ञान का स्टाल
महाविद्यालय परिसर में लगा गृह विज्ञान विभाग का स्टाल समारोह में आने वाली महिलाओं व युवतियों के मन को काफी भा रहा है। यहां पर विभागाध्यक्ष ऋचा सक्सेना व कविता सिंह के संरक्षण में छात्राओं ने बहुत ही आकर्षित मॉडल प्रस्तुत किए हैं। यहां पर मॉडल के रूप में रखे घरेलू साज सज्जा व दैनिक उपयोगी सामनों को अखबार, नैपकिन पेपर, टीशू पेपर, पुरानी चूड़ियों, पुराने कपड़े आदि फालतू पड़े समान के माध्यम से बनाया गया है। घर में रखे समान को किस तरह से उपयोग में लाया जा सकता है और उसको आकर्षित बनाया जा सकता है, यह भली भांति दर्शाया गया है। इसमें भारती रैकवार, कामनी सिंह, श्रद्घा, राधिका रावत, राखी वर्मा आदि छात्राओं को सहयोग रहा।