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राहगीरों के लिए चेतावनी और बाघों के लिए सुरक्षा कवच
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लखीमपुर-खीरी। मानव- बाघ संघर्ष की घटनाएं रोकने और सैलानियों को दुधवा की ओर आकर्षित करने के लिए पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व में एक अनूठी पहल करने जा रहा है। इसके तहत जंगल से गुजरने वाली उन सड़कों पर जिस पर बाघों की आवाजाही रहती है, वहां पर्यटन विभाग सड़क किनारे बोर्ड लगवाएगा। जिस पर बाघों की तस्वीर के साथ लिखा होगा ‘सावधान मैं सड़क पार कर रहा हूं।’ ये बोर्ड राहगीरों को बाघ से सचेत करने के साथ सैलानियों को बाघ की मौजूदगी का एहसास भी कराएगा। बोर्ड पर लिखा कैप्सन जंगल के बीच से गुजरने वाले राहगीरों के लिए एक चेतावनी और बाघों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा।
सर्दी का मौसम आते ही बाघों के स्वभाव में कुछ परिवर्तन आ जाता है। जंगल की गीली घास एवं सूखी जमीन छोड़कर अक्सर पक्के मार्गों पर बाघ नजर आते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में कई ऐसे रास्ते हैं जो घने जंगल से होकर गुजरते हैं। इन रास्तों पर अक्सर राहगीरों का बाघ के साथ आमना सामना हो जाता है। कई बार राहगीर बाघ हमले का शिकार भी हो जाते हैं। यह बोर्ड ऐसी स्थितियों से बचने में कारगर साबित हो सकता है।
कुछ समाज सेवी संगठनों के माध्यम से ऐसे ही बोर्ड कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में लगाए गए हैं। अब ऐसे ही बोर्ड पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व के संवेदनशील जगहों और जंगल से गुजरने वाले रास्तों के किनारे लगाने की तैयारी कर रहा है। बढ़ती ठंड और बादलों के पीछे छिपा सूरज के साथ बाघ की तस्वीर पर लिखा कैप्सन मानव बाघ संघर्ष रोकने में प्रभावी साबित हो सकता है। साथ ही बाघों को दुर्घटनाओं से भी बचाव हो सकता है।
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सर्दी के मौसम में बाघ जंगल से निकलकर सड़कों पर ही नहीं गन्ने के खेतों में भी आ जाते हैं जिससे मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अब वन विभाग ऐसी जगहों पर बाघ प्रभावित क्षेत्र होने की बात प्रदर्शित करने वाले बोर्ड लगाने का मन बना रहा है। ताकि लोग सचेत हों। हर साल मानव बाघ संघर्ष में जिले में कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ता है। कई लोग घायल हो जाते हैं।
मानव बाघ संघर्ष रोकने के लिए पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल की उन सड़कों के किनारे बोर्ड लगाएगा जिन पर बाघों की आवाजाही रहते है। यह बोर्ड राहगीरों का बाघ से बचाव करेंगे, साथ ही सैलानियों को दुधवा जंगल में बाघों की बहुलता के बारे में भी पता चलेगा।
संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व
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सर्दी का मौसम आते ही बाघों के स्वभाव में कुछ परिवर्तन आ जाता है। जंगल की गीली घास एवं सूखी जमीन छोड़कर अक्सर पक्के मार्गों पर बाघ नजर आते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में कई ऐसे रास्ते हैं जो घने जंगल से होकर गुजरते हैं। इन रास्तों पर अक्सर राहगीरों का बाघ के साथ आमना सामना हो जाता है। कई बार राहगीर बाघ हमले का शिकार भी हो जाते हैं। यह बोर्ड ऐसी स्थितियों से बचने में कारगर साबित हो सकता है।
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कुछ समाज सेवी संगठनों के माध्यम से ऐसे ही बोर्ड कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में लगाए गए हैं। अब ऐसे ही बोर्ड पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व के संवेदनशील जगहों और जंगल से गुजरने वाले रास्तों के किनारे लगाने की तैयारी कर रहा है। बढ़ती ठंड और बादलों के पीछे छिपा सूरज के साथ बाघ की तस्वीर पर लिखा कैप्सन मानव बाघ संघर्ष रोकने में प्रभावी साबित हो सकता है। साथ ही बाघों को दुर्घटनाओं से भी बचाव हो सकता है।
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सर्दी के मौसम में बाघ जंगल से निकलकर सड़कों पर ही नहीं गन्ने के खेतों में भी आ जाते हैं जिससे मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अब वन विभाग ऐसी जगहों पर बाघ प्रभावित क्षेत्र होने की बात प्रदर्शित करने वाले बोर्ड लगाने का मन बना रहा है। ताकि लोग सचेत हों। हर साल मानव बाघ संघर्ष में जिले में कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ता है। कई लोग घायल हो जाते हैं।
मानव बाघ संघर्ष रोकने के लिए पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल की उन सड़कों के किनारे बोर्ड लगाएगा जिन पर बाघों की आवाजाही रहते है। यह बोर्ड राहगीरों का बाघ से बचाव करेंगे, साथ ही सैलानियों को दुधवा जंगल में बाघों की बहुलता के बारे में भी पता चलेगा।
संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाइगर रिजर्व