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मजाक साबित हो रहा आईजीआरएस का निस्तारण
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मजाक साबित हो रहा आईजीआरएस का निस्तारण
ललितपुर। जिले के अधिकारी आईजीआरएस निस्तारण में सौ फीसदी अंक लेकर भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। कई मामलों में शिकायतकर्ता की शिकायत की अनदेखी कर दी गई और उन्हें निस्तारित दर्शा दिया गया है। ऐसा ही एक मामला पुलिस के मामले में उजागर हुआ है। इसमें पीड़ित ने सत्रह बार ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका। अब पीड़ित ने केंद्रीय मंत्री को शिकायत भेजकर आत्महत्या करने की धमकी दी है।
लोगों को तेजी से न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज होते ही इसके निस्तारण की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। इसकी सूचना पीड़ित भेजी जाती है। इसके निस्तारण के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन लगातार अव्वल बने हुए हैं। इससे जिले के अधिकारियों की साख पूरे प्रदेश में बन रही है। पिछले कुछ महीनों से इसके निस्तारण पर अंगुलियां उठने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला पुलिस का उजागर हुआ है।
थाना जखौरा अंतर्गत ग्राम बूचा निवासी राजू रजक ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री भारत सरकार को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसके पिता का विवाद विपक्षियों से चल रहा है। 27 फरवरी 2019 को विपक्षियों ने राजीनामा नहीं करने पर नहर का पानी बंद कर दिया था। इसी दिन थाने में राजानामा करवा दिया गया है। 28 फरवरी को अपर पुलिस अधीक्षक को इसकी शिकायत की तो इसमें जांच अधिकारी नामित कर दिया गया। इसके बाद भी विपक्षियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसकी सत्रह बार ऑनलाइन शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका है। उसने चेतावनी दी कि वह ऐसी स्थिति में आत्महत्या के लिए मजबूर हो सकता है।
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इसी तरह बेसिक शिक्षा का भी एक उदाहरण है। 12 अप्रैल 2018 को सह समन्वयक संघ के पूर्व प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि सचिव के शासनादेश दिसंबर 16 के क्रम में जनपद में 4 जनवरी 17 को विज्ञप्ति प्रकाशित कर ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में शिक्षकों के समायोजन के संबंध में आवेदन मांगे गए थे। जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके निस्तारण में दर्शाया गया है कि इस स्तर की कोई भी कार्रवाई गतिमान नहीं है, जबकि शासनादेश के क्रम में विज्ञप्ति प्रकाशित हुई थी और आवेदन मांगे गए। विभाग ने उस प्रक्रिया को आज तक शून्य घोषित नहीं किया गया है। अब बार-बार यह फोन आते हैं कि शिकायत के निस्तारण से संतुष्ट हैं। वह हर बार कह देते हैं कि वह निस्तारण से संतुष्ट नहीं हैं, फिर भी कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने न्यायालय में जाने की धमकी है।
ब्लाक मड़ावरा अंतर्गत ग्राम पंचायत रनगांव निवासी श्रीराम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की शिकायत की। इस पर ग्राम पंचायत अधिकारी ज्योति स्वरूप शर्मा ने निस्तारण में दर्शाया कि श्रीराम का नाम एलओबी सूची में चयनित नहीं है। एसबीएम की धनराशि प्राप्त होते ही शौचालय बनवा दिया जाएगा। इसी मामले की दूसरी आईजीआरएस के निस्तारण में बताया कि शिकायतकर्ता का नाम एलओबी सूची में चयनित है। धनराशि प्राप्त होते ही शिकायतकर्ता का शौचालय बनवा दिया जाएगा। मड़ावरा के अजीज मोहम्मद का आरोप है कि आईजीआरएस निस्तारण में दो फर्जी गवाह दर्शाकर मामले को खत्म कर दिया गया।
शिकायतकर्ता राजू रजक के आरोप गलत हैं। पुलिस ने गहन छानबीन कर कार्रवाई की है।
- विवेक कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी पुलिस, तालबेहट
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ललितपुर। जिले के अधिकारी आईजीआरएस निस्तारण में सौ फीसदी अंक लेकर भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। कई मामलों में शिकायतकर्ता की शिकायत की अनदेखी कर दी गई और उन्हें निस्तारित दर्शा दिया गया है। ऐसा ही एक मामला पुलिस के मामले में उजागर हुआ है। इसमें पीड़ित ने सत्रह बार ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका। अब पीड़ित ने केंद्रीय मंत्री को शिकायत भेजकर आत्महत्या करने की धमकी दी है।
लोगों को तेजी से न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज होते ही इसके निस्तारण की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है। इसकी सूचना पीड़ित भेजी जाती है। इसके निस्तारण के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन लगातार अव्वल बने हुए हैं। इससे जिले के अधिकारियों की साख पूरे प्रदेश में बन रही है। पिछले कुछ महीनों से इसके निस्तारण पर अंगुलियां उठने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला पुलिस का उजागर हुआ है।
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थाना जखौरा अंतर्गत ग्राम बूचा निवासी राजू रजक ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री भारत सरकार को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसके पिता का विवाद विपक्षियों से चल रहा है। 27 फरवरी 2019 को विपक्षियों ने राजीनामा नहीं करने पर नहर का पानी बंद कर दिया था। इसी दिन थाने में राजानामा करवा दिया गया है। 28 फरवरी को अपर पुलिस अधीक्षक को इसकी शिकायत की तो इसमें जांच अधिकारी नामित कर दिया गया। इसके बाद भी विपक्षियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसकी सत्रह बार ऑनलाइन शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका है। उसने चेतावनी दी कि वह ऐसी स्थिति में आत्महत्या के लिए मजबूर हो सकता है।
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इसी तरह बेसिक शिक्षा का भी एक उदाहरण है। 12 अप्रैल 2018 को सह समन्वयक संघ के पूर्व प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि सचिव के शासनादेश दिसंबर 16 के क्रम में जनपद में 4 जनवरी 17 को विज्ञप्ति प्रकाशित कर ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में शिक्षकों के समायोजन के संबंध में आवेदन मांगे गए थे। जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके निस्तारण में दर्शाया गया है कि इस स्तर की कोई भी कार्रवाई गतिमान नहीं है, जबकि शासनादेश के क्रम में विज्ञप्ति प्रकाशित हुई थी और आवेदन मांगे गए। विभाग ने उस प्रक्रिया को आज तक शून्य घोषित नहीं किया गया है। अब बार-बार यह फोन आते हैं कि शिकायत के निस्तारण से संतुष्ट हैं। वह हर बार कह देते हैं कि वह निस्तारण से संतुष्ट नहीं हैं, फिर भी कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने न्यायालय में जाने की धमकी है।
ब्लाक मड़ावरा अंतर्गत ग्राम पंचायत रनगांव निवासी श्रीराम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की शिकायत की। इस पर ग्राम पंचायत अधिकारी ज्योति स्वरूप शर्मा ने निस्तारण में दर्शाया कि श्रीराम का नाम एलओबी सूची में चयनित नहीं है। एसबीएम की धनराशि प्राप्त होते ही शौचालय बनवा दिया जाएगा। इसी मामले की दूसरी आईजीआरएस के निस्तारण में बताया कि शिकायतकर्ता का नाम एलओबी सूची में चयनित है। धनराशि प्राप्त होते ही शिकायतकर्ता का शौचालय बनवा दिया जाएगा। मड़ावरा के अजीज मोहम्मद का आरोप है कि आईजीआरएस निस्तारण में दो फर्जी गवाह दर्शाकर मामले को खत्म कर दिया गया।
शिकायतकर्ता राजू रजक के आरोप गलत हैं। पुलिस ने गहन छानबीन कर कार्रवाई की है।
- विवेक कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी पुलिस, तालबेहट