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अतिक्रमण की चपेट में शहर के पार्क
Updated Sat, 22 Sep 2018 05:32 AM IST
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अतिक्रमण की चपेट में शहर के पार्क
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के अधिकांश पार्क नगरपालिका की उदासीनता के शिकार हो रहे हैं, न तो इनके रखरखाव पर और न ही इन्हें अतिक्रमणमुक्त रखने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद पार्क तो अतिक्रमण के कारण दूर से दिखाई ही नहीं देता है। यही हाल महाराजा अग्रसेन पार्क का है। इसके बाद भी पालिका कर्मी उदासीन बने हुए हैं।
तत्कालीन पालिकाध्यक्षों के कार्यकाल में शहर के अंदर विभिन्न जगहों पर करीब एक दर्जन पार्क बनाए गए हैं। अमृत योजना में भी पार्कों का निर्माण कराया जा रहा है। एक दर्जन पार्क होने के बाद भी नागरिकों को पार्कों में बैठने की समस्या रहती है। जहां जेल चौराहे पर कांशीराम पार्क का रखरखाव नहीं होने से इसकी हालत खराब हो गई है। यहां जानवर विचरण करते हैं तो बच्चे क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं। नझाई बाजार स्वामी विवेकानंद पार्क पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है। यह दूर से नजर नहीं आता है। इसके अलावा इसकी साफ सफाई पर भी किसी का ध्यान नहीं है। पुराने एलआईसी भवन के बगल में बने महाराजा अग्रसेन पार्क व इससे चंद कदम की दूरी पर बने चिंतन पार्क में बैठने के लिए बैंच तक नहीं है। चिंतन पार्क में तो घास उग आई है। इस पार्क में वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानचंद अलया की प्रतिमा लगी हुई है। नगर संसाधन केंद्र के पास बने पार्क भी उदासीनता का शिकार है। नागरिकों का कहना है कि पालिका नए पार्को के निर्माण में लगी है लेकिन पुराने की देखरेख में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। जिससे पार्को का निर्माण फिजूलखर्ची साबित हो रहा है। जब कभी इसकी शिकायत की जाती है तो एक दो दिन पार्को की सफाई हो जाती है, इसके बाद उसे अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। उधर, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार का कहना है कि पार्क नियमित खोले जा रहे हैं। यदि अतिक्रमण है तो उसे हटवाया जाएगा।
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के अधिकांश पार्क नगरपालिका की उदासीनता के शिकार हो रहे हैं, न तो इनके रखरखाव पर और न ही इन्हें अतिक्रमणमुक्त रखने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद पार्क तो अतिक्रमण के कारण दूर से दिखाई ही नहीं देता है। यही हाल महाराजा अग्रसेन पार्क का है। इसके बाद भी पालिका कर्मी उदासीन बने हुए हैं।
तत्कालीन पालिकाध्यक्षों के कार्यकाल में शहर के अंदर विभिन्न जगहों पर करीब एक दर्जन पार्क बनाए गए हैं। अमृत योजना में भी पार्कों का निर्माण कराया जा रहा है। एक दर्जन पार्क होने के बाद भी नागरिकों को पार्कों में बैठने की समस्या रहती है। जहां जेल चौराहे पर कांशीराम पार्क का रखरखाव नहीं होने से इसकी हालत खराब हो गई है। यहां जानवर विचरण करते हैं तो बच्चे क्रिकेट खेलते दिखाई देते हैं। नझाई बाजार स्वामी विवेकानंद पार्क पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है। यह दूर से नजर नहीं आता है। इसके अलावा इसकी साफ सफाई पर भी किसी का ध्यान नहीं है। पुराने एलआईसी भवन के बगल में बने महाराजा अग्रसेन पार्क व इससे चंद कदम की दूरी पर बने चिंतन पार्क में बैठने के लिए बैंच तक नहीं है। चिंतन पार्क में तो घास उग आई है। इस पार्क में वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानचंद अलया की प्रतिमा लगी हुई है। नगर संसाधन केंद्र के पास बने पार्क भी उदासीनता का शिकार है। नागरिकों का कहना है कि पालिका नए पार्को के निर्माण में लगी है लेकिन पुराने की देखरेख में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। जिससे पार्को का निर्माण फिजूलखर्ची साबित हो रहा है। जब कभी इसकी शिकायत की जाती है तो एक दो दिन पार्को की सफाई हो जाती है, इसके बाद उसे अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। उधर, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार का कहना है कि पार्क नियमित खोले जा रहे हैं। यदि अतिक्रमण है तो उसे हटवाया जाएगा।
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