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ओआरएस, जिंक विधि से होगा डायरिया का इलाज
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 22 Dec 2014 11:30 PM IST
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ओआरएस और जिंक की संयुक्त चिकित्सा विधि से डायरिया पीड़ित बच्चों का इलाज हेल्थ वर्कर करेंगे। ओआरएस और जिंक से दस्त के इलाज का तरीका स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जनवरी में शुरू होने वाले दस्त प्रबंधन प्रशिक्षण में सिखाया जाएगा। यह जानकारी डायरिया प्रोग्राम के रीजनल डायरेक्टर संजय सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि डायरिया मैनेजमेंट की तीन चरणों की ट्रेनिंग हो चुकी है। खीरी जिले में अब चौथे चरण की ट्रेनिंग सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनवरी में दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ओआरएस जिंक से इलाज करने की विधि, कार्यकर्ताओं के अनुभव और अब तक उपचारित बच्चों की संख्या पर विस्तृत चर्चा होगी।
उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद डायरिया से होने वाली मृत्युदर में कमी लाना है। दस्त प्रबंधन का प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके स्वास्थ्य कार्यकर्ता ओआरएस और जिंक से दस्त पीड़ित तमाम बच्चों का इलाज कर चुके हैं। यह चिकित्सा पद्धति बेहद कारगर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ ओआरएस-जिंक से बच्चों का सुरक्षित इलाज करने का सुझाव देती है।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा, एएनएम आदि के लिए ट्रेनिग अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके जरिए प्रशिक्षणार्थियों में दस्त उपचार को लेकर निश्चित ही क्षमता वृद्धि होगी।
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उन्होंने बताया कि डायरिया मैनेजमेंट की तीन चरणों की ट्रेनिंग हो चुकी है। खीरी जिले में अब चौथे चरण की ट्रेनिंग सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जनवरी में दी जाएगी। इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ओआरएस जिंक से इलाज करने की विधि, कार्यकर्ताओं के अनुभव और अब तक उपचारित बच्चों की संख्या पर विस्तृत चर्चा होगी।
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उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद डायरिया से होने वाली मृत्युदर में कमी लाना है। दस्त प्रबंधन का प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके स्वास्थ्य कार्यकर्ता ओआरएस और जिंक से दस्त पीड़ित तमाम बच्चों का इलाज कर चुके हैं। यह चिकित्सा पद्धति बेहद कारगर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ ओआरएस-जिंक से बच्चों का सुरक्षित इलाज करने का सुझाव देती है।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा, एएनएम आदि के लिए ट्रेनिग अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके जरिए प्रशिक्षणार्थियों में दस्त उपचार को लेकर निश्चित ही क्षमता वृद्धि होगी।