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राधा का श्याम कहे या या मीरा का घनश्याम...
Updated Tue, 04 Sep 2018 02:05 AM IST
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राधा का श्याम कहे या या मीरा का घनश्याम...
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कवि सम्मेलन में बोले कवि
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर कौमी एकता का प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी, संगम के बैनर तले अंबेडकर पार्क के पास एक गार्डन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कृष्ण जन्म के लिए भारत में श्रद्धा का प्रतीक बताते हुए अपनी पंक्तियों के माध्यम से अपने ही अंदाज में कृष्ण जन्मोत्सव को मनाया। संस्था के अध्यक्ष व कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि ऐसी मिसाल कहां मिलेगी सारे जहां में, जेल भी इक तीर्थ है हिंदोस्तान में। वहीं, दूसरी पंक्ति में उन्होंने कहा कि मजहब जुदा सही वतन तो इक है यारो, धरती मां और अपना गगन तो इक है यारो। राधा का श्याम कहे या मीरा का घनश्याम, सूरऔररसखान का किशन तो इक है यारो। युवा शायरा पूनम रानीने कहा कि दुनिया ने बहुत कोशिश की हमें रुलाने की, मुरली वाले ने जिम्मेवारी ली हमें हंसाने की। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने कहा कि कृष्ण जन्म जब हुआ तीनों लोकों में उजाला हो जाता है, लेकिन जेल का हरेक पहरेदार सो जाता है। दशरथ प्रसाद पटेल परदेशी ने कहा कि कान्हा मत जाना मुझे छोड़ के। कवियित्री सुमनलता शर्मा चांदनी ने कहा कि जिंदगी से हम है सताए बहुत हैं, अपनों से हैं चोट खाए बहुत है। कवि किशन सिंह बंजारा ने कहा कि कंस के मरने का समय भी टल गया होता, काश साक्षरता अभियान द्वापर में चल गया होता। श्यामलाल श्याम ने कहा कि मन मंदिर का तूं पट खोल, जै जै राधा श्याम हरि बोल। केके पाठक ने कहा कि बहुत दिनों में मिलने आए मेरे सुदामा, कहां ठिकाना रहे बनाए, मेरे मित्र सुदामा। अशोक क्रांतिकारी ने कहा कि माखन बेचने निकलूं न घर से, न निकलूं यमुना जल को, नंद गांव का छोरा छेड़े, मुझ बरसाने की ग्वालन को। इस मौके पर शिखरचंद मुफलिस, एमएल भटनागर, काका ललितपुरी, सरवर हिंदोस्तानी, विनोद राठौर, कैलाश नारायण, अचल राठौर, नीतू , हेमलता, एकता, अनीता त्रिपाठी, रोमला, रिचा, आसमां, चमेली देवी आदि उपस्थित रहे।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कवि सम्मेलन में बोले कवि
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर कौमी एकता का प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी, संगम के बैनर तले अंबेडकर पार्क के पास एक गार्डन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कृष्ण जन्म के लिए भारत में श्रद्धा का प्रतीक बताते हुए अपनी पंक्तियों के माध्यम से अपने ही अंदाज में कृष्ण जन्मोत्सव को मनाया। संस्था के अध्यक्ष व कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने कहा कि ऐसी मिसाल कहां मिलेगी सारे जहां में, जेल भी इक तीर्थ है हिंदोस्तान में। वहीं, दूसरी पंक्ति में उन्होंने कहा कि मजहब जुदा सही वतन तो इक है यारो, धरती मां और अपना गगन तो इक है यारो। राधा का श्याम कहे या मीरा का घनश्याम, सूरऔररसखान का किशन तो इक है यारो। युवा शायरा पूनम रानीने कहा कि दुनिया ने बहुत कोशिश की हमें रुलाने की, मुरली वाले ने जिम्मेवारी ली हमें हंसाने की। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने कहा कि कृष्ण जन्म जब हुआ तीनों लोकों में उजाला हो जाता है, लेकिन जेल का हरेक पहरेदार सो जाता है। दशरथ प्रसाद पटेल परदेशी ने कहा कि कान्हा मत जाना मुझे छोड़ के। कवियित्री सुमनलता शर्मा चांदनी ने कहा कि जिंदगी से हम है सताए बहुत हैं, अपनों से हैं चोट खाए बहुत है। कवि किशन सिंह बंजारा ने कहा कि कंस के मरने का समय भी टल गया होता, काश साक्षरता अभियान द्वापर में चल गया होता। श्यामलाल श्याम ने कहा कि मन मंदिर का तूं पट खोल, जै जै राधा श्याम हरि बोल। केके पाठक ने कहा कि बहुत दिनों में मिलने आए मेरे सुदामा, कहां ठिकाना रहे बनाए, मेरे मित्र सुदामा। अशोक क्रांतिकारी ने कहा कि माखन बेचने निकलूं न घर से, न निकलूं यमुना जल को, नंद गांव का छोरा छेड़े, मुझ बरसाने की ग्वालन को। इस मौके पर शिखरचंद मुफलिस, एमएल भटनागर, काका ललितपुरी, सरवर हिंदोस्तानी, विनोद राठौर, कैलाश नारायण, अचल राठौर, नीतू , हेमलता, एकता, अनीता त्रिपाठी, रोमला, रिचा, आसमां, चमेली देवी आदि उपस्थित रहे।