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Lakhimpur Kheri News: गोवर्धन पूजन कर महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना
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मोहल्ला हिदायत नगर गोवर्धन पूजा करती महिलाएं। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिलेभर में गोवर्धन पूजा का पर्व पारंपरिक रूप से मनाया गया। घरों में महिलाओं ने गोवर्धन बनाकर पूजाकर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं गोशालाओं में भी गो पूजन के आयोजन किए गए। गायों की पूजा कर उन्हें फल और गुड़ चना आदि खिलाए गए।
शहर में महिलाओं ने अपने आंगन में गोबर की चौक बनाई। गाय बैलों तथा गोकुल गांव की आकृतियां बनाईं और सीकों से उसके ऊपर पर्वत बनाकर चावल के पकवानों से भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने समेत विभिन्न पारंपरिक कहानियां सुनाईं गईं। कुछ जगहों पर सामूहिक रूप से महिलाओं ने चौक बनाई, जहां कई परिवारों ने आकर गोवर्धन पूजा की। दोपहर तक पूजा पाठ का क्रम चलता रहा। इस अवसर पर लोगों ने मंदिरों में भी जाकर भगवान के दर्शन पूजन किए।
गोला गोकर्णनाथ/ममरी। महिलाओं ने पूजन कर धन-धान्य की कामना की। त्रेता युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए गोकुल और मथुरा वासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को तर्जनी पर उठा लिया था और सभी को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था। तभी से गोवर्धन भगवान की पूजा का विधान चला आ रहा है। इसी परंपरा के चलते महिलाओं ने घरों में गाय के गोबर से घरौंदे बनाकर अन्नकूट भगवान गोवर्धन का विधि विधान से पूजन किया और गोवर्धन भगवान की परिक्रमा करके अन्नकूट का भोग लगाया तथा सुख समृद्धि और लोक कल्याण की कामनाएं की। मोहल्ले में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया।
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पलियाकलां। दीपावली के अगले दिन की जाने वाली गोवर्धन पूजा शनिवार को हुई। इसमें महिलाओं ने व्रत रखा और गोवर्धन पूजा की। आचार्यों की मानें तो इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी, जिसके चलते इसे गोवर्धन पूजा का नाम दिया गया।
बरबर। गोवर्धन पूजा के अवसर पर नगर की कान्हा गोशाला में नगर पंचायत अध्यक्ष संजय शर्मा ने गायों की पूजा की उन्हें गुड़ चना खिलाकर माल्यार्पण किया। इस मौके पर वरिष्ठ लिपिक रमाकांत अग्निहोत्री, कन्हैया, गौशाला प्रभारी बृजभूषण द्विवेदी, सभासद राहुल शुक्ला, विमल शुक्ला, समेत समस्त कर्मचारी मौजूद रहे।
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शहर में महिलाओं ने अपने आंगन में गोबर की चौक बनाई। गाय बैलों तथा गोकुल गांव की आकृतियां बनाईं और सीकों से उसके ऊपर पर्वत बनाकर चावल के पकवानों से भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने समेत विभिन्न पारंपरिक कहानियां सुनाईं गईं। कुछ जगहों पर सामूहिक रूप से महिलाओं ने चौक बनाई, जहां कई परिवारों ने आकर गोवर्धन पूजा की। दोपहर तक पूजा पाठ का क्रम चलता रहा। इस अवसर पर लोगों ने मंदिरों में भी जाकर भगवान के दर्शन पूजन किए।
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गोला गोकर्णनाथ/ममरी। महिलाओं ने पूजन कर धन-धान्य की कामना की। त्रेता युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए गोकुल और मथुरा वासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को तर्जनी पर उठा लिया था और सभी को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाया था। तभी से गोवर्धन भगवान की पूजा का विधान चला आ रहा है। इसी परंपरा के चलते महिलाओं ने घरों में गाय के गोबर से घरौंदे बनाकर अन्नकूट भगवान गोवर्धन का विधि विधान से पूजन किया और गोवर्धन भगवान की परिक्रमा करके अन्नकूट का भोग लगाया तथा सुख समृद्धि और लोक कल्याण की कामनाएं की। मोहल्ले में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया।
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पलियाकलां। दीपावली के अगले दिन की जाने वाली गोवर्धन पूजा शनिवार को हुई। इसमें महिलाओं ने व्रत रखा और गोवर्धन पूजा की। आचार्यों की मानें तो इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी, जिसके चलते इसे गोवर्धन पूजा का नाम दिया गया।
बरबर। गोवर्धन पूजा के अवसर पर नगर की कान्हा गोशाला में नगर पंचायत अध्यक्ष संजय शर्मा ने गायों की पूजा की उन्हें गुड़ चना खिलाकर माल्यार्पण किया। इस मौके पर वरिष्ठ लिपिक रमाकांत अग्निहोत्री, कन्हैया, गौशाला प्रभारी बृजभूषण द्विवेदी, सभासद राहुल शुक्ला, विमल शुक्ला, समेत समस्त कर्मचारी मौजूद रहे।

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