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-मेगा कैंप में वितरित की गई सामुदायिक निवेश निधि
Updated Thu, 25 Oct 2018 02:09 AM IST
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मेगा कैंप में वितरित की गई सामुदायिक निवेश निधि
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। विकास भवन सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह को रिवाल्विंग फण्ड, सामुदायिक निवेश निधि, जीविकोपार्जन निधि के आयोजित मेगा कैम्प में सामुदायिक निवेश निधि का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक (बलिराम वर्मा), उपायुक्त स्वत: रोजगार, इन्द्रमणि त्रिपाठी एवं लीड बैंक मैनेजर द्वारा किया गया। उपायुक्त स्वत: रोजगार इन्द्रमणि त्रिपाठी जी द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संबंध में विस्तृत प्रकाश डालते हुऐ कहा कि आजीविका मिशन आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में सबसे बड़ा कार्यक्रम है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को प्राप्त चकीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि से किये जा रहे विभिन्न आजीविका के कार्यो को जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। लीड बैक मेंनेजर ने कहा कि जो समूह सफेद मूसली का व्यवसाय कर रहे है, ऐसे समूह को आजीविका मिशन इकाई ऑनलाइन कर दें, इससे उन्हें मार्केट मिल जाएगा। गाय भैंस पालन करने वाले समूह आपस में मिलकर एक समिति का गठन कर लें तो उनको डेयरी से जोड़ा जा सकता है। शासन की मंशा है कि समूह की महिलायें नर्सरी का कार्य भी करें क्योंकि हर साल लाखों में पौधों का रोपण होता है और उनकी सप्लाई नर्सरी नहीं कर पाती है। अगले साल के लिये शासन ने 15 लाख पौधो का लक्ष्य तय कर दिया है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने समूह की महिलाओं केा आगे बढने मंत्र देते हुये कहा कि समूह धीमे- धीमे आगे बढ़े। इस समय समूह शिशु काल में है। धीमे-धीमे बढने पर सफलता मिलेगी। विभिन्न निधियों से प्राप्त धनराशि को ऐसे व्यवसायों में लगाए, जहां पैसा मूलधन से बढकर आय मिले। उन्होंने उपायुक्त एनआरएलएम को निर्देशित किया कि नर्सरी के काम को प्राथमिकता से करायें। नर्सरी में ऐसे पौधों का चयन किया जाये जो चार से पांच माह में तैयार हो जाये। उन्होने कहा कि पचास प्रतिशत पौधों स्वंय सहायता समूह की नर्सरी से लेना है। उन्होंने कहा कि स्वंय सहायता समूह को प्राथमिक/जूनियर विद्यालय की ड्रेस के कार्य से जोडा जाये। उन्होंने आदिवासी महिलाओं के समूह को पारंपरिक कार्य से जोड़ने व आरसेटी से प्रशिक्षित करने पर बल दिया। रवि दुबे जिला मिशन प्रबंधक ने बताया कि समूह के सदस्यों के बीच वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए 03 माह तक पंचसूत्र का पालन करने वाले समूह को 15 हजार रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्वयं सहायता समूहों को सीआईएफ की राशि समूह के सदस्यों की क्रेडिट की जरूरत को पूरा करने के लिये उपलब्ध कराया जाता हैै। विकास खण्ड में इंटेंसिव एप्रोच के तहत गठित 06 माह पुराने स्वयं सहायता समूहों का माइक्रो क्रेडिट प्लान बनाकर प्रति समूह 50 हजार से 1,10 हजार रुपये निर्गत की जाती है। समापन पर जिलाधिकारी को आजीविका मिशन का प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में खण्ड विकास अधिकारी बिरधा एवं जखौरा से सुनील, एडीओ आईएसवी आदि उपस्थित रहे। संचालन विजय श्रीवास्तव ने किया। अंत में आभार बलिराम वर्मा परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ने व्यक्त किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। विकास भवन सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह को रिवाल्विंग फण्ड, सामुदायिक निवेश निधि, जीविकोपार्जन निधि के आयोजित मेगा कैम्प में सामुदायिक निवेश निधि का वितरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक (बलिराम वर्मा), उपायुक्त स्वत: रोजगार, इन्द्रमणि त्रिपाठी एवं लीड बैंक मैनेजर द्वारा किया गया। उपायुक्त स्वत: रोजगार इन्द्रमणि त्रिपाठी जी द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संबंध में विस्तृत प्रकाश डालते हुऐ कहा कि आजीविका मिशन आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में सबसे बड़ा कार्यक्रम है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को प्राप्त चकीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि से किये जा रहे विभिन्न आजीविका के कार्यो को जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। लीड बैक मेंनेजर ने कहा कि जो समूह सफेद मूसली का व्यवसाय कर रहे है, ऐसे समूह को आजीविका मिशन इकाई ऑनलाइन कर दें, इससे उन्हें मार्केट मिल जाएगा। गाय भैंस पालन करने वाले समूह आपस में मिलकर एक समिति का गठन कर लें तो उनको डेयरी से जोड़ा जा सकता है। शासन की मंशा है कि समूह की महिलायें नर्सरी का कार्य भी करें क्योंकि हर साल लाखों में पौधों का रोपण होता है और उनकी सप्लाई नर्सरी नहीं कर पाती है। अगले साल के लिये शासन ने 15 लाख पौधो का लक्ष्य तय कर दिया है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने समूह की महिलाओं केा आगे बढने मंत्र देते हुये कहा कि समूह धीमे- धीमे आगे बढ़े। इस समय समूह शिशु काल में है। धीमे-धीमे बढने पर सफलता मिलेगी। विभिन्न निधियों से प्राप्त धनराशि को ऐसे व्यवसायों में लगाए, जहां पैसा मूलधन से बढकर आय मिले। उन्होंने उपायुक्त एनआरएलएम को निर्देशित किया कि नर्सरी के काम को प्राथमिकता से करायें। नर्सरी में ऐसे पौधों का चयन किया जाये जो चार से पांच माह में तैयार हो जाये। उन्होने कहा कि पचास प्रतिशत पौधों स्वंय सहायता समूह की नर्सरी से लेना है। उन्होंने कहा कि स्वंय सहायता समूह को प्राथमिक/जूनियर विद्यालय की ड्रेस के कार्य से जोडा जाये। उन्होंने आदिवासी महिलाओं के समूह को पारंपरिक कार्य से जोड़ने व आरसेटी से प्रशिक्षित करने पर बल दिया। रवि दुबे जिला मिशन प्रबंधक ने बताया कि समूह के सदस्यों के बीच वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए 03 माह तक पंचसूत्र का पालन करने वाले समूह को 15 हजार रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्वयं सहायता समूहों को सीआईएफ की राशि समूह के सदस्यों की क्रेडिट की जरूरत को पूरा करने के लिये उपलब्ध कराया जाता हैै। विकास खण्ड में इंटेंसिव एप्रोच के तहत गठित 06 माह पुराने स्वयं सहायता समूहों का माइक्रो क्रेडिट प्लान बनाकर प्रति समूह 50 हजार से 1,10 हजार रुपये निर्गत की जाती है। समापन पर जिलाधिकारी को आजीविका मिशन का प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में खण्ड विकास अधिकारी बिरधा एवं जखौरा से सुनील, एडीओ आईएसवी आदि उपस्थित रहे। संचालन विजय श्रीवास्तव ने किया। अंत में आभार बलिराम वर्मा परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ने व्यक्त किया।
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