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सगे भाइयों सहित तीन को उम्रकैद
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 19 Jun 2015 07:21 PM IST
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ग्रामीण की हत्या के मामले में अपर जिला जज रामायण शर्मा ने दो सगे भाइयों सहित तीन हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 26-26 हजार का डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता वीरेश सिंह तोमर ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम परेवा निवासी कामता प्रसाद की लड़की को गांव का ही संतोष यादव बहला फुसलाकर 16 फरवरी 2009 को भगा ले गया था। इसके विरोध में कामता और संतोष के परिवार वालों के बीच रंजिश पनपने लगी। आरोप है कि इसी बीच 30 अक्तूबर 2009 को कामता अपने दोस्त किशुन गडरिया की भैंस खरीदने के लिए सुबह नौ बजे गांव के ही जयराम के घर गया। इसी बीच पहले से घात लगाकर बैठे संतोष के परिवार के सदस्यों छेद्दू और उसके भाई कनौजी यादव के साथ गांव के ही कमलेश और छोटेलाल ने कामता को पकड़ लिया। छेद्दू और कनौजी ने बांके से खांदकर तो कमलेश और छोटेलाल ने लाठी डंडों से पीटकर कामता की हत्या कर दी। शोरगुल के बीच लड़की अपने पिता को बचाने पहुंची तो उसे भी बांके से मारकर घायल कर दिया गया।
अदालती सुनवाई के दौरान एडीजीसी वीरेश सिंह तोमर ने सावित्री देवी, डॉ.एसके पांडेय, डॉ.वीएस तोमर, कांस्टेबल रामप्रसाद और एसआई शशि कुमार पांडेय, तथा एसआई आरके शुक्ला समेत कई लोगों की गवाही दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए रामकिशुन की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए छेद्दू, कनौजी और कमलेश को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही प्रत्येक पर 26-26 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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इस मामले में आरोपी छोटेलाल अपने खिलाफ पेश होती अदालती सामग्री, बहस और दलीलों के बीच परेशान होता रहा, जैसे-जैसे मुकदमा निर्णय की प्रक्रिया में आने लगा तो संभावित सजा की आशंका छोटेलाल को हलकान करने लगी। उसने फैसला आने से एक महीने पहले ही गांव में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
पीड़िता को मिलेगा मुआवजा
अपना फैसला सुनाते हुए जज रामायण शर्मा ने यह भी आदेशित किया है कि हत्यारोपियों से वसूल होने वाली जुर्माने की रकम में से मृतक कामता के परिवार वालों को 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा दिया जाए।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता वीरेश सिंह तोमर ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम परेवा निवासी कामता प्रसाद की लड़की को गांव का ही संतोष यादव बहला फुसलाकर 16 फरवरी 2009 को भगा ले गया था। इसके विरोध में कामता और संतोष के परिवार वालों के बीच रंजिश पनपने लगी। आरोप है कि इसी बीच 30 अक्तूबर 2009 को कामता अपने दोस्त किशुन गडरिया की भैंस खरीदने के लिए सुबह नौ बजे गांव के ही जयराम के घर गया। इसी बीच पहले से घात लगाकर बैठे संतोष के परिवार के सदस्यों छेद्दू और उसके भाई कनौजी यादव के साथ गांव के ही कमलेश और छोटेलाल ने कामता को पकड़ लिया। छेद्दू और कनौजी ने बांके से खांदकर तो कमलेश और छोटेलाल ने लाठी डंडों से पीटकर कामता की हत्या कर दी। शोरगुल के बीच लड़की अपने पिता को बचाने पहुंची तो उसे भी बांके से मारकर घायल कर दिया गया।
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अदालती सुनवाई के दौरान एडीजीसी वीरेश सिंह तोमर ने सावित्री देवी, डॉ.एसके पांडेय, डॉ.वीएस तोमर, कांस्टेबल रामप्रसाद और एसआई शशि कुमार पांडेय, तथा एसआई आरके शुक्ला समेत कई लोगों की गवाही दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए रामकिशुन की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए छेद्दू, कनौजी और कमलेश को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही प्रत्येक पर 26-26 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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इस मामले में आरोपी छोटेलाल अपने खिलाफ पेश होती अदालती सामग्री, बहस और दलीलों के बीच परेशान होता रहा, जैसे-जैसे मुकदमा निर्णय की प्रक्रिया में आने लगा तो संभावित सजा की आशंका छोटेलाल को हलकान करने लगी। उसने फैसला आने से एक महीने पहले ही गांव में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
पीड़िता को मिलेगा मुआवजा
अपना फैसला सुनाते हुए जज रामायण शर्मा ने यह भी आदेशित किया है कि हत्यारोपियों से वसूल होने वाली जुर्माने की रकम में से मृतक कामता के परिवार वालों को 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा दिया जाए।