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थारू शिल्प ग्राम के संचालन को लेकर शुरू हुई कवायद
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चंदन चौकी में निर्मित थारू शिल्प ग्राम। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क के आसपास रहने वाले थारू जनजाति के समग्र विकास एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चंदनचौकी में थारू शिल्प ग्राम का निर्माण कराया गया लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते थारू शिल्प ग्राम बड़े पर्यटन स्थल बनने से चूक गया।
उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम के इसमें रुचि नहीं दिखाने के बाद सरकार अब थारू शिल्प ग्राम के संचालन के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। डीएम की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों संग बैठक के बाद थारू शिल्प ग्राम के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आने वाले दिनों में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही थारू जनजाति के विकास को नया आयाम मिल सकता है।
बार्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड तीन ने 174.79 लाख की लागत से इसका निर्माण कराया, जिसमें थारू हैरिटेज वर्क शेड, थारू शिल्प विक्रय प्रदर्शन केंद्र, शिल्प/वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, थारू रेस्टोरेंट, थारू हट, थारू नृत्य संगीत केंद्र के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए थे। इसके संचालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति भी गठित की गई, जिसने सबसे पहले उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम को संचालन के लिए आमंत्रित किया , लेकिन निगम के अधिकारियों ने शिल्प ग्राम का दौरा करने के बाद इसके संचालन में कोई रुचि नहीं दिखाई थी।
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आजीविका मिशन के तहत गठित समूहों की महिलाओं को थारू शिल्प ग्राम के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके संचालन के लिए संस्था के चयन की प्रक्रिया अभी चल रही है। शिल्प ग्राम में काम करने वाले सभी कर्मचारी थारू जनजाति के रहेंगे। समिति की अगली बैैठक में शिल्प ग्राम के संचालन की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
-यूके सिंह, परियोजना अधिकारी, एकीकृत जनजाति विकास विभाग
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उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम के इसमें रुचि नहीं दिखाने के बाद सरकार अब थारू शिल्प ग्राम के संचालन के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। डीएम की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों संग बैठक के बाद थारू शिल्प ग्राम के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आने वाले दिनों में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही थारू जनजाति के विकास को नया आयाम मिल सकता है।
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बार्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड तीन ने 174.79 लाख की लागत से इसका निर्माण कराया, जिसमें थारू हैरिटेज वर्क शेड, थारू शिल्प विक्रय प्रदर्शन केंद्र, शिल्प/वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, थारू रेस्टोरेंट, थारू हट, थारू नृत्य संगीत केंद्र के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए थे। इसके संचालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति भी गठित की गई, जिसने सबसे पहले उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम को संचालन के लिए आमंत्रित किया , लेकिन निगम के अधिकारियों ने शिल्प ग्राम का दौरा करने के बाद इसके संचालन में कोई रुचि नहीं दिखाई थी।
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आजीविका मिशन के तहत गठित समूहों की महिलाओं को थारू शिल्प ग्राम के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके संचालन के लिए संस्था के चयन की प्रक्रिया अभी चल रही है। शिल्प ग्राम में काम करने वाले सभी कर्मचारी थारू जनजाति के रहेंगे। समिति की अगली बैैठक में शिल्प ग्राम के संचालन की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
-यूके सिंह, परियोजना अधिकारी, एकीकृत जनजाति विकास विभाग