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दुधवा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठनः बाघों की सुरक्षा और होगी चौकस, शिकार और वन अपराध पर लगेगी लगाम

Sun, 13 Dec 2020 11:53 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2020 11:53 PM IST
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Wild Animals
दुधवा टाइगर रिजर्व। - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब दुधवा के बाघों की सुरक्षा और चौकस हो जाएगी। माना जा रहा है कि टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के अस्तित्व में आने से जहां बाघों की सुरक्षा और सुदृढ़ होगी तो वन अपराध, शिकार, वन्यजीव अंग तस्करी और वन भूमि के अतिक्रमण पर लगाम लगेगी। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी, कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) और बफरजोन में बाघों की सुरक्षा करेगी।
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दुधवा के जंगलों से निकलकर अक्सर बाघ आसपास के खेतों में पनाह ले लेते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। हाल ही में दुधवा के आसपास के कई खेतों में बाघों के शरण लेने के मामले सामने आए हैं। ऐसे मे दुधवा की अपनी स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स होने से दुधवा के बाघों की सुरक्षा बढ़ेगी तो वन्यजीव अपराधों पर लगाम लगेगी।
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क्या है स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स
अब तक स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) में दुधवा टाइगर रिजर्व का नाम नहीं जुड़ा था। अब स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स दुधवा टाइगर (एसटीपीएफ, डीटीआर ) गठित करने का फैसला किया गया है। इसमें एक पीपीएस अधिकारी, तीन प्लाटून कमांडर,18 हेड कांस्टेबल और 90 जवान शामिल होंगे। फोर्स में पीपीएस अधिकारी को डिप्टी कमांडेंट का दर्जा मिलेगा। यह सभी पुलिस या पीएसी से पांच से सात साल की प्रतिनियुक्ति पर इस फोर्स में भेजे जाएंगे। इससे पहले यह प्रतिनियुक्ति अवधि तीन से पांच साल थी। दुधवा टाइगर रिजर्व की यह स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स पूरी तरह दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य संरक्षक/फील्ड निदेशक के अधीन होगी। एसटीपीएफ डीटीआर में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले सभी अधिकारियों और जवानों को विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें जंगल प्रवास, वन्यजीवों की गतिविधियां, वन अपराध, शिकार, तस्करी, वनस्पतियों और उनके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही वन अधिनियम से भी भली-भंति अवगत कराया जाएगा।
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इस फैसले से क्या होंगे फायदे
प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ जाने से जवानों को जंगल की गतिविधियां और वन अपराध को समझने का अच्छा समय मिलेगा।
-मानव-बाघ संघर्ष पर प्रभावी नियंत्रण करने में मदद मिलेगी।
- शिकारियों और वन अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
- यह स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स दुधवा टाइगर रिजर्व ( एसटीपीएफ, डीटीआर) वन विभाग में स्टाफ की कमी को पूरा करेगा।
- वन्यजीव शिकार और वन्यजीव अंग तस्करी पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब दुधवा टाइगर रिजर्व का अपना स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स अस्तित्व में आ गया है। इससे बाघों की सुरक्षा को नए आयाम मिलेंगे। वन अपराध, शिकार, वन्यजीव अंग तस्करी, वन भूमि पर अतिक्रमण आदि रोकने में मदद मिलेगी।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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