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गलत जगह लगाए जा रहे डेढ़ करोड़

Fri, 28 Apr 2017 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 28 Apr 2017 01:36 AM IST
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1.5 million in place of wrong place
water, lalitpur - फोटो : demo
ललितपुर। शासन ने नगरीय पेयजल योजना के तहत हैंडपंप लगाने, रीबोर कराने और बंद पड़े नलकूपों को चालू कराने के लिए पिछले साल जल निगम को 2.80 करोड़ रुपए जारी किए थे। जल निगम ने इस धनराशि का मनमाने तरीके से इस्तेमाल किया है। कई काम शासनादेश के विपरीत किए गए हैं। जल संस्थान के अधिकारियों ने जल निगम पर बिना प्रस्ताव मांगे काम कराने के आरोप लगाए हैं। अपर जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच कराने की बात कही है।
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वर्ष 2016 मई में शासन ने पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए नगरीय योजना सामान्य के तहत 1.60 करोड़ रुपए और नगरीय अनुसूचित योजना के तहत 1.20 करोड़ रुपए भेजे थे। इस धनराशि का उपयोग हैंडपंप लगवाने, रीबोर कराने और रीबोर योग्य नलकूपों को सुचारू कराने के कार्यों में किया जाना था। जल निगम के अधिकारियों ने शासनादेश को नजर अंदाज करते हुए कुल 2.80 करोड़ रुपये के सापेक्ष करीब डेढ़ करोड़ रुपए का इस्तेमाल गैर उपयोगी कार्यों में किया जा रहा है। 1.37 करोड़ रुपए की कार्ययोजना शासनादेश के वितरीत व गैर उपयोगी कार्यों की बनाई गई है। जिसमें करीब 94.54 लाख रुपए से शहर के तीनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में एक-एक एयर ब्लोअर और तालबेहट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में एक एयर ब्लोअर लगाया जाना है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार किसी भी ट्रीटमेंट प्लांट में एयर ब्लोअर की आवश्यकता नहीं है।
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मतलब करीब 94.54 लाख रुपए व्यर्थ में व्यय किए जाएंगे। इसके अलावा 8.40 लाख रुपए से कसाई मंडी क्षेत्र के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में गैसियस टाइप क्लोरिनेटिंग प्लांट लगाया जा रहा है, जो शासनादेश के विपरीत है। यह पहले से ही लगा है। इसके अलावा 22.50 लाख रुपए तालबेहट नलकूप को रीबोर कराकर उसको पाइप लाइन से जोड़ा जा रहा है, जबकि वहां पहले से ही लाइन पड़ी है। साथ ही 10.50 लाख रुपए से कंट्रोल पैनल लगाए जा रहे हैं, जबकि कंट्रोल पैनल पहले से ही लगे हैं। इसके अलावा एस्टीमेट की दरों में अनियमितताएं होने की भी आशंका है। मामले को गंभीर मानते हुए अपर जिलाधिकारी ने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
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यहां कर सकते थे उपयोग
विगत वर्ष नगर पालिका ने क्षेत्रीय समस्त पार्षदों से अपने-अपने वार्ड में अतिआवश्यक स्थलों पर लगने वाले हैंडपंपों की सूची मांगी तो मई में नगर पालिका ने जल निगम को भेज दी थी। इसके अलावा विगत कई वर्षों से नेहरु नगर के पार्षद व नागरिक दो नलकूपों की मांग कर रहे हैं। साथ ही जल संस्थान में भी नगरीय पेयजल को सुचारू कराने के लिए एक कार्ययोजना तैयार करके जल निगम को दी थी, जिसको भी जल निगम द्वारा नजर अंदाज किया गया है।    

पहले टेंडर निकाल दिए फिर ली स्वीकृति   
जल निगम ने उक्त 2.80 करोड़ रुपए की नगरीय पेयजल योजना के खर्च का आकलन कर 17 दिसंबर 2016 को टेंडर की सूचना जारी कर दी थी। टेंडर की सूचना जारी होने और टेंडर आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल निगम के अधिकारियों ने जिला प्रशासन से स्वीकृति ली है। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर ने उक्त कार्यों को 22 दिसंबर को स्वीकृति दी थी और इसके बाद जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार ने स्वीकृति दी थी। जल निगम के अधिकारियों ने कार्ययोजना पर जिला प्रशासन की अनुमति लेने के नाम पर केवल खानापूर्ति की है।

नहीं लगने देंगे एयर ब्लोअर
शहर में बने तीनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में एयर ब्लोअर की कोई आवश्यकता नहीं है। एयर ब्लोअर का जो काम है उसके लिए पहले से ही लाखों रुपये से बैकवाश सिस्टम बना हुआ है। इसलिए वह ट्रीटमेंट प्लांट में एयर ब्लोवर नहीं लगने देंगे। जल निगम ने पेयजल योजना के तहत कराए जाने वाले कार्यों का प्रस्ताव और सुचाव विभाग से नहीं मांगा है।   

- वीके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान ललितपुर।            
 
जनता की धनराशि का नहीं होने देंगे दुरुपयोग
ये मामला गंभीर है और जनता की समस्या से जुड़ा हुआ है। इसलिए जल्द ही मामले की जांच कराई जाएगी। यदि शासनादेश के विपरीत कार्ययोजना बनाकर काम किया गया है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जनता के रुपयों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, जिला प्रशासन की स्वीकृति से पहले ही टेंडर निकाल दिए गए हैं तो यह भी नियम विरुद्ध है।
- योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी, ललितपुर।
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