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रक्षाबंधन त्योहार पर शहर की चरमराई यातायात व्यवस्था
Updated Mon, 27 Aug 2018 04:32 AM IST
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ललितपुर। रक्षाबंधन त्योहार पर शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। एक तरफ अतिक्रमण पसरा है तो दूसरी तरफ हाथ ठेला वालों को राखी बेचने की बीच सडक पर अनुमति दे दी गई। इससे घंटाघर के आसपास वाहन रेंगते नजर आए। यही नहीं, कई बार जाम जैसे हालात भी बने। इस पूरे मामले में विभागीय अफसर मौन हैं।
शहर की यातायात व्यवस्था पहले से ही खराब चल रही है। इसमें साइड पटरियों पर पसरा अतिक्रमण मुख्य वजह बना हुआ है। जिसे हटाने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आता है। जब भी अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान बनता है, उसके पहले ही वह दम तोड देता है। अब तो एक नई परंपरा बन गई है जब भी कोई त्योहार आता है तो घंटाघर के नीचे से लेकर जगदीश मंदिर के गेट तक बीच सडक पर हाथठेला पर दुकानें सज जाती हैं। इससे त्योहारों के दिनों में यातायात की परेशानी बढ जाती है। रक्षाबंधन त्योहार सबसे बडी संख्या में बहनें एवं भाई बाहरी जिलों से आए हैं। इससे शहर की सडकों पर वाहनों को दवाब बढ गया। जब वाहन इन संकरी सडकों से निकले तो जाम जैसे हालात बन गए। इससे लोगों को खासी परेशानी हुई। वहीं, परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगे पुलिस बल को इसे संभालने में पसीने छूट गए। इस मामले में जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन हैं, जिससे हर बार लोगों को चरमराई व्यवस्था से दोचार होना पडता है।
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शहर की यातायात व्यवस्था पहले से ही खराब चल रही है। इसमें साइड पटरियों पर पसरा अतिक्रमण मुख्य वजह बना हुआ है। जिसे हटाने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आता है। जब भी अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान बनता है, उसके पहले ही वह दम तोड देता है। अब तो एक नई परंपरा बन गई है जब भी कोई त्योहार आता है तो घंटाघर के नीचे से लेकर जगदीश मंदिर के गेट तक बीच सडक पर हाथठेला पर दुकानें सज जाती हैं। इससे त्योहारों के दिनों में यातायात की परेशानी बढ जाती है। रक्षाबंधन त्योहार सबसे बडी संख्या में बहनें एवं भाई बाहरी जिलों से आए हैं। इससे शहर की सडकों पर वाहनों को दवाब बढ गया। जब वाहन इन संकरी सडकों से निकले तो जाम जैसे हालात बन गए। इससे लोगों को खासी परेशानी हुई। वहीं, परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगे पुलिस बल को इसे संभालने में पसीने छूट गए। इस मामले में जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन हैं, जिससे हर बार लोगों को चरमराई व्यवस्था से दोचार होना पडता है।
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