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Lakhimpur Kheri News: दो और गैंडों को बेहोश कर रेडियो कॉलर निकाले
Sat, 20 Dec 2025 11:12 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 20 Dec 2025 11:12 PM IST
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दुधवा में नर गैंडा नकुल को बेहोश कर कॉलर निकालते चिकित्सक। स्रोत : वन विभाग।
बांकेगंज। पशु चिकित्सकों की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार को एक नर नकुल व मादा दीपिका के गले से रेडियो कॉलर निकाल लिए। जंगल में दृश्यता शून्य होने से मादा विजयश्री को बेहोश नहीं किया जा सका।
टाइगर रिजर्व प्रशासन ने दुधवा के जंगल में गले में स्वच्छंद विचरण कर रहे एक नर और तीन मादा गैंडों के गले में लगे रेडियो कॉलर निकालने के लिए तीन दिवसीय अभियान शुक्रवार से चला रहा है। पहले दिन सुबह की पाली में पशु चिकित्सकों की टीम ने मादा गैंडा रिद्धी को बेहोश कर कॉलर निकाला। पशु चिकित्सकों की टीम ने दोपहर बाद अन्य गैंडों को बेहोश करने के लिए अभियान चलाया।
इस बीच मौसम की बेरुखी से जंगल में घने कोहरे के चलते दृश्यता शून्य हो गई। बावजूद इसके असम गुवाहाटी विश्वविद्यालय के मशहूर पशु चिकित्सक एवं पद्मश्री डॉ. केके शर्मा के नेतृत्व में गठित पशु चिकित्सकों की टीम में शामिल दुधवा के डॉ. दया शंकर, डॉ. तलहा, डॉ. दीपक वर्मा, वार्डेन महावीर सिंह, दीपक पांडे, रेंजर सुरेंद्र कुमार आदि ने हिम्मत नहीं हारी।
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दूसरे गैंडों को बेहोश करने के लिए टीम ने ट्रैंक्युलाइज गन से निशाना साधा, लेकिन गैंडे पशु चिकित्सकों को चकमा देकर चंद कदम आगे बढ़ गए। गैंडों और पशु चिकित्सकों की टीम के बीच काफी देर तक लुका-छिपी का खेल चलता रहा। इसके बाद जंगल में घना अंधेरा छाने से दूसरे गैंडों को बेहोश नहीं किया जा सका।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि अभियान के दूसरे दिन शनिवार को एक नर नकुल व एक मादा दीपिका गैंडा को बेहोश कर गले में लगा रेडियो कॉलर हटाने में सफलता मिली है। होश आने पर दोनों को फिर आजाद किया गया। अब फिलहाल तीन गैंडे बगैर रेडियो कॉलर के दुधवा के जंगल में विचरण करेंगे। तीसरे दिन रविवार को मादा गैंडा विजयश्री के गले में लगा रेडियो कॉलर निकालने का अभियान चलाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम अनुकूल होने पर रविवार को अभियान जल्द समाप्त हो जाएगा।
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टाइगर रिजर्व प्रशासन ने दुधवा के जंगल में गले में स्वच्छंद विचरण कर रहे एक नर और तीन मादा गैंडों के गले में लगे रेडियो कॉलर निकालने के लिए तीन दिवसीय अभियान शुक्रवार से चला रहा है। पहले दिन सुबह की पाली में पशु चिकित्सकों की टीम ने मादा गैंडा रिद्धी को बेहोश कर कॉलर निकाला। पशु चिकित्सकों की टीम ने दोपहर बाद अन्य गैंडों को बेहोश करने के लिए अभियान चलाया।
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इस बीच मौसम की बेरुखी से जंगल में घने कोहरे के चलते दृश्यता शून्य हो गई। बावजूद इसके असम गुवाहाटी विश्वविद्यालय के मशहूर पशु चिकित्सक एवं पद्मश्री डॉ. केके शर्मा के नेतृत्व में गठित पशु चिकित्सकों की टीम में शामिल दुधवा के डॉ. दया शंकर, डॉ. तलहा, डॉ. दीपक वर्मा, वार्डेन महावीर सिंह, दीपक पांडे, रेंजर सुरेंद्र कुमार आदि ने हिम्मत नहीं हारी।
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दूसरे गैंडों को बेहोश करने के लिए टीम ने ट्रैंक्युलाइज गन से निशाना साधा, लेकिन गैंडे पशु चिकित्सकों को चकमा देकर चंद कदम आगे बढ़ गए। गैंडों और पशु चिकित्सकों की टीम के बीच काफी देर तक लुका-छिपी का खेल चलता रहा। इसके बाद जंगल में घना अंधेरा छाने से दूसरे गैंडों को बेहोश नहीं किया जा सका।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि अभियान के दूसरे दिन शनिवार को एक नर नकुल व एक मादा दीपिका गैंडा को बेहोश कर गले में लगा रेडियो कॉलर हटाने में सफलता मिली है। होश आने पर दोनों को फिर आजाद किया गया। अब फिलहाल तीन गैंडे बगैर रेडियो कॉलर के दुधवा के जंगल में विचरण करेंगे। तीसरे दिन रविवार को मादा गैंडा विजयश्री के गले में लगा रेडियो कॉलर निकालने का अभियान चलाया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि मौसम अनुकूल होने पर रविवार को अभियान जल्द समाप्त हो जाएगा।