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सर्दियों की दस्तक के साथ झादीताल,नगरिया और सेमरई झील प्रवासी परिंदों से गुलजार

Wed, 26 Oct 2022 12:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2022 12:36 AM IST
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Winters start, Jhadital, Nagaria and Semrai lakes are buzzing with migratory birds
बांकेगंज। सर्दी शुरू होते ही किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल, बफरजोन की नगरिया और गोला रेंज की सेमरई झील में प्रवासी परिंदों का आना शुरू हो गया है। यह प्रवासी परिंदें करीब चार महीने तक जिले के जलाशयों में प्रवास करने के बाद अपने वतन को लौटेंगे। इन प्रवासी परिंदों की सुरक्षा के लिए वन विभाग अलर्ट हो गया है।
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खीरी जिले में बड़ी संख्या में नदियां, झीलें और तालाब हैं। उनमें अपेक्षाकृत कम मानव व्यवधान वाले जलाशयों में ठंडे देशों (यूरोप, मध्य एशिया) और भारत के लद्दाख समेत विभिन्न ठंडे प्रदेशों से सैकड़ों की संख्या में पक्षी हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर तराई में पहुंचते हैं। यहां लगभग चार महीने का प्रवास पूरा करने के बाद होली से पहले अपने वतन लौटते हैं। यहां उन्हें अनुकूल वातावरण, पर्याप्त भोजन, आवास और सुरक्षा मिलती है।
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तराई क्षेत्र की झीलें प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग जैसी
दुधवा और किशनपुर सेंक्चुरी की झीलें प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग माने जाते हैं। यहां बड़ी संख्या में रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षी आकर सर्दियों के मौसम में बसेरा करते हैं। झादीताल के किनारे घनी झाड़ियां और उसके पीछे ऊंचे पेड़ प्रवासी पक्षियों को अनुकूल आवास और भोजन उपलब्ध कराते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य सैलानियों को आकर्षित करता है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए वन विभाग ने झीलों के आसपास वॉच टावर भी बना रखे हैं। इन वॉच टावरों से झीलों और जलाशयों में कलरव करने वाले पक्षियों को देखकर सैलानी आनंद उठाते हैं।
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मुख्य रूप से आते हैं यह विदेशी परिंदे
झादीताल, भादीताल और नगरिया झील में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन, लद्दाख, तिब्बत से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट बिल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राम्हनी डक, कूट मूर हेन, अबलक, गुर्चिया बत्तख समेत बीसों प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में हर साल यहां आते हैं।
तराई में क्यों आते हैं मेहमान पक्षी
जिन ठंडे देशों में सर्दियों के मौसम में तापमान जीरो डिग्री से नीचे हो जाता है। वहां की नदियों, झीलों का पानी जम जाता है। ऐसे में जलीय पक्षियों के भोजन, पानी, प्रजनन और आवास का संकट पैदा हो जाता है। ऐसी स्थिति में यह पक्षी अपेक्षाकृत कम ठंडे देशों में आ जाते हैं। यहां करीब चार महीने प्रवास के दौरान वह जलाशयों के किनारे पेड़ों पर अपना घोंसला बनाकर प्रजनन करते हैं। चार महीने में इनके बच्चे उड़ने लायक हो जाते हैं तो वह अपने वतन लौट जाते हैं।

मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के लिए कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। झादीताल, भादीताल समेत दुधवा टाइगर रिजर्व के सभी जलाशयों की निगरानी के लिए वन विभाग की टीमें तैयार की गई हैं, जो बारी-बारी प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा में जुटी हैं। ये परिंदे कुदरत की खूबसूरत देन हैं। इनका शिकार न करें न होने दें। पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - संजय पाठक, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
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