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विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही फेको मशीन
Updated Thu, 29 Mar 2018 01:40 AM IST
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विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रही फेको मशीन
ललितपुर। जिला चिकित्सालय में लाखों रुपये से खरीदी गई आधुनिक मशीनें विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही हैं। ऐसी ही एक मशीन फेको है जो नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण के बाद से बंद पड़ी है। सीटी स्केन मशीन भी तकनीकी कमियों के चलते उपयोग में नहीं लाई जा सकी है।
जिला अस्पताल को अत्याधुनिक मशीनों से लैस किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। बीते वर्षों में मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन करने के लिए फेको मशीन की आपूर्ति की गई। इसके पीछे मकसद था कि जनपद वासियों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन आसानी से किए जा सकें। जब इस मशीन की खरीद प्रक्रिया चल रही थी, उस समय इसके ऑपरेट करने का प्रशिक्षण पूर्व में कार्यरत डॉ पंकज त्रिपाठी को दिया गया था। उनका स्थानांतरण हो गया है तो उनकी जगह फेको मशीन को ऑपरेट करने वाले किसी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है, जिससे यह मशीन शोपीस बनकर रह गई है। एक बार फिर जिला अस्पताल में अब पुरानी पद्घति से मोतियाबिंद के ऑपरेशन शुरु हो गए है। फेको मशीन से एक ऑपरेशन करने में लगभग दस से 15 मिनट का समय लगता है, जबकि साधारण प्रक्रिया में मरीज को ठीक होने में काफी समय लग जाता है। कई बार यदि मरीज बताई गई सावधानी पर ध्यान नहीं दें तो आपरेशन फेल होने का अंदेशा बना रहता है। वहीं, सीटी स्केन मशीन का इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है। इसमें पर्याप्त बिजली की जरूरत होती है, इसके इंतजाम के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें हो रही देरी से मरीज इसके लाभ से वंचित हो रहे हैं।
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फेको से ऐसे होते आपरेशन
इस मशीन से ऑपरेशन में एक हल्का छेद करके आंख में नया लैंस डाल दिया जाता है। इसमें चश्मा लगाने की भई सलाह दी जाती है। ऑपरेशन के लगभग चार घंटे में ही पट्टी को हटा दिया जाता है। फेको मशीन से एक दिन में लगभग सौ ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसमें आपरेशन असफल होने की संभावना न के बराबर रहती है।
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अस्पताल में नहीं हैं हृदय रोग की मशीनें
पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री उप्र शासन डा. अरविंद जैन के कार्यकाल में जिला अस्पताल में हृदय रोग के उपचार के प्रयास किए गए थे। इस दौरान कुछ मशीनों की आपूर्ति हुई थी लेकिन मशीनों को आपरेट करने वाले विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो सके थे। यह समस्या आज भी बनी हुई है, जिससे लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका। अब सीएमएस का कहना है कि हृदय रोग से संबंधित मशीनें अस्पताल में नहीं हैं जो मानीटर उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हें प्रयोग में लाया जा रहा है।
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दूसरे चिकित्सक को सौंपेंगे जिम्मेदारी
पहले फेको से कुछ ऑपरेशन जरूर हुए हैं, लेकिन डॉ पंकज त्रिपाठी के स्थानांतरण के बाद यह मशीन बंद हो गई है। अगले वित्तीय वर्ष से इसकी जिम्मेदारी डॉ एलबी गुप्ता को सौंपी जाएगी, जिससे कि इस मशीन का इस्तेमाल दोबारा शुरू हो सकेंगे।
-डॉ. एस के बासवानी,
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल ललितपुर
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ललितपुर। जिला चिकित्सालय में लाखों रुपये से खरीदी गई आधुनिक मशीनें विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही हैं। ऐसी ही एक मशीन फेको है जो नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण के बाद से बंद पड़ी है। सीटी स्केन मशीन भी तकनीकी कमियों के चलते उपयोग में नहीं लाई जा सकी है।
जिला अस्पताल को अत्याधुनिक मशीनों से लैस किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। बीते वर्षों में मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन करने के लिए फेको मशीन की आपूर्ति की गई। इसके पीछे मकसद था कि जनपद वासियों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन आसानी से किए जा सकें। जब इस मशीन की खरीद प्रक्रिया चल रही थी, उस समय इसके ऑपरेट करने का प्रशिक्षण पूर्व में कार्यरत डॉ पंकज त्रिपाठी को दिया गया था। उनका स्थानांतरण हो गया है तो उनकी जगह फेको मशीन को ऑपरेट करने वाले किसी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है, जिससे यह मशीन शोपीस बनकर रह गई है। एक बार फिर जिला अस्पताल में अब पुरानी पद्घति से मोतियाबिंद के ऑपरेशन शुरु हो गए है। फेको मशीन से एक ऑपरेशन करने में लगभग दस से 15 मिनट का समय लगता है, जबकि साधारण प्रक्रिया में मरीज को ठीक होने में काफी समय लग जाता है। कई बार यदि मरीज बताई गई सावधानी पर ध्यान नहीं दें तो आपरेशन फेल होने का अंदेशा बना रहता है। वहीं, सीटी स्केन मशीन का इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है। इसमें पर्याप्त बिजली की जरूरत होती है, इसके इंतजाम के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें हो रही देरी से मरीज इसके लाभ से वंचित हो रहे हैं।
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फेको से ऐसे होते आपरेशन
इस मशीन से ऑपरेशन में एक हल्का छेद करके आंख में नया लैंस डाल दिया जाता है। इसमें चश्मा लगाने की भई सलाह दी जाती है। ऑपरेशन के लगभग चार घंटे में ही पट्टी को हटा दिया जाता है। फेको मशीन से एक दिन में लगभग सौ ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसमें आपरेशन असफल होने की संभावना न के बराबर रहती है।
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अस्पताल में नहीं हैं हृदय रोग की मशीनें
पूर्व स्वास्थ्य राज्यमंत्री उप्र शासन डा. अरविंद जैन के कार्यकाल में जिला अस्पताल में हृदय रोग के उपचार के प्रयास किए गए थे। इस दौरान कुछ मशीनों की आपूर्ति हुई थी लेकिन मशीनों को आपरेट करने वाले विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो सके थे। यह समस्या आज भी बनी हुई है, जिससे लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका। अब सीएमएस का कहना है कि हृदय रोग से संबंधित मशीनें अस्पताल में नहीं हैं जो मानीटर उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हें प्रयोग में लाया जा रहा है।
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दूसरे चिकित्सक को सौंपेंगे जिम्मेदारी
पहले फेको से कुछ ऑपरेशन जरूर हुए हैं, लेकिन डॉ पंकज त्रिपाठी के स्थानांतरण के बाद यह मशीन बंद हो गई है। अगले वित्तीय वर्ष से इसकी जिम्मेदारी डॉ एलबी गुप्ता को सौंपी जाएगी, जिससे कि इस मशीन का इस्तेमाल दोबारा शुरू हो सकेंगे।
-डॉ. एस के बासवानी,
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल ललितपुर