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बचे खुचे भोजन को खुले में फेंका तो होगी दंडात्मक कार्रवाई: डीएम
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बचे भोजन को खुले में फेंका तो होगी दंडात्मक कार्रवाई: डीएम
ललितपुर। कुछ दिन पूर्व डोड़ाघाट में आधा दर्जन से ज्यादा गोवंश की मृत्यु होने की घटना के बाद जिला प्रशासन ने होटल संचालकों और विवाहघर मालिकों पर विभागीय शिकंजा कस दिया है। शनिवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने बैठक कर होटल संचालक और विवाह घर मालिकों को दिशा-निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कुछ दिन पूर्व खुले में पड़े भोजन के उपभोग से गौवंश के मृत होने की घटना को संज्ञान में लेते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को निर्देशित किया कि वे ऐसे होटल संचालकों का चिन्हीकरण करें, जो अवशेष भोजन को खुले में फेंक देते हैं। जिन विवाहघरों में कार्यक्रम के पश्चात अवशेष भोजन बचता है और वह खराब हो तो उसे जमीन में गड्ढा खोदकर डाल दें। खाने योग्य भोजन होने पर उसे गरीबों में तत्काल वितरित करा दें। पूड़ियों को सुखाकर उनका प्रयोग गोवंश के भोजन में किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति वैवाहिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के प्लेट आदि का उपयोग करता है तो उसकी सूचना तुरन्त दी जाए। इस मौके पर जनपद के कुल 16 विवाहघर संचालक और होटल मालिक उपस्थित रहे। होटल संचालकों और विवाहघर मालिकों को निर्देश दिये गए कि वह विवाह घरों में होने वाले सामूहिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के प्लेट एवं गिलास के प्रयोग पर रोक लगाएं एवं थर्माकॉल के प्लेट्स, गिलास आदि के प्रयोग को भी प्रतिबंधित किया जाए। प्लास्टिक के स्थान पर मिट्टी से बने हुए कुल्लड़ों का प्रयोग किया जाए। उन्होंने खुले में अवशेष भोजन फेंकने वाले होटल संचालकों को चिह्नित करने के निर्देश भी दिए।
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ललितपुर। कुछ दिन पूर्व डोड़ाघाट में आधा दर्जन से ज्यादा गोवंश की मृत्यु होने की घटना के बाद जिला प्रशासन ने होटल संचालकों और विवाहघर मालिकों पर विभागीय शिकंजा कस दिया है। शनिवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने बैठक कर होटल संचालक और विवाह घर मालिकों को दिशा-निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कुछ दिन पूर्व खुले में पड़े भोजन के उपभोग से गौवंश के मृत होने की घटना को संज्ञान में लेते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को निर्देशित किया कि वे ऐसे होटल संचालकों का चिन्हीकरण करें, जो अवशेष भोजन को खुले में फेंक देते हैं। जिन विवाहघरों में कार्यक्रम के पश्चात अवशेष भोजन बचता है और वह खराब हो तो उसे जमीन में गड्ढा खोदकर डाल दें। खाने योग्य भोजन होने पर उसे गरीबों में तत्काल वितरित करा दें। पूड़ियों को सुखाकर उनका प्रयोग गोवंश के भोजन में किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति वैवाहिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के प्लेट आदि का उपयोग करता है तो उसकी सूचना तुरन्त दी जाए। इस मौके पर जनपद के कुल 16 विवाहघर संचालक और होटल मालिक उपस्थित रहे। होटल संचालकों और विवाहघर मालिकों को निर्देश दिये गए कि वह विवाह घरों में होने वाले सामूहिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के प्लेट एवं गिलास के प्रयोग पर रोक लगाएं एवं थर्माकॉल के प्लेट्स, गिलास आदि के प्रयोग को भी प्रतिबंधित किया जाए। प्लास्टिक के स्थान पर मिट्टी से बने हुए कुल्लड़ों का प्रयोग किया जाए। उन्होंने खुले में अवशेष भोजन फेंकने वाले होटल संचालकों को चिह्नित करने के निर्देश भी दिए।
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