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मोर मोटर से भव्यता में बदली भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:43 AM IST
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चांदी की झाड़ू से होगी रथयात्रा मार्ग की सफाई
ललितपुर।
पच्चीस वर्ष पूर्व मोर मोटर से शुरु हुई भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा आज पुरी की तर्ज पर भव्यता में तब्दील हो गई है। तीन वर्ष पूर्व भगवान की रथ यात्रा के लिए लकड़ी के तीन आकर्षक रथों का निर्माण कराया गया था। नगर में आस्था का केंद्र रथयात्रा को सफल बनाने के लिए समिति तैयारियों में जुट गई है। 25 जून को विशेष आकर्षण और भव्यता के साथ भगवान जगन्नाथजी की 25 वीं रथयात्रा निकाली जाएगी। जगन्नाथपुरी में सोने की झाड़ू से जगन्नाथ रथयात्रा के मार्ग की सफाई की जाती है। इसी तर्ज पर इस वर्ष मंदिर समिति द्वारा ललितपुर में भी रथयात्रा के दौरान चांदी की झाड़ू से सफाई की योजना तैयार की है।
नगर में स्थानीय घंटाघर के पास श्री जगदीश मंदिर की स्थापना संवत 1801 में हुंडैत परिवार द्वारा की गई थी। कहा जाता है कि उस समय शहर में गिने चुने मंदिर होने के कारण भगवान राम-जानकी के दर्शन के लिए हुंडैत परिवार एक मंदिर में जाया करते थे। एक बार जब इस परिवार की जिया नाम की महिला सदस्य भगवान रामजानकी के दर्शनों को मंदिर पहुंचीं, जहां पहुंचने में उन्हें कुछ देर हो गई, तो उस समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए और उन्हें भगवान के दर्शन किए ही बिना लौटना पड़ा, इस पर उन्होंने वहीं प्रण ले लिया कि जब तक वह इससे भी डेढ़ गुना बड़ा मंदिर नहीं बनवा लेती तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। उसी समय उनके परिवार के घर बनाने का काम भी चल रहा था। परिवार के सदस्यों को यह बात पता चलने पर मकान बनाने की सामग्री और कारीगरों को उसी समय मंदिर निर्माण में लगा दिया गया। तब कहीं जाकर जिया ने प्रतिज्ञा पूरी होने पर अन्न ग्रहण किया और आज यही भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर नगर का मुख्य आस्था का केंद्र बन चुका है। तीन मार्च 1949 को जगदीश मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की गई। कुछ समय तक मंदिर की देखरेख स्व.रामचरन हुंडैत, परमेश्वरी हुंडैत व उमानंद हुंडैत द्वारा की जाती रही। ट्रस्ट बनने में अध्यक्ष गोविंददास हुंडैत और मंत्री रामविलास हुंडैत रहे। चंद्रविनोद हुंडैत ने बताया कि ट्रस्ट की आय से ही मंदिर के जीर्णोद्धार से लेकर तमाम व्यवस्थाएं की जाती रहीं हैं। 19 नबंवर वर्ष 1986 में कांचीकोटि पीठाधीश्वर जगदगुरु शंणरार्चा जयेंद्र सरस्वतीजी महाराज द्वारा मंदिर के मुख्य द्वार का शिलान्यास और रामविलास हुंडैत द्वारा भूमि पूजन किया गया था। इसके बाद 14 जुलाई वर्ष 1992 को पहली बार जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत की गई। इसके बाद यह मंदिर की परंपरा में शामिल हो गई, जो आज भी लगातार जारी है। पहली बार रथयात्रा के लिए तीन मोर मोटर में भगवान को विराजमान कर नगर में शोभायात्रा निकली। मंदिर के साथ ही रथयात्रा की भव्यता भी लगातार बढ़ती गई। इसके चलते आज यह रथयात्रा हुंडैत परिवार से सामाजिक स्वरुप में परिवर्तित हो गई। इसके चलते मंदिर समिति से हटकर रथयात्रा समिति में परिवार से अलग भी कई लोगों को पदाधिकारी बनाया गया है। शहर के रामेश्वर सड़ैया अध्यक्ष और रामगोपाल नामदेव मंत्री हैं। अब इस वर्ष शहर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की 25वीं रजत जयंती के रुप में मनाई जा रही है, इसे लेकर जगदीश मंदिर समिति, रथयात्रा समिति के पदाधिकारियों साथ ही हुंडैत परिवार की जोरशोर से तैयारियों में जुटा हुआ है। यह रथ यात्रा 25 जून यानि रविवार को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा नगर में श्रद्घा व उत्साह के साथ निकाली जाएगी। इसके लिए समिति के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हुए हैं। भगवान के तीन रथों को भव्यता प्रदान करने में कारीगर लगे हुए हैं। रंगाई पुताई व साजसज्जा का कार्य चल रहा है।
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पुरी से मंगाई थीं भगवान की मूर्तियां
ललितपुर। जगन्नाथ पुरी में भगवान की मूर्तियों को हर बारह वर्ष में बदलकर नवीन प्रतिमाएं विराजमान करने की परंपरा है, इसी तर्ज पर ललितपुर में भी जगदीश मंदिर समिति द्वारा पुरानी मूर्तियों को विसर्जित कर नवीन मूर्तियों की स्थापना वर्ष 2009 में की गई। यही नहीं हर वर्ष रथयात्रा के लिए मंदिर समिति द्वारा भगवान की नई पोशाकों को तीर्थ स्थलों से मंगाया जाता है। इस वर्ष वृंदावन से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पोशाकें मंगाई गई हैं।
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यह रहेंगे रथयात्रा के आकर्षण
ललितपुर। भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इस वर्ष जबलपुर का तहलका धमाल बैंड, बधाई नृत्य, कृष्णा लोककला मंडल का प्रसिद्घ बरेदी नृत्य, राधाकृष्ण का महारास, मयूर नृत्य, बरसाने की होली, उज्जैन महाकाल दरबार के ढोल-ताशों की धमक, भयंकर गर्जना करने वाली तोप, मालवा राज्य की विशालकाय तोप जो 500 मीटर तक फूलों की बारिश करेगी मुख्य आकर्षण रहेंगे।
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भगवान को लगेगा छप्पन भोग
ललितपुर। श्रीराधा विट्ठल सेवार्थ समिति के तत्वावधान में भक्तों के सहयोग से रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ जी को विशेष भात के साथ ही छप्पन प्रकार का भोग लगाया जाएगा।
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रथयात्रा में नहीं लिया जाता दान
ललितपुर। शहर में भगवान जगदीश मंदिर समिति ट्रस्ट की आय से ही मंदिर की देखरेख और भगवान जगन्नाथ रथयात्रा पर व्यय करती है। रथयात्रा के लिए किसी से भी किसी प्रकार का दान नहीं लिया जाता है।