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पेयजल संकट: ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों पर बढ़ी निर्भरता
Updated Wed, 30 May 2018 04:55 AM IST
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पेयजल संकट: ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों पर बढ़ी निर्भरता
ललितपुर। नौतपा की गर्मी से ग्रामीणों की टैंकर जलापूर्ति पर निर्भरता बढ़ गई है। जहां अप्रैल माह के दौरान 45 गांवों में 65 टैंकर लोगों की प्यास बुझा रहे थे। वहीं, बढ़कर अब 81 ग्रामों में टैंकरों की 119 हो गई है। आने वाले दिनों में और भी हालात बिगड़ने के आसार हैं। इससे समूचे जनपद में गहराते पेयजल संकट का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
जब से नौतपा प्रारंभ हुए हैं, तब से तापमान नित नए रिकार्ड बना रहा है। ऐसे में भूगर्भ जल स्तर टिक नहीं पा रहा है। वह निरंतर नीचे की ओर सरक रहा है। जिन प्राचीन जल स्रोतों में नाममात्र का पानी रह गया था, वह अब पूरी तरह सूख चुका है। तमाम नदी, नालों में पानी की धार भी पूरी तरह टूट चुकी है। नदी, नालों में जगह-जगह पाकेट में पानी दिखाई दे रहा है। जो विभिन्न गांवों में हैंडपंप लगे हैं, उनका भी बुरा हाल है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्र में 18769 हैंडपंप हैं। इनमें छह सौ चौरावनवें हैंडपंप रिबोर कराए जा चुके हैं। यही नहीं, तमाम गांवों में दर्जनों की संख्या में हैंडपंप सूख चुके हैं। विकास भवन ने अभी तक 168 पेयजल समस्याग्रस्त ग्राम चिह्नित किए हैं। जिले में 1324 कूपों में से 884 कूप पानी पिलाने लायक रह गए हैं, जबकि 440 कूप पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे निपटने के लिए ग्राम पंचायतों ने टैंकर से जलापूर्ति शुरू की है। 24 अप्रैल को 45 गांवों में 65 टैंकर चलाए गए थे। वर्तमान में गांवों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इन गांवों में 119 टैंकर लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।
इतने हैं उपलब्ध टैंकर
ग्राम पंचायतों के पास 101 सरकारी टैंकर और 37 निजी टैंकर उपलब्ध हैं। इनमें से 119 टैंकर 81 ग्रामों में उपयोग में लाए जा रहे हैं। जो चिह्नित समस्याग्रस्त गांवों में टैंकर चलाए जा रहे हैं, उनमें ब्लाक बार में 19, जखौरा में 6, तालबेहट में 8, बिरधा में 5 गांव शामिल हैं। इसी प्रकार अन्य 43 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति हो रही है। वहीं, शासन से घोषित सूखाग्रस्त एक दर्जन गांवों में से पांच में टैंकर के पानी से लोगों की प्यास बुझाई जा रही है।
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ड्राई हैंडपंपों का हो रहा सत्यापन
गांवों में जो हैंडपंप सूख चुके हैं, उनका ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है। जहां से भी टैंकर की मांग की जा रही है, वहां टैंकर जलापूर्ति कराने की व्यवस्था की जा रही है।
श्रवण कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ललितपुर। नौतपा की गर्मी से ग्रामीणों की टैंकर जलापूर्ति पर निर्भरता बढ़ गई है। जहां अप्रैल माह के दौरान 45 गांवों में 65 टैंकर लोगों की प्यास बुझा रहे थे। वहीं, बढ़कर अब 81 ग्रामों में टैंकरों की 119 हो गई है। आने वाले दिनों में और भी हालात बिगड़ने के आसार हैं। इससे समूचे जनपद में गहराते पेयजल संकट का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
जब से नौतपा प्रारंभ हुए हैं, तब से तापमान नित नए रिकार्ड बना रहा है। ऐसे में भूगर्भ जल स्तर टिक नहीं पा रहा है। वह निरंतर नीचे की ओर सरक रहा है। जिन प्राचीन जल स्रोतों में नाममात्र का पानी रह गया था, वह अब पूरी तरह सूख चुका है। तमाम नदी, नालों में पानी की धार भी पूरी तरह टूट चुकी है। नदी, नालों में जगह-जगह पाकेट में पानी दिखाई दे रहा है। जो विभिन्न गांवों में हैंडपंप लगे हैं, उनका भी बुरा हाल है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्र में 18769 हैंडपंप हैं। इनमें छह सौ चौरावनवें हैंडपंप रिबोर कराए जा चुके हैं। यही नहीं, तमाम गांवों में दर्जनों की संख्या में हैंडपंप सूख चुके हैं। विकास भवन ने अभी तक 168 पेयजल समस्याग्रस्त ग्राम चिह्नित किए हैं। जिले में 1324 कूपों में से 884 कूप पानी पिलाने लायक रह गए हैं, जबकि 440 कूप पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे निपटने के लिए ग्राम पंचायतों ने टैंकर से जलापूर्ति शुरू की है। 24 अप्रैल को 45 गांवों में 65 टैंकर चलाए गए थे। वर्तमान में गांवों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इन गांवों में 119 टैंकर लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।
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इतने हैं उपलब्ध टैंकर
ग्राम पंचायतों के पास 101 सरकारी टैंकर और 37 निजी टैंकर उपलब्ध हैं। इनमें से 119 टैंकर 81 ग्रामों में उपयोग में लाए जा रहे हैं। जो चिह्नित समस्याग्रस्त गांवों में टैंकर चलाए जा रहे हैं, उनमें ब्लाक बार में 19, जखौरा में 6, तालबेहट में 8, बिरधा में 5 गांव शामिल हैं। इसी प्रकार अन्य 43 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति हो रही है। वहीं, शासन से घोषित सूखाग्रस्त एक दर्जन गांवों में से पांच में टैंकर के पानी से लोगों की प्यास बुझाई जा रही है।
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ड्राई हैंडपंपों का हो रहा सत्यापन
गांवों में जो हैंडपंप सूख चुके हैं, उनका ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है। जहां से भी टैंकर की मांग की जा रही है, वहां टैंकर जलापूर्ति कराने की व्यवस्था की जा रही है।
श्रवण कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी