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निकाय चुनाव का खर्च
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:18 AM IST
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प्रत्याशियों के हर खर्चे पर होगी चुनाव आयोग की नजर
अध्यक्ष के लिए छह लाख व पार्षद डेढ़ लाख कर सकेंगे व्यय
लिस्ट के अनुसार दर्ज करना होगा खर्च, तय फार्मेट में देना होगा खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
चुनाव के लिए खर्च होने वाली हर राशि पर चुनाव आयोग की नजर रहेगी। इसके लिए प्रत्याशियों को तय फार्मेट में ही खर्चे की जानकारी देनी होगी। इसके लिए चुनाव खत्म होने के तीन महीने के अंदर व्यय की जानकारी देनी होगी। खर्चे की रेट लिस्ट चुनाव आयोग ने जारी करते हुए बताया कि किस मद के लिए कितनी कीमत निर्धारित की जाएगी।
गौरतलब हो कि चुनाव आयोग ने नगर पालिका अध्यक्ष के लिए छह लाख रुपये और पार्षद पद के लिए डेढ़ लाख रुपये निर्धारित किए हैं। इसके अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए डेढ़ लाख रुपये और पार्षद के लिए तीस हजार रुपये खर्च सीमा निर्धारित की है। इसके लिए जिला निर्वाचन आयोग ने हर सामग्री के रेट निर्धारित कर दिए हैं। तय सूची के अनुसार नेताओं के गले में पड़ने वाली मालाओं के पांच सौ रुपये जोड़े जाएंगे। इसके अलावा कार्यालयों में आने वाले हर सामान की जानकारी देनी होगी। इसमें नेताओं की रैलियों में बनने वाले मंच और हैलीपैड से लेकर कार्यालय में आने वाली चाय का भी खर्च लिखना होगा।
सभी का किराया है तय, इससे कम नहीं होगा मान्य
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सुविधाएं दी जाती हैं। इसके तहत उम्मीदवार अपनी ओर से ही भोजन की व्यवस्था करते हैं। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने आने वाले सामानों का किराया भी निर्धारित किया है। इसमें एक बाल्टी का दो रुपये प्रतिदिन, कनात का पचास रुपये प्रतिदिन, मजदूर को 220 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लिखना होगा। इसके अलावा जग, ट्रे, नाद, ग्लास का भी किराया निर्धारित है। इसके अलावा टेंट हाउस से आए सामान का भी किराया निर्धारित किया गया है।
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कार्यालय की स्टेशनरी भी जोड़नी होगी।
चुनाव कार्यालय को मेंटेन करने और प्रचार सामग्री से संबंधित जानकारी तय फार्मेट में देनी होगी। इसके लिए गम बोतल, स्टेपलर पिन, आलपिन पैकेट, फाइल कवर, पेपर रिम, पेन, रजिस्टर, लिफाफा आदि के रेट निर्धारित किए गए हैं। वहीं ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर व कंप्यूटर का प्रतिदिन का खर्च अलग से लिखना होगा। वहीं विद्युत व्यवस्था में पंखा, कूलर आदि का अलग से जानकारी देनी होगी।
-
वर्जन
प्रत्याशियों के नामांकन से लेकर मतदान तक के खर्चों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके बाद प्रत्याशियों की ओर से दिए जाने वाले खर्चे से मिलान किया जाएगा। सीमा से अधिक खर्च करने वालों पर कार्रवाई होगी।
महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम
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अध्यक्ष के लिए छह लाख व पार्षद डेढ़ लाख कर सकेंगे व्यय
लिस्ट के अनुसार दर्ज करना होगा खर्च, तय फार्मेट में देना होगा खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
चुनाव के लिए खर्च होने वाली हर राशि पर चुनाव आयोग की नजर रहेगी। इसके लिए प्रत्याशियों को तय फार्मेट में ही खर्चे की जानकारी देनी होगी। इसके लिए चुनाव खत्म होने के तीन महीने के अंदर व्यय की जानकारी देनी होगी। खर्चे की रेट लिस्ट चुनाव आयोग ने जारी करते हुए बताया कि किस मद के लिए कितनी कीमत निर्धारित की जाएगी।
गौरतलब हो कि चुनाव आयोग ने नगर पालिका अध्यक्ष के लिए छह लाख रुपये और पार्षद पद के लिए डेढ़ लाख रुपये निर्धारित किए हैं। इसके अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए डेढ़ लाख रुपये और पार्षद के लिए तीस हजार रुपये खर्च सीमा निर्धारित की है। इसके लिए जिला निर्वाचन आयोग ने हर सामग्री के रेट निर्धारित कर दिए हैं। तय सूची के अनुसार नेताओं के गले में पड़ने वाली मालाओं के पांच सौ रुपये जोड़े जाएंगे। इसके अलावा कार्यालयों में आने वाले हर सामान की जानकारी देनी होगी। इसमें नेताओं की रैलियों में बनने वाले मंच और हैलीपैड से लेकर कार्यालय में आने वाली चाय का भी खर्च लिखना होगा।
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सभी का किराया है तय, इससे कम नहीं होगा मान्य
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सुविधाएं दी जाती हैं। इसके तहत उम्मीदवार अपनी ओर से ही भोजन की व्यवस्था करते हैं। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने आने वाले सामानों का किराया भी निर्धारित किया है। इसमें एक बाल्टी का दो रुपये प्रतिदिन, कनात का पचास रुपये प्रतिदिन, मजदूर को 220 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लिखना होगा। इसके अलावा जग, ट्रे, नाद, ग्लास का भी किराया निर्धारित है। इसके अलावा टेंट हाउस से आए सामान का भी किराया निर्धारित किया गया है।
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कार्यालय की स्टेशनरी भी जोड़नी होगी।
चुनाव कार्यालय को मेंटेन करने और प्रचार सामग्री से संबंधित जानकारी तय फार्मेट में देनी होगी। इसके लिए गम बोतल, स्टेपलर पिन, आलपिन पैकेट, फाइल कवर, पेपर रिम, पेन, रजिस्टर, लिफाफा आदि के रेट निर्धारित किए गए हैं। वहीं ऑफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर व कंप्यूटर का प्रतिदिन का खर्च अलग से लिखना होगा। वहीं विद्युत व्यवस्था में पंखा, कूलर आदि का अलग से जानकारी देनी होगी।
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वर्जन
प्रत्याशियों के नामांकन से लेकर मतदान तक के खर्चों पर निगरानी रखी जाएगी। इसके बाद प्रत्याशियों की ओर से दिए जाने वाले खर्चे से मिलान किया जाएगा। सीमा से अधिक खर्च करने वालों पर कार्रवाई होगी।
महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम