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बाघ की तलाश के लिए 10 जोड़ी कैमरे और लगाए गए
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किशनपुर सेंक्चुरी में लगे कैमरों को चेक करती वन कर्मियों की टीम। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में ट्रैंक्युलाइज करने के लिए तलाशे जा रहे बाघ का अब तक कोई सटीक सुराग नहीं मिल पाया है। पिछले 15 दिन के अंदर कई बार इस बाघ की तस्वीर कैमरे में ट्रैप हुईं, पगचिह्न भी दिखाई दिए, लेकिन तीन दिन से उसका कोई अता-पता नहीं है। अब वन विभाग सर्च अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 जोड़ी और कैमरे लगा रहा है।
किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में बार-बार चकमा दे रहे इस बाघ को तलाशने के लिए वन विभाग ने गूगल अर्थ मैप पर जीपीएस सिस्टम का सहारा लेने की नई रणनीत बनाई है। इसी के तहत कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अब वन विभाग संभावित स्थलों पर दस जोड़ी और कैमरे लगा रहा है। इन कैमरों को मिलाकर अब इस बाघ को तलाशने के लिए 30 जोड़ी कैमरे लगाए जा चुके हैं। पेट्रोलिंग टीमें भी पैदल, हाथियों और जालीदार ट्रैक्टर के जरिए संभावित स्थलों का चप्पा-चप्पा छान रही हैं। इतने सब प्रयासों के बावजूद बाघ वन विभाग के घेरे में नहीं आ रहा है।
पिछले तीन दिनों से बाघ फिर आंखों से ओझल है। इस दौरान न तो उसकी तस्वीरें कैमरे में ट्रैप हुई हैं और न ही उसके पगचिह्न दिखाई दिए हैं। सर्च अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 जोड़ी कैमरे लगाए जा रहे हैं। - मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।
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किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में बार-बार चकमा दे रहे इस बाघ को तलाशने के लिए वन विभाग ने गूगल अर्थ मैप पर जीपीएस सिस्टम का सहारा लेने की नई रणनीत बनाई है। इसी के तहत कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अब वन विभाग संभावित स्थलों पर दस जोड़ी और कैमरे लगा रहा है। इन कैमरों को मिलाकर अब इस बाघ को तलाशने के लिए 30 जोड़ी कैमरे लगाए जा चुके हैं। पेट्रोलिंग टीमें भी पैदल, हाथियों और जालीदार ट्रैक्टर के जरिए संभावित स्थलों का चप्पा-चप्पा छान रही हैं। इतने सब प्रयासों के बावजूद बाघ वन विभाग के घेरे में नहीं आ रहा है।
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पिछले तीन दिनों से बाघ फिर आंखों से ओझल है। इस दौरान न तो उसकी तस्वीरें कैमरे में ट्रैप हुई हैं और न ही उसके पगचिह्न दिखाई दिए हैं। सर्च अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 10 जोड़ी कैमरे लगाए जा रहे हैं। - मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।
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