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बाघ का निवाला बनते-बनते बची बकरी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 19 Feb 2018 07:00 PM IST
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जंगल से निकले बाघ ने सिंगाही थानाक्षेत्र के गांव गोविंदपुर में फिर दस्तक दी है। सोमवार की शाम करीब चार बजे बाघ ने एक बकरी को निवाला बनाने की कोशिश की। गन्ना छील रहे ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ गन्ने के खेत में घुस गया। सूचना पर वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंच गई है।
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बता दें कि 11 फरवरी को बाघ ने इसी थानाक्षेत्र के गांव गजियापुर में एक गाय को अपना निवाला बनाया था। उसके बाद बाघ टांडा पहुंचा। वहां पर भी एक बैल को अपना निशाना बनाया, लेकिन ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ गन्ने के खेत में जा छुपा। उसके बाद दो दिनों तक बाघ नौरंगाबाद के एक खेत में छिपा रहा। वहां पर जेसीबी से खदेड़े जाने पर बाघ करदहिया से फरदहिया होते हुए तकिया जंगल चला गया था। इसके बाद बाघ घोसियाना के पास ठाकुर पुरवा गांव में बाघ देखा गया। वन विभाग ने पिंजड़ा आदि लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहे।
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सोमवार शाम करीब चार बजे गोबिंदपुर फार्म निवासी चरन सिंह कई लोगों के साथ खेत में गन्ना छील रहे थे। इसी बीच उसी गन्ने के एक ओर से निकलकर बाघ ने पड़ोस में घास खा रही बकरियों को अपना निशाना बनाया और उसे निवाला बनाने का प्रयास किया, लेकिन बाघ को देखकर खेत में गन्ना छील रहे लोगों शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर बाघ उन लोगों की ओर बढ़ा, लेकिन इसी बीच लोगों की अधिक संख्या होने के कारण बाघ चरनजीत के गन्ने के खेत में चला गया। सूचना मिलने पर लुधौरी रेंज के रेंजर पलटूराम राना और थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने वहां पर लोगों के आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। रेंजर ने बताया कि बाघ के पगमाक्र के अनुसार सिंगाही थानाक्षेत्र में विचरण करने वाला ही बाघ लग रहा है। पूरी टीम बाघ के पीछे लगा दी गई है। शीघ्र ही उसे पकड़ा जाएगा।
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