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खेतों में गए बिना ही हो गया बर्बाद फसलों का सर्वे

Mon, 06 Apr 2015 08:09 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 06 Apr 2015 08:09 PM IST
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Used to be wasted without the crops surveyed
गेहूं, सरसों, चना और मसूर की लहलहाती फसल बर्बाद हो गई। सरकार ने 25 से 50 फीसदी तक नुकसान पर मुआवजा देने को कहा और 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी, लेकिन लेखपाल सर्वे करने गांव तक नहीं पहुंचे। अफसरों ने भी फरमान जारी करने के बाद आंख मूंदकर रिपोर्ट पर विश्वास कर लिया। यही वजह है कि रिपोर्ट के अनुसार जिले की निघासन तहसील के गांव बेलापरसुआ और मोहम्मदी के गांव मानाखेड़ा को छोड़कर किसी भी गांव में 20 फीसदी से अधिक का नुकसान ही नहीं हुआ है। चूंकि मुआवजा पाने के वही किसान हकदार है, जिनकी 25 से 50 फीसदी फसल का नुकसान हुआ हो, इसलिए बेलपरसुआ के 115 और मानाखेड़ा के 73 यानी 188 किसान ही मुआवजा पाएंगे। कुल मिलाकर फसल बर्बादी का सर्वे लाल फीताशाही की भेंट चढ़ गया है और सरकार से राहत पाने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को निराश होना पड़ रहा है।
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फसल हो गई चौपट...अब रोटी के लिए उधार भी नहीं मिल रहा
निघासन। तहसील क्षेत्र के किसान महादेव का कहना है कि उनके पांच बेटे हैं। उनके पास सिर्फ एक एकड़ खेती है। सभी खेती में हाथ बंटाते हैं और मजदूरी करते हैं। इस बार गेहूं की फसल अच्छी थी। उम्मीद थी कि इस बार साल भर के गेहूं का इंतजाम हो जाएगा, लेकिन बारिश और ओले गिरने से सबकुछ बर्बाद हो गया। अब मुआवजे की आस थी, लेकिन इस गांव में लेखपाल आए ही नहीं। अब सुन रहे हैं कि यहां नुकसान 20 फीसदी ही दिखा दिया गया है। वह कहते हैं कि वह बर्बाद हो गए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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छोटी जोत के किसानों को हुआ ज्यादा नुकसान
बांकेगंज। बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान छोटी जोत वाले किसानों का हुआ है। कहीं-कहीं तो उनकी पूरी फसल भी तबाह हो गई। उनके सामने भविष्य में रोजी-रोटी के लाले पड़ना तय है। सरकारी आंकड़ेबाजी में इन किसानों को कोई राहत मिलने की उम्मीद दिखाई नहीं पड़ रही है।
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अब कैसे करूंगा बिटिया के हाथ पीले
तहसील गोला के गांव बंजरिया के किसान रामेश्वर प्रसाद और उनका परिवार खेतों में खड़ी गेंहू की फसल बर्बाद होने से चिंतित है, क्याेंकि इस साल वह बिटिया की शादी करना चाहते थे। अब वह कहते हैं कि लगता है अबकी कन्यादान नहीं कर पाऊंगा। इतने नुकसान के बाद उसके हाथ कैसे पीले कर पाऊंगा।

फसलों की ऐसी बर्बादी कभी नहीं हुई
ग्राम श्यामपुर और ढाका निवासी किसान भगवती प्रसाद का कहना है कि लोगो को केंद्र और राज्य सरकारों से बारिश से तबाह हुई फसलों का मुआवजा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक सरकार का कोई नुमाइंदा उनकी सुधि लेने नहीं पहुंचा। इससे इससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

फसलों को नुकसान का सर्वे
जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में गेहूं का 18 फीसदी, लाही का 15 फीसदी, चना 15, मटर 15, मसूर 15, आलू 10 और जौ का 10 फीसदी तक नुकसान हुआ है।


शासन से मिले निर्देशों के क्रम में सर्वे कार्य कराया गया। जिले में निघासन तहसील के गांव बेलापरसुआ और मोहम्मदी के गांव मानाखेड़ा में 25 से 49 फीसदी तक फसलें क्षतिग्रस्त हुई है। इसके अलावा किसी भी गांव में 20 फीसदी से अधिक का नुकसान नहीं हुआ है। शासन के निर्देशानुसार ही आगे कोई कार्यवाही की जाएगी।
-हरिकेश चौैरसिया, एडीएम।
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