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Lakhimpur Kheri News: तराई के जंगलों में बाघ बढ़े तो तेंदुओं का ठिकाना छिना

Fri, 03 May 2024 03:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 May 2024 03:42 AM IST
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When tigers increased in the Terai forests, the leopards lost their habitat.
दुधवा के जंगल में विचरण करता तेंदुआ। स्त्रोत्-वन विभाग।
बांकेगंज। बाघों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते तराई के जंगलों में बाघों की आबादी के साथ तेंदुओं की भी संख्या बढ़ी है। बाघों की आबादी बढ़ने से तेंदुओं का प्राकृतवास और रहने का ठिकाना छिन गया है। तेंदुओं के ठिकाने पर अब बाघों का कब्जा है। इसी के चलते तेंदुए खानाबदोश हो गए हैं। अब यह तेंदुए आबादी के नजदीक अपना ठिकाना तलाश रहे हैं।
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बाघ और तेंदुए, दोनों का प्राकृतवास जंगल ही है, लेकिन तेंदुए बाघों से दूर रहना पसंद करते हैं। जंगल में बाघों के रहने के कारण तेंदुए जंगल के बाहरी हिस्से में रहना पसंद करते हैं। घने बागों, झाड़ियों और नदी-नालों के किनारे भी ठिकाना बना लेते हैं। तेंदुए अक्सर छोटे वन्यजीवों के अलावा बकरी, बंदर और कुत्तों का शिकार करते हैं। जबकि, बाघ अपेक्षाकृत फुर्तीले और बड़े जानवरों का शिकार करते हैं।
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बाघों की आबादी बढ़ने और जंगल का एरिया सीमित हाेने से अब बाघों ने जंगल के बाहरी हिस्से पर भी कब्जा कर लिया है। यहां तक कि बाघ आबादी से सटे गन्ने के खेतों के अलावा नदी-नालों के किनारे की झाड़ियों में भी अपना ठिकाना बना रहे हैं। इसके चलते तेंदुओं को खेतों, गांव के पास स्थित बागों और झाड़ियों में रहना पड़ रहा है।
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अक्सर यह तेंदुए पानी की तलाश में गांव के अंदर तक आ जाते हैं। जिससे उनका जीवन खतरे में पड़ रहा है। एक दो साल के अंदर दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल से सटी आबादी में तेंदुओं के आने की घटनाएं बढ़ी हैं। प्राकृतवास की कमी होने से इनके वजूद पर भी संकट मंडरा रहा है।
युवराज दत्त महाविद्यालय में जंतु विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर अजय कुमार आगा ने बताया कि बाघों के बढ़ने से तेंदुओं का ठिकाना छिनने पर उच्चस्तरीय अध्ययन होना चाहिए, ताकि बाघों के साथ-साथ तेंदुओं का भी संरक्षण हो सके। अब तक इस संबंध में कोई अध्ययन नहीं हुआ है। मौजूदा समय में इसकी जरूरत है।
मौजूदा समय में हैं 168 तेंदुए
मौजूदा समय में 168 तेंदुए होने का आंकलन किया गया है। जबकि वास्तविकता यह है इनकी संख्या इससे दो गुने से अधिक है। चार साल पहले वर्ष 2019 में जब दुधवा टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की गणना हुई थी, तब जिले में 125 से 135 तेंदुए पाए गए थे। वर्ष 2024 में हुई गणना के मुताबिक यहां 158 से 168 तेंदुए मिले।

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राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वन विभाग बाघों के संरक्षण पर जितना ध्यान दे रहा है, उतना ही तेंदुओं के संरक्षण पर भी दे रहा है। तेंदुओं के प्राकृतवास को भी संरक्षित किया जा रहा है।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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