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आंगनबाड़ी केंद्रों पर दर्ज लाभार्थी हो सकेंगे चिह्नित
Updated Thu, 03 May 2018 04:44 AM IST
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सूचना अपडेट होते ही फर्जी लाभार्थी पकड़े जाएंगे
आंगनबाड़ी केंद्रों पर दर्ज लाभार्थी हो सकेंगे चिह्नित
भारत सरकार के वेब पोर्टल पर लाभार्थियों का ब्योरा होगा ऑनलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर फर्जी नामांकन के आधार पर बच्चों के निवाला को हड़पने का खेल अब नहीं चल सकेगा। भारत सरकार ने फर्जी लाभार्थी चिह्नित करने के लिए एक वेब पोर्टल विकसित किया है। इसमें सूचनाएं अपडेट करते ही फर्जी लाभार्थी पकड़ में आ जाएंगे।
प्री स्कूल की शिक्षा प्रदान करने के मकसद से देश भर में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थी, तीन से छह वर्ष आयु के लाभार्थी को नामांकित किया जाता है। जहां इन बच्चों को खेल-खेल में प्री प्राइमरी की शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा उनके स्वास्थ्य की देखभाली करते हुए उन्हें पौष्टिक आहार वितरित किया जाता है। इसी तरह गर्भवती महिला, धात्री माताओं को भी पुष्टाहार बांटने का प्रावधान किया गया है। इस पुष्टाहार के दुरुपयोग की शिकायतें अक्सर प्राप्त होती हैं। इसके पीछे की वजह तमाम केंद्रों पर लाभार्थियों की संख्या वास्तविक से कहीं ज्यादा होना है। भारत सरकार ने इस तरह की शिकायतों से निपटने के लिए वेब पोर्टल विकसित किया है। जिसमें रैपिड रिपोर्टिग सिस्टम के माध्यम से यूजर मैनवल एवं छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आंगनबाड़ी सहायिकाओं की सूचना एक्सल सीट के निर्धारित प्रारूप पर आनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में बाल विकास सेवा और पुष्टाहार के निदेशक राजेंद्र कुमार सिंह ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि एमआईएस के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी की यूजर आईडी प्रदान की गई है। वह इससे वेबसाइट पर लॉगिन कर उसकी एक्सल सीट पर जाकर यूजर मैनवल एवं छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थियों, तीन से छह वर्ष आयु के लाभार्थियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आंगनबाड़ी सहायिकाओं की सूचना अपलोड कर सकते हैं। उन्होंने इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के लिए आगाह किया है।
कोड से पहचाना जा सकेगा पुष्टाहार
अब समूची बाल विकास परियोजना को कोड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसमें स्टेट से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कोड की संख्या तय कर ली गई है। स्टेट का कोड दो डिजिट का होगा। वहीं, जनपद, परियोजना, आंगनबाड़ी के कोड तीन-तीन डिजिट के होंगे। आने वाले समय में कोड का आवंटन आरंभ कर दिया जाएगा। जिससे पुष्टाहार किस जिले का है, उसकी आसानी से पहचान हो सकेगी।
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अपलोड कराई जा रही सूचनाएं
निदेशालय से प्राप्त पत्र में एक्सल सीट के निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं आनलाइन अपलोड करने के निर्देश हैं। जिस पर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
बच्चूलाल गुप्ता, सीडीपीओ नगर
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर दर्ज लाभार्थी हो सकेंगे चिह्नित
भारत सरकार के वेब पोर्टल पर लाभार्थियों का ब्योरा होगा ऑनलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर फर्जी नामांकन के आधार पर बच्चों के निवाला को हड़पने का खेल अब नहीं चल सकेगा। भारत सरकार ने फर्जी लाभार्थी चिह्नित करने के लिए एक वेब पोर्टल विकसित किया है। इसमें सूचनाएं अपडेट करते ही फर्जी लाभार्थी पकड़ में आ जाएंगे।
प्री स्कूल की शिक्षा प्रदान करने के मकसद से देश भर में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थी, तीन से छह वर्ष आयु के लाभार्थी को नामांकित किया जाता है। जहां इन बच्चों को खेल-खेल में प्री प्राइमरी की शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अलावा उनके स्वास्थ्य की देखभाली करते हुए उन्हें पौष्टिक आहार वितरित किया जाता है। इसी तरह गर्भवती महिला, धात्री माताओं को भी पुष्टाहार बांटने का प्रावधान किया गया है। इस पुष्टाहार के दुरुपयोग की शिकायतें अक्सर प्राप्त होती हैं। इसके पीछे की वजह तमाम केंद्रों पर लाभार्थियों की संख्या वास्तविक से कहीं ज्यादा होना है। भारत सरकार ने इस तरह की शिकायतों से निपटने के लिए वेब पोर्टल विकसित किया है। जिसमें रैपिड रिपोर्टिग सिस्टम के माध्यम से यूजर मैनवल एवं छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आंगनबाड़ी सहायिकाओं की सूचना एक्सल सीट के निर्धारित प्रारूप पर आनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में बाल विकास सेवा और पुष्टाहार के निदेशक राजेंद्र कुमार सिंह ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि एमआईएस के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी की यूजर आईडी प्रदान की गई है। वह इससे वेबसाइट पर लॉगिन कर उसकी एक्सल सीट पर जाकर यूजर मैनवल एवं छह माह से तीन वर्ष के लाभार्थियों, तीन से छह वर्ष आयु के लाभार्थियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं आंगनबाड़ी सहायिकाओं की सूचना अपलोड कर सकते हैं। उन्होंने इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के लिए आगाह किया है।
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कोड से पहचाना जा सकेगा पुष्टाहार
अब समूची बाल विकास परियोजना को कोड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसमें स्टेट से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कोड की संख्या तय कर ली गई है। स्टेट का कोड दो डिजिट का होगा। वहीं, जनपद, परियोजना, आंगनबाड़ी के कोड तीन-तीन डिजिट के होंगे। आने वाले समय में कोड का आवंटन आरंभ कर दिया जाएगा। जिससे पुष्टाहार किस जिले का है, उसकी आसानी से पहचान हो सकेगी।
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अपलोड कराई जा रही सूचनाएं
निदेशालय से प्राप्त पत्र में एक्सल सीट के निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं आनलाइन अपलोड करने के निर्देश हैं। जिस पर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
बच्चूलाल गुप्ता, सीडीपीओ नगर