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हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र
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हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों पर हुई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जय बुंदेलखंड कॉलेज ऑफ लॉ में आयोजित कार्यशाला में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों में सर्वोच्च बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र है।कालेज में शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन करने की स्वतंत्रता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है शीर्षक पर एक व्याख्यान माला एवं मौलिक अधिकारों व उनके स्थगन के संबंध में परिचर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का स्थान मौलिक अधिकारों में सर्वोच्च माना जाता है। इस अधिकार के अभाव में मनुष्य के लिए अपने व्यक्तित्व का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता भारत के नागरिकों को प्राप्त है। संस्थान के प्राचार्य डॉ दिनेश बाबू गौतम द्वारा कार्यशाला में शांतिपूर्वक न्याय और सम्मेलन करने की स्वतंत्रता एवं भूख हड़ताल के अधिकार को अधिकार के रूप में बताया। इसका स्थगन केवल आपातकाल के समय ही विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है। कर्मचारी संघ बनाकर अपनी मांग कर सकते हैं। मूल वेतन व प्रकाश यातायात साधनों को उपलब्ध कराने कराने तथा उनकी वृद्धि करने के संबंध में उनकी मांग स्वीकार न किए जाने पर हड़ताल पर जा सकते हैं। हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र है। उच्चतम न्यायालय द्वारा कामेश्वर सिंह बनाम बिहार राज्य के मामले में भी कहा गया कि हड़ताल करना मौलिक अधिकार नहीं है, एक विधिक अधिकार है। हड़ताल प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक माध्यम है। फिर भी यदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं उक्त स्वतंत्रताओं जो संविधान में प्रदत्त हैं। इनका प्रयोग विधि सम्मत तरीके से कर सकते हैं। इस अवसर पर कालेज के सहायक प्रोफेसर अरविंद सिंह, श्री राम प्रसाद कुशवाहा रूपेश साहू, महेंद्र प्रताप सिंह सुजान सिंह कुशवाहा, मोहम्मद आसिफ, काजल चौहान सहित कई छात्र उपस्थित रहे। संचालन प्रशासनिक अधिकारी राम नारायण मिश्र ने किया।
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों पर हुई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जय बुंदेलखंड कॉलेज ऑफ लॉ में आयोजित कार्यशाला में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों में सर्वोच्च बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र है।कालेज में शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन करने की स्वतंत्रता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है शीर्षक पर एक व्याख्यान माला एवं मौलिक अधिकारों व उनके स्थगन के संबंध में परिचर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का स्थान मौलिक अधिकारों में सर्वोच्च माना जाता है। इस अधिकार के अभाव में मनुष्य के लिए अपने व्यक्तित्व का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता भारत के नागरिकों को प्राप्त है। संस्थान के प्राचार्य डॉ दिनेश बाबू गौतम द्वारा कार्यशाला में शांतिपूर्वक न्याय और सम्मेलन करने की स्वतंत्रता एवं भूख हड़ताल के अधिकार को अधिकार के रूप में बताया। इसका स्थगन केवल आपातकाल के समय ही विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है। कर्मचारी संघ बनाकर अपनी मांग कर सकते हैं। मूल वेतन व प्रकाश यातायात साधनों को उपलब्ध कराने कराने तथा उनकी वृद्धि करने के संबंध में उनकी मांग स्वीकार न किए जाने पर हड़ताल पर जा सकते हैं। हड़ताल कर्मचारियों का अंतिम शस्त्र है। उच्चतम न्यायालय द्वारा कामेश्वर सिंह बनाम बिहार राज्य के मामले में भी कहा गया कि हड़ताल करना मौलिक अधिकार नहीं है, एक विधिक अधिकार है। हड़ताल प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक माध्यम है। फिर भी यदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं उक्त स्वतंत्रताओं जो संविधान में प्रदत्त हैं। इनका प्रयोग विधि सम्मत तरीके से कर सकते हैं। इस अवसर पर कालेज के सहायक प्रोफेसर अरविंद सिंह, श्री राम प्रसाद कुशवाहा रूपेश साहू, महेंद्र प्रताप सिंह सुजान सिंह कुशवाहा, मोहम्मद आसिफ, काजल चौहान सहित कई छात्र उपस्थित रहे। संचालन प्रशासनिक अधिकारी राम नारायण मिश्र ने किया।
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