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गल्ला मंडी में नियमित नहीं होती डाक
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गल्ला मंडी में नियमित नहीं होती डाक
महरौनी। गल्ला मंडी में किसानों को अनाज रखने व नीलामी कराए जाने के लिए दो बड़े-बड़े चबूतरों का निर्माण कराया गया है, लेकिन इन पर व्यापारियों का कब्जा होने के कारण किसान वहां अनाज नहीं रख पाते हैं। मजबूरन उन्हें कड़ी धूप में खड़े रहकर अपना अनाज बेचना पड़ता है।
गल्ला मंडी में नियमित डाक नहीं होती है। व्यापारी की मंशा नहीं होती है कि डाक बुलवाई जाए, अगर कोई किसान इस परंपरा को तोड़कर अपने अनाज की डाक कराना चाहता है तो किसान को मंडी कर्मचारियों को सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद मंडी कर्मचारी आकर व्यापारियों को बुलाते हैं और घंटों बाद व्यापारी जुड़ते हैं तो नीलामी में रुचि नहीं लेते। इस कारण बाजार भाव से भी कम में डाक टूट जाती है, इसका खामियाजा किसान को भुगतना पड़ता है। वह अपने आप को ठगा सा महसूस कर मन मसोस कर चला जाता है। उसे अनाज का वाजिब दाम नहीं मिलता है।
गल्ला मंडी में किसानों को अनाज रखने व नीलामी कराने के लिए बनाए चबूतरों पर व्यापारियों का माल रखा हुआ है। नीलामी चबूतरा पर व्यापारियों ने वर्षों से कब्जा कर रखा है। यहां तक की बंटवारा में जगह तक तय की गई है। इस कारण किसानों को अनाज रखने के लिए जगह नहीं मिलती है। ऐसे में ट्रैक्टर में ही किसान अपने अनाज को रखने को मजबूर है। किसान अपने अनाज को मंडी परिसर में ले जाकर ट्रैक्टर सड़क पर खड़ा कर देता है। वह बेचने के लिए लाए अनाज की बानगी लेकर व्यापारियों के पास जाकर चक्कर लगाता है। अनाज की बानगी दिखाकर व्यापारी से भाव बताने और लेने की अनुनय विनय करता है। व्यापारी भाव बताने से कतराते हैं और दूसरे व्यापारी ने क्या भाव बताया पूछते है। व्यापारी के मन के भाव बताने पर ही किसान अनाज बेच पाता है।
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माल रखने की नहीं पर्याप्त जगह
मंडी में दुकानें सी टाइप में आवंटित की गई हैं, जिनमें माल रखने की क्षमता लगभग 100 क्विंटल की है। ऐसी स्थित में व्यापारी के पास खरीदे गए माल को प्लेटफार्म पर रखने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
दो हैंडपंप खराब
गल्ला मंडी परिसर में कुल पांच हैंडपंप लगे हैं। इसमें से दो खराब पड़े हैं। पीने के पानी के लिए दो पानी की टंकी बनी हुई हैं, जिसमें एक खराब है। हैंडपंप खराब रहने से मंडी में आने वाले किसानों और भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए मंडी समिति द्वारा तीन जगह मटके रखे हैं।
गल्ला मंडी नीलामी के लिए प्लेटफॉर्म खाली नहीं है। बरसात में मेरा गेहूं भीग रहा है। अगर नीलामी चबूतरा खाली होता तो गेहूं भीगने से बच जाता।
- किसान, मूरत सिंह
ग्राम मिदरबाहा
गल्ला मंडी में क्या गड़बड़ियां चल रही हैं, अभी मुझे इसकी जानकारी नहीं है। नीलामी चबूतरा की जांच कराएंगे, इसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।
- ज्ञानेश्वर प्रसाद, उपजिलाधिकारी महरौनी
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महरौनी। गल्ला मंडी में किसानों को अनाज रखने व नीलामी कराए जाने के लिए दो बड़े-बड़े चबूतरों का निर्माण कराया गया है, लेकिन इन पर व्यापारियों का कब्जा होने के कारण किसान वहां अनाज नहीं रख पाते हैं। मजबूरन उन्हें कड़ी धूप में खड़े रहकर अपना अनाज बेचना पड़ता है।
गल्ला मंडी में नियमित डाक नहीं होती है। व्यापारी की मंशा नहीं होती है कि डाक बुलवाई जाए, अगर कोई किसान इस परंपरा को तोड़कर अपने अनाज की डाक कराना चाहता है तो किसान को मंडी कर्मचारियों को सूचना देनी पड़ती है। इसके बाद मंडी कर्मचारी आकर व्यापारियों को बुलाते हैं और घंटों बाद व्यापारी जुड़ते हैं तो नीलामी में रुचि नहीं लेते। इस कारण बाजार भाव से भी कम में डाक टूट जाती है, इसका खामियाजा किसान को भुगतना पड़ता है। वह अपने आप को ठगा सा महसूस कर मन मसोस कर चला जाता है। उसे अनाज का वाजिब दाम नहीं मिलता है।
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गल्ला मंडी में किसानों को अनाज रखने व नीलामी कराने के लिए बनाए चबूतरों पर व्यापारियों का माल रखा हुआ है। नीलामी चबूतरा पर व्यापारियों ने वर्षों से कब्जा कर रखा है। यहां तक की बंटवारा में जगह तक तय की गई है। इस कारण किसानों को अनाज रखने के लिए जगह नहीं मिलती है। ऐसे में ट्रैक्टर में ही किसान अपने अनाज को रखने को मजबूर है। किसान अपने अनाज को मंडी परिसर में ले जाकर ट्रैक्टर सड़क पर खड़ा कर देता है। वह बेचने के लिए लाए अनाज की बानगी लेकर व्यापारियों के पास जाकर चक्कर लगाता है। अनाज की बानगी दिखाकर व्यापारी से भाव बताने और लेने की अनुनय विनय करता है। व्यापारी भाव बताने से कतराते हैं और दूसरे व्यापारी ने क्या भाव बताया पूछते है। व्यापारी के मन के भाव बताने पर ही किसान अनाज बेच पाता है।
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माल रखने की नहीं पर्याप्त जगह
मंडी में दुकानें सी टाइप में आवंटित की गई हैं, जिनमें माल रखने की क्षमता लगभग 100 क्विंटल की है। ऐसी स्थित में व्यापारी के पास खरीदे गए माल को प्लेटफार्म पर रखने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
दो हैंडपंप खराब
गल्ला मंडी परिसर में कुल पांच हैंडपंप लगे हैं। इसमें से दो खराब पड़े हैं। पीने के पानी के लिए दो पानी की टंकी बनी हुई हैं, जिसमें एक खराब है। हैंडपंप खराब रहने से मंडी में आने वाले किसानों और भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए मंडी समिति द्वारा तीन जगह मटके रखे हैं।
गल्ला मंडी नीलामी के लिए प्लेटफॉर्म खाली नहीं है। बरसात में मेरा गेहूं भीग रहा है। अगर नीलामी चबूतरा खाली होता तो गेहूं भीगने से बच जाता।
- किसान, मूरत सिंह
ग्राम मिदरबाहा
गल्ला मंडी में क्या गड़बड़ियां चल रही हैं, अभी मुझे इसकी जानकारी नहीं है। नीलामी चबूतरा की जांच कराएंगे, इसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।
- ज्ञानेश्वर प्रसाद, उपजिलाधिकारी महरौनी